कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र विवाद: कांग्रेस सरकार का संवैधानिक अधिकार का दावा, BJP ने अमित शाह से माँगा हस्तक्षेप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 10 जुलाई 2026 को राज्य में स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने के अपने फैसले का कड़ा बचाव किया और स्पष्ट किया कि उसे संविधान के तहत ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उठाए गए सवालों के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव तेज़ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक परमानेंट रेजिडेंस सर्टिफिकेट, 2026 अधिसूचना जारी की है, जिसके बाद यह विवाद सामने आया। राज्य कांग्रेस सरकार का कहना है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत यह कदम उठा रही है।
गृह मंत्री प्रियंक खड़गे का बयान
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने BJP के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'क्या राज्य सरकार स्थायी निवास से जुड़े नियम नहीं बना सकती? हम एक निर्वाचित सरकार हैं और शासन चलाना हमारी जिम्मेदारी है। सरकार अपने प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से आदेश जारी करती है। हम स्थायी निवास प्रमाण पत्र सरकार के माध्यम से जारी कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी के माध्यम से नहीं।'
खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार कानून के अनुसार स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार रखती है और BJP का विरोध निराधार है।
BJP का विरोध और केंद्र से हस्तक्षेप की माँग
केंद्रीय मंत्री और BJP नेता शोभा करंदलाजे ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की है। करंदलाजे ने इस अधिसूचना पर संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने अपने पत्र में तर्क दिया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों के लिए एकल नागरिकता की व्यवस्था करता है। उनके अनुसार, कर्नाटक सरकार का यह प्रावधान संविधान की भावना के विपरीत है और इससे 'स्थायी निवासियों' की एक अलग श्रेणी बनाने की कोशिश हो रही है, जिसके लिए कोई संवैधानिक या वैधानिक आधार नहीं है।
BJP ने यह भी आरोप लगाया है कि इस प्रमाण पत्र का दुरुपयोग कर अवैध प्रवासियों को लाभ पहुँचाया जा सकता है — हालाँकि सरकार ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है।
आम जनता पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में प्रवासी आबादी तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र राज्य की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, नौकरी आरक्षण और स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के अधिकार से जुड़ा हो सकता है, जिससे इसका सामाजिक और राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
क्या होगा आगे
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला अदालत तक पहुँच सकता है यदि संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जाती है।