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कर्नाटक जल संकट: भाजपा नेता आर. अशोक ने सिद्दारमैया सरकार पर साधा निशाना, गडग के 76 गांवों में पेयजल संकट

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कर्नाटक जल संकट: भाजपा नेता आर. अशोक ने सिद्दारमैया सरकार पर साधा निशाना, गडग के 76 गांवों में पेयजल संकट

सारांश

कर्नाटक में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच भाजपा नेता आर. अशोक ने सिद्दारमैया सरकार को घेरा। गडग के 76 से अधिक गांवों में पेयजल का अकाल, बेलगावी में 20% गन्ना फसल बर्बाद — और आरोप है कि जलाशयों में पानी होने के बावजूद बिजली संकट के कारण किसान पंप नहीं चला पा रहे।

मुख्य बातें

अशोक ने 29 अप्रैल को सिद्दारमैया सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
गडग जिले के 76 से अधिक गांवों में गंभीर पेयजल संकट, इंसान और पशु दोनों प्रभावित।
बेलगावी के चिक्कोडी और निप्पाणी में गन्ने की 20 प्रतिशत फसल तेज गर्मी से नष्ट।
काबिनी, कृष्णा और मलप्रभा जलाशयों में पानी होने के बावजूद बिजली संकट से किसान पंप नहीं चला पा रहे।
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला व तालुक अस्पतालों को हीट स्ट्रोक के लिए विशेष बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए, व्यवस्था 31 जुलाई तक लागू रहेगी।
अशोक ने प्रभावित किसानों के लिए तत्काल मुआवजे और गांवों में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था की मांग की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने बुधवार, 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि भीषण गर्मी और जल संकट के बीच राज्य सरकार किसानों की पूरी तरह अनदेखी कर रही है। उन्होंने गडग जिले के 76 से अधिक गांवों में गहराते पेयजल संकट और बेलगावी जिले में गन्ने की 20 प्रतिशत फसल बर्बाद होने का हवाला देते हुए सरकार से तत्काल मुआवजे और राहत की मांग की।

मुख्य घटनाक्रम

अशोक के अनुसार, बेलगावी जिले के चिक्कोडी और निप्पाणी क्षेत्रों में तेज गर्मी के कारण गन्ने की करीब 20 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है। वहीं, गडग जिले के 76 से अधिक गांवों में इंसान और पशु दोनों पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से टैंकर माफिया को बढ़ावा दे रही है, हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

विरोधाभासी स्थिति: पानी है, बिजली नहीं

अशोक ने एक विशेष विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, काबिनी, कृष्णा और मलप्रभा जैसे जलाशयों में पानी उपलब्ध होने के बावजूद बिजली की कमी के कारण किसान अपने पंप सेट नहीं चला पा रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता करार दिया और कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गडग के 76 गांवों में पेयजल संकट और बेलगावी में फसल नुकसान के आंकड़े ज़मीनी पीड़ा को दर्शाते हैं जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। काबिनी और मलप्रभा जैसे जलाशयों में पानी होते हुए भी बिजली संकट के कारण किसानों का पंप न चला पाना — यह महज़ विपक्षी बयानबाज़ी नहीं, बल्कि नीतिगत समन्वय की विफलता का संकेत है। कर्नाटक में हर गर्मी में यही चक्र दोहराया जाता है — संकट आता है, बयान आते हैं, राहत देर से पहुँचती है। स्वास्थ्य विभाग का हीट स्ट्रोक बेड आरक्षण एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली ज़रूरत किसानों के लिए बिजली-पानी के समन्वित समाधान की है, जो अभी तक नज़र नहीं आ रहा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में जल संकट की स्थिति कितनी गंभीर है?
भाजपा नेता आर. अशोक के अनुसार, गडग जिले के 76 से अधिक गांवों में गंभीर पेयजल संकट है जहाँ इंसान और पशु दोनों पानी के लिए जूझ रहे हैं। बेलगावी जिले के चिक्कोडी और निप्पाणी में गन्ने की 20 प्रतिशत फसल भी तेज गर्मी से बर्बाद हो चुकी है।
काबिनी, कृष्णा और मलप्रभा जलाशयों में पानी होने के बावजूद किसान क्यों परेशान हैं?
अशोक के अनुसार, इन जलाशयों में पानी उपलब्ध है लेकिन बिजली की कमी के कारण किसान अपने पंप सेट नहीं चला पा रहे। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता और नीतिगत समन्वय की कमी बताया है।
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने हीटवेव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला और तालुक अस्पतालों को हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं — सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2, तालुक अस्पतालों में कम से कम 5, और जिला अस्पतालों में कम से कम 10 बेड। यह व्यवस्था 31 जुलाई तक लागू रहेगी।
भाजपा ने सिद्दारमैया सरकार से क्या मांगें की हैं?
आर. अशोक ने प्रभावित किसानों के लिए तत्काल मुआवजे की घोषणा और गांवों में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से आग्रह किया कि वे राजनीतिक खींचतान छोड़कर उत्तर कर्नाटक के किसानों की समस्याओं पर ध्यान दें।
टैंकर माफिया पर अशोक का क्या आरोप है?
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से टैंकर माफिया को बढ़ावा दे रही है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि सरकारी पेयजल व्यवस्था की विफलता के कारण निजी टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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