हनुमानगढ़ी विवाद: CM योगी के बयान पर BJP ने विपक्ष को घेरा, तुष्टिकरण के लगाए आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या की हनुमानगढ़ी और सनातन परंपरा को लेकर दिए गए बयान के बाद 10 जुलाई को राजनीतिक बयानबाजी तीखी हो गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष पर तुष्टिकरण के आरोप लगाते हुए सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया। समाजवादी पार्टी (SP) से निष्कासित विधायक अभय सिंह ने भी मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन किया।
मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी का विपक्ष पर हमला
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि पिछली कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने एक वर्ग को खुश करने के लिए सनातन परंपरा को कलंकित किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने भगवान राम के मंदिर के निर्माण का विरोध किया और यहाँ तक कि भगवान राम के अस्तित्व को मानने से भी इनकार कर दिया।' चौधरी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सनातन संस्कृति और विरासत पर गर्व के साथ आगे बढ़ रही है।
मंत्री मनोज पांडेय की तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मनोज पांडेय ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि क्या समाजवादियों में इतना साहस है कि वे अन्य धर्म के लोगों के नाम के आगे भी 'समाजवादी' लगाएँगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को स्टूडियो में बैठाकर यह 'ट्रेनिंग' दी जा रही थी कि कब और क्या बोलना है। पांडेय ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक धर्म, आस्था और देवी-देवताओं का अपमान किया, वे 15 दिनों के भीतर सनातन को विखंडित करने के प्रयास कर रहे थे।
निष्कासित विधायक अभय सिंह का समर्थन
समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक अभय सिंह ने कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से सहमत हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब जामा मस्जिद या दरगाह स्थल पर हनुमान चालीसा का पाठ नहीं हो सकता, तो हनुमानगढ़ी में पिछली सरकारों के दौरान इफ्तार का आयोजन और नमाज अदा किया जाना अनुचित था। उनके अनुसार इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती थी।
BJP विधायक केतकी सिंह ने उठाए सवाल
BJP विधायक केतकी सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव आज तक राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए, इसलिए उनके सवाल उठाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने विपक्ष से यह भी पूछा कि क्या वे काशी के ज्ञानवापी और मथुरा मंदिर को लेकर कुछ बोल सकते हैं। केतकी सिंह ने कहा कि हिंदू समाज को दरकिनार कर उनकी भावनाओं को आहत किया जाता था, जो अब स्वीकार्य नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी माहौल में धार्मिक मुद्दे केंद्र में आ रहे हैं। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ी अयोध्या का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और इसे लेकर कोई भी बयान राजनीतिक संवेदनशीलता रखता है। BJP और विपक्षी दलों के बीच यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।