10 जुलाई 2026
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हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: योगी के बयान पर अयोध्या के संतों ने जताया समर्थन, सपा पर साधा निशाना

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हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: योगी के बयान पर अयोध्या के संतों ने जताया समर्थन, सपा पर साधा निशाना

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाने का आरोप महज़ एक बयान नहीं — यह उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजनीति का नया मोर्चा है। अयोध्या के चार प्रमुख संतों ने खुलकर समर्थन देकर इस विवाद को सनातन परंपरा बनाम विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाने का आरोप लगाया।
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंस दास ने बयान का समर्थन करते हुए समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर सवाल उठाए।
महामंडलेश्वर गिरीश दास ने कहा — जैसे मस्जिद में हनुमान चालीसा नहीं, वैसे ही मंदिर में अन्य धर्म की गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
हनुमानगढ़ी के महंत डॉ.
देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि विपक्ष ने राम मंदिर को लेकर नकारात्मक राजनीति की।
मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एकतरफा मुआवजे का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर कथित तौर पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति तेज़ हो गई है, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाने का आरोप लगाया और कहा कि जहाँ विपक्ष ऐसा करता था, वहीं उनकी सरकार राम नगरी अयोध्या के विकास में जुटी है। 10 जुलाई को सामने आई इस प्रतिक्रिया की लहर में अयोध्या के प्रमुख संतों और महंतों ने मुख्यमंत्री के पक्ष में खुलकर बयान दिए और इसे सनातन परंपरा एवं धार्मिक मर्यादा से जोड़ा।

संतों की प्रतिक्रिया

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंस दास ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी सनातनियों को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाई गई थी, जबकि आज मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में प्रदेश में रामराज्य की स्थापना हुई है। उनके अनुसार, 'रामराज्य का अर्थ यही है कि कानून सबके लिए समान हो — अपराधी चाहे सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का, दोषी को दंड मिलना चाहिए।'

परमहंस दास ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के समय वे मुख्यमंत्री थे और उस दौरान कथित तौर पर एकतरफा मुआवजा वितरण किया गया, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने अखिलेश यादव के गोशालाओं को लेकर दिए गए पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्हें गोशाला से बदबू आती हो, वे रामराज्य की भावना को नहीं समझ सकते।

धार्मिक मर्यादा पर संतों का पक्ष

संत जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य ने कहा कि सनातन धर्म का हृदय अत्यंत विशाल है और भारत ने सभी धर्मों एवं पंथों को सम्मानपूर्वक जीने का अवसर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने का अधिकार है, किंतु किसी दूसरे धर्म की मर्यादा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री योगी के कार्यकाल में न केवल हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा मजबूत हुई है, बल्कि सभी समुदायों को अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की स्वतंत्रता भी मिली है।

महामंडलेश्वर गिरीश दास ने मुख्यमंत्री के बयान को उचित ठहराते हुए कहा कि जिस प्रकार मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ नहीं हो सकता, उसी प्रकार मंदिरों में भी किसी अन्य धर्म की धार्मिक गतिविधियाँ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है और आज अयोध्या दिव्य, भव्य तथा आधुनिक स्वरूप में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए तैयार है।

हनुमानगढ़ी महंत का बयान

अयोध्या धाम सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने भी मुख्यमंत्री के बयान का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सनातन परंपराओं को ठेस पहुँचाने वाले बयान दिए गए और राम मंदिर तथा अयोध्या को लेकर नकारात्मक राजनीति की गई। उनके अनुसार, जो लोग आज राम पर टिप्पणी कर रहे हैं, वे स्वयं कभी राम मंदिर दर्शन के लिए नहीं आए और न ही अपने नेताओं को आने दिया।

डॉ. देवेशाचार्य ने कहा कि ऐसे लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों पर बयान देते हैं। उनका मानना है कि अयोध्या के विकास और राम मंदिर निर्माण के बाद हिंदू समाज सब कुछ समझ चुका है और अब ऐसे बयानों का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं और धार्मिक मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान कथित तौर पर विपक्ष को घेरने की रणनीति के तहत आया है। समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या

यह राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति को मज़बूत करने में लगे हैं। अयोध्या के संतों का खुला समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संबल माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक समन्वित संदेश है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान विकास के मुद्दों से ध्यान हटाने का काम करते हैं, जबकि समर्थकों के लिए यह सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का प्रश्न है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि हनुमानगढ़ी स्वयं एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थल है — और वहाँ के महंत का सीधा समर्थन इस विवाद को एक नई वैधता देता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी में नमाज़ को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाई गई थी, जबकि उनकी सरकार अयोध्या के विकास में जुटी है। यह बयान कथित तौर पर समाजवादी पार्टी को निशाना बनाते हुए दिया गया।
अयोध्या के किन संतों ने योगी के बयान का समर्थन किया?
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंस दास, संत जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य, महामंडलेश्वर गिरीश दास और हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया। सभी ने इसे सनातन परंपरा और धार्मिक मर्यादा से जोड़ा।
समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए गए?
संतों ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़वाई गई और मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एकतरफा मुआवजा वितरण किया गया, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी कथित तौर पर टिप्पणी की थी। सपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हनुमानगढ़ी के महंत का इस विवाद में क्या रुख है?
हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी के बयान का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राम मंदिर और अयोध्या को लेकर नकारात्मक राजनीति की और ऐसे लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों पर बयान देते हैं।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डाल सकता है?
अयोध्या के प्रमुख संतों का एकजुट समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए राजनीतिक संबल माना जा रहा है। यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में लगे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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