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राम मंदिर चंदा विवाद: भाजपा का अखिलेश पर तुष्टिकरण का आरोप, SIT रिपोर्ट पर घमासान

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राम मंदिर चंदा विवाद: भाजपा का अखिलेश पर तुष्टिकरण का आरोप, SIT रिपोर्ट पर घमासान

सारांश

राम मंदिर चंदा विवाद पर अखिलेश यादव के एक्स पोस्ट के जवाब में भाजपा के तीन मंत्रियों ने एक साथ पलटवार किया — तुष्टिकरण, 2027 चुनाव और SIT रिपोर्ट, तीनों मोर्चों पर। यह टकराव उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक जमीन तैयार होने का संकेत है।

मुख्य बातें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर SIT जांच को लेकर सरकार पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि SIT का समय पूरा, रिपोर्ट आते ही कार्रवाई होगी।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को 2027 में भी विफल बताया।
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने दावा किया कि 2027 में सपा 100 सीटें भी नहीं जीत पाएगी।
भाजपा ने अखिलेश पर मुस्लिम तुष्टिकरण और धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप लगाया।

उत्तर प्रदेश में राम मंदिर चंदा विवाद एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। 22 जून को लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री धर्मपाल सिंह और मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों पर कड़ा पलटवार किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इन नेताओं ने अखिलेश पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव का एक्स पोस्ट और विवाद की जड़

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राम मंदिर चंदा जांच को लेकर लिखा था, 'एसआईटी ध्यान रखे। कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं।' इस बयान को भाजपा नेताओं ने राजनीति से प्रेरित और भड़काऊ करार दिया।

ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया: SIT रिपोर्ट पर सरकार का रुख

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि SIT का निर्धारित समय पूरा हो चुका है और जांच रिपोर्ट आते ही सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, 'जो लोग तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि मदरसों और मजारों में कहां गड़बड़ियां हुई हैं।' यह टिप्पणी सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधती है।

धर्मपाल सिंह का हमला: सपा-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

मंत्री धर्मपाल सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व में भी इन दलों के गठबंधन को जनता ने नकारा है। उन्होंने कहा, 'पहले भी सपा-बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन सफल नहीं हुए।' उनके अनुसार 2027 के चुनाव में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनाएगी।

मंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी हमला बोला और कहा कि उस दौर में विकास केवल सैफई के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रहा और धनराशि का वितरण यादव परिवार के इर्द-गिर्द होता था। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव के एजेंडे में मुस्लिम और मुस्लिमपरस्ती है।'

दानिश आजाद अंसारी का पलटवार: 2027 में सपा 100 सीटें भी नहीं

मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि समाजवादी पार्टी जमीनी हकीकत से कटी हुई है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। अंसारी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल-इंजन सरकार ने पसमांदा मुस्लिम समुदाय को कभी वोट बैंक नहीं माना, जबकि सपा और कांग्रेस ने उन्हें हमेशा वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।

आगे क्या होगा

SIT की रिपोर्ट आने के बाद इस विवाद की दिशा और तेज होने की संभावना है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चंदा विवाद एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है, जिस पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के तहत जनमत को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित आक्रामक रणनीति है — SIT रिपोर्ट की प्रतीक्षा के बीच विमर्श को 'तुष्टिकरण बनाम विकास' के ढाँचे में ले जाना। गौरतलब है कि तीन अलग-अलग मंत्रियों का एक साथ मीडिया में आना यह दर्शाता है कि भाजपा इस मुद्दे को 2027 चुनाव की नींव के रूप में देख रही है। अखिलेश के एक्स पोस्ट ने SIT पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भाजपा ने उसे पलटकर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के आरोप में बदल दिया — यह वही ध्रुवीकरण का खेल है जो उत्तर प्रदेश में बार-बार चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा विवाद क्या है और SIT जांच क्यों हो रही है?
राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए SIT गठित की गई है। यह विवाद उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जिस पर सपा और भाजपा आमने-सामने हैं।
अखिलेश यादव ने SIT पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि जांच की समयसीमा इसलिए बढ़ाई जा रही है ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें। उन्होंने आशंका जताई कि SIT रिपोर्ट ही 'चोरी' न हो जाए।
भाजपा ने अखिलेश के बयान पर क्या जवाब दिया?
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि SIT का समय पूरा हो चुका है और रिपोर्ट आते ही कार्रवाई होगी। मंत्री धर्मपाल सिंह और दानिश आजाद अंसारी ने अखिलेश पर तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव पर भाजपा नेताओं ने क्या दावा किया?
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा 100 सीटें भी नहीं जीत पाएगी और भाजपा भारी बहुमत से सरकार बनाएगी। धर्मपाल सिंह ने भी सपा-कांग्रेस गठबंधन को पूर्व की तरह विफल बताया।
पसमांदा मुस्लिम समुदाय पर भाजपा का क्या कहना है?
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि मोदी-योगी की डबल-इंजन सरकार ने पसमांदा मुस्लिम समुदाय को कभी वोट बैंक नहीं माना, जबकि सपा और कांग्रेस ने उन्हें हमेशा वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।
राष्ट्र प्रेस
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