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कर्नाटक भाजपा का ₹225 करोड़ 'गृह लक्ष्मी' घोटाले का आरोप, सीबीआई जांच की मांग

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कर्नाटक भाजपा का ₹225 करोड़ 'गृह लक्ष्मी' घोटाले का आरोप, सीबीआई जांच की मांग

सारांश

कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक ने 'गृह लक्ष्मी योजना' में ₹225 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप लगाया है — मृत लाभार्थियों के खातों में बार-बार ट्रांसफर और डेटा हेरफेर के दावों के साथ। उन्होंने इसे 'राज्य-प्रायोजित साइबर अपराध' बताते हुए सीबीआई जांच की माँग की है।

मुख्य बातें

अशोक ने कर्नाटक की 'गृह लक्ष्मी योजना' में ₹225 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप लगाया।
कथित तौर पर मृत लाभार्थियों के खातों और एक ही बैंक खाते में बार-बार फंड ट्रांसफर किए गए।
2.11 लाख मृत लाभार्थियों के रिकॉर्ड की पहचान; 77,376 अन्य मृत लाभार्थियों का डेटा विभाग ने उपलब्ध नहीं कराया।
अशोक ने CBI और केंद्रीय साइबर एजेंसियों से तत्काल जांच की माँग की।
शिवकुमार पर चुप्पी साधने का आरोप; सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कुमारकृपा गेस्ट हाउस नवीनीकरण बनाम सरकारी हॉस्टलों की उपेक्षा पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 26 जून 2025 को आरोप लगाया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'गृह लक्ष्मी योजना' में कथित तौर पर ₹225 करोड़ का घोटाला हुआ है। उन्होंने इसे 'राज्य-प्रायोजित साइबर अपराध' करार देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और केंद्रीय साइबर अपराध एजेंसियों से तत्काल जांच की माँग की। कर्नाटक सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आरोपों का मूल आधार

अशोक के अनुसार, यह कथित गड़बड़ी नियमित ऑडिट के ज़रिए नहीं, बल्कि विभागीय रिकॉर्ड के 'डेटा डंप' विश्लेषण से सामने आई। उनका दावा है कि सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम में हेरफेर कर मृत लाभार्थियों के खातों में और कुछ मामलों में एक ही बैंक खाते में बार-बार धनराशि स्थानांतरित की गई। उन्होंने कहा कि दो वर्षों के दौरान कुछ खातों को कई महीनों बाद पुनः सक्रिय किया गया और बीच-बीच में भुगतान किए गए — जो कथित तौर पर डिजिटल हेरफेर और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग का संकेत देता है।

मृत लाभार्थियों के डेटा पर सवाल

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि 2.11 लाख मृत लाभार्थियों के रिकॉर्ड की पहचान तो की गई थी, परंतु विभाग ने 77,376 अन्य मृत लाभार्थियों का डिजिटल डेटा उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन खातों से जुड़े साइबर लॉग को बदला या हटाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से उन आईपी एड्रेस का पता लगाने और उस नेटवर्क की पहचान करने की माँग की, जिनके ज़रिए कथित तौर पर फंड को अन्यत्र भेजा गया।

मुख्यमंत्री शिवकुमार पर निशाना

अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर इस मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि इस धोखाधड़ी को महज 'तकनीकी चूक' कहकर नहीं टाला जा सकता। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की कथित मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए निष्पक्ष जांच की माँग दोहराई।

हॉस्टल और कुमारकृपा गेस्ट हाउस विवाद

इसके अतिरिक्त, अशोक ने पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए संचालित सरकारी हॉस्टलों की दयनीय स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ बेंगलुरु के कुमारकृपा गेस्ट हाउस — जो 160 वर्ष पुराना है और जिसे मुख्यमंत्री शिवकुमार अपने आधिकारिक आवास-सह-कार्यालय में बदलना चाहते हैं — के नवीनीकरण पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्रों के हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग में पूर्णकालिक मंत्री की अनुपस्थिति को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।

आगे की माँगें

अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से आग्रह किया कि वे राज्यभर के सरकारी हॉस्टलों का व्यक्तिगत रूप से दौरा कर वहाँ की स्थिति का जायजा लें। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक सरकार की गारंटी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता पहले से ही सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि सरकार इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या जांच के लिए कोई आधिकारिक कदम उठाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि ये दावे अभी तक केवल विपक्षी पार्टी के 'डेटा डंप विश्लेषण' पर आधारित हैं — किसी स्वतंत्र ऑडिट या न्यायिक जांच पर नहीं। कर्नाटक की गारंटी योजनाएँ सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक पहचान का केंद्र हैं, इसलिए इन पर लगे आरोप स्वाभाविक रूप से तीखे राजनीतिक रंग लेते हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार पारदर्शिता दिखाते हुए स्वतंत्र जांच की अनुमति देती है, या मृत लाभार्थियों के 77,376 खातों का डेटा अनुत्तरित ही रहता है। जब तक सरकार की ओर से विस्तृत खंडन या जांच की घोषणा नहीं होती, जनकल्याण योजनाओं की डिजिटल निगरानी पर बड़े सवाल खड़े रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह लक्ष्मी योजना में ₹225 करोड़ के घोटाले का आरोप क्या है?
भाजपा नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक सरकार की 'गृह लक्ष्मी योजना' में कथित तौर पर ₹225 करोड़ की हेराफेरी हुई है, जिसमें मृत लाभार्थियों के खातों और एक ही बैंक खाते में बार-बार फंड ट्रांसफर किए गए। यह जानकारी कथित तौर पर विभागीय रिकॉर्ड के 'डेटा डंप विश्लेषण' से सामने आई है।
भाजपा ने सीबीआई जांच की माँग क्यों की?
अशोक का कहना है कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की कथित मिलीभगत है, इसलिए राज्य एजेंसियों से निष्पक्ष जांच संभव नहीं। उन्होंने इसे 'राज्य-प्रायोजित साइबर अपराध' बताते हुए CBI और केंद्रीय साइबर एजेंसियों से जांच की माँग की है।
मृत लाभार्थियों के डेटा को लेकर क्या विवाद है?
अशोक के अनुसार 2.11 लाख मृत लाभार्थियों के रिकॉर्ड की पहचान की गई थी, लेकिन विभाग ने 77,376 अन्य मृत लाभार्थियों का डिजिटल डेटा उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने आशंका जताई कि इन खातों के साइबर लॉग को बदला या हटाया जा सकता है।
कुमारकृपा गेस्ट हाउस विवाद क्या है?
अशोक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार बेंगलुरु के 160 वर्ष पुराने कुमारकृपा गेस्ट हाउस के नवीनीकरण पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं, जबकि पिछड़े वर्गों और SC/ST छात्रों के सरकारी हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएँ नदारद हैं। यह सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।
कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अभी तक कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की ओर से भी कोई बयान सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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