13 जुलाई 2026
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एसआईआर प्रक्रिया में स्थायी निवास प्रमाण पत्र: कर्नाटक भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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एसआईआर प्रक्रिया में स्थायी निवास प्रमाण पत्र: कर्नाटक भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक ने चामराजनगर में आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर रही है — जिससे कथित तौर पर अवैध प्रवासियों को फायदा मिल सकता है। साथ ही सूखा राहत के लिए ₹10,000 करोड़ की माँग पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

अशोक ने 13 जुलाई को चामराजनगर में आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार एसआईआर प्रक्रिया के ज़रिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर रही है।
भाजपा का दावा है कि देश में कथित तौर पर 2 करोड़ बांग्लादेशी नागरिक हैं और ऐसे प्रमाण पत्र उनके निर्वासन को असंभव बना देंगे।
अशोक ने कहा कि नागरिकता देने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, राज्य सरकार इस क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया कि बिना सर्वेक्षण और सूखा घोषणा के केंद्र से ₹10,000 करोड़ की माँग की गई।
कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 13 जुलाई को चामराजनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर रही है, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने माँग की कि यह प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और अब तक जारी किए गए सभी प्रमाण पत्र रद्द किए जाएँ।

मुख्य आरोप: एसआईआर का दुरुपयोग

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में पंजीकृत करना है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के अंतर्गत स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह संविधान की भावना के विरुद्ध भी है।

उन्होंने कहा, 'आज़ादी के इतने वर्षों बाद यदि अब स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, तो सवाल उठता है कि क्या हम सब अब तक असुरक्षा में जी रहे थे?' अशोक ने आगे आरोप लगाया कि देश में कथित तौर पर लगभग 2 करोड़ बांग्लादेशी नागरिक हैं, और यदि ऐसे लोगों को ये प्रमाण पत्र मिल गए तो उन्हें वापस भेजना असंभव हो जाएगा।

नागरिकता का अधिकार: केंद्र बनाम राज्य

अशोक ने संवैधानिक पक्ष रखते हुए कहा कि नागरिकता प्रदान करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं पाया जाता, तो केंद्र ही उसे उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया करता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहाँ कांग्रेस की सहयोगी ममता बनर्जी सत्ता में थीं, तब बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक आए थे और कांग्रेस ने उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

सांप्रदायिक तनाव और तुष्टीकरण के आरोप

अशोक ने चेतावनी दी कि यदि कर्नाटक सरकार तुष्टीकरण की नीति जारी रखती है, तो राज्य में सांप्रदायिक दंगों की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम संगठनों के विरुद्ध दर्ज मामले पहले ही वापस लिए जा चुके हैं और अब प्रमाण पत्र जारी कर अल्पसंख्यकों को खुश करने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सूखा राहत पर भी निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर सूखा राहत के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवकुमार ने न तो राज्य में सूखाग्रस्त क्षेत्रों की विधिवत घोषणा की है, न ही कोई सर्वेक्षण कराया है, न ही चारे और पानी की स्थिति का आकलन किया है — फिर भी केपीसीसी की बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से ₹10,000 करोड़ की माँग की गई।

अशोक ने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार पहले सर्वेक्षण कराती है, केंद्र को रिपोर्ट सौंपती है, और केंद्र के अधिकारी सत्यापन के बाद ही राशि जारी करते हैं। उन्होंने यह भी माँग की कि सरकार बताए कि एसडीआरएफ के तहत पहले मिली राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया।

आगे क्या होगा

भाजपा ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की माँग कर सकती है। कर्नाटक सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें कई दावे — जैसे '2 करोड़ बांग्लादेशी' — स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं और इन्हें सावधानी से परखने की ज़रूरत है। असली सवाल यह है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया के तहत स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करना चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है — और यह जवाब केवल चुनाव आयोग ही दे सकता है। सूखा राहत वाला मुद्दा अलग और वैध है: बिना औपचारिक सर्वेक्षण के केंद्र से धन माँगना प्रक्रियागत रूप से कमज़ोर स्थिति है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन दो अलग-अलग मुद्दों को एक साथ मिला देती है, जिससे दोनों की जवाबदेही धुंधली हो जाती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इसका विवाद क्यों है?
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल पात्र भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है। भाजपा का आरोप है कि कर्नाटक सरकार इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर रही है, जो इस प्रक्रिया के दायरे से बाहर है।
आर. अशोक ने स्थायी निवास प्रमाण पत्र रद्द करने की माँग क्यों की?
अशोक का तर्क है कि यदि अवैध प्रवासियों को ये प्रमाण पत्र मिल गए तो उन्हें वापस भेजना कानूनी रूप से बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नागरिकता और निवास से जुड़े दस्तावेज़ देने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
कर्नाटक में सूखा राहत को लेकर भाजपा ने क्या सवाल उठाए?
भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने न तो सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा की, न सर्वेक्षण कराया, फिर भी केपीसीसी बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से ₹10,000 करोड़ की माँग की। अशोक ने एसडीआरएफ के तहत पहले मिली राशि का हिसाब भी माँगा।
क्या कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भाजपा ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी।
भाजपा के इन आरोपों का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर भाजपा लगातार तुष्टीकरण के आरोप लगाती रही है, और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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