केरल हाईकोर्ट ने मोनालिसा भोसले की पुलिस सुरक्षा का अंतरिम आदेश वापस लिया, 21 जुलाई को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को कुंभ मेले की 'वायरल स्टार' मोनालिसा भोसले को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने संबंधी अपना अंतरिम आदेश वापस ले लिया। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि पुलिस याचिका में दर्ज पते और संपर्क विवरण के आधार पर मोनालिसा का पता लगाने में असफल रही। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।
अदालत में क्या हुआ
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने राज्य सरकार के वकील का पक्ष सुनने के बाद 19 जून को दिया गया अंतरिम सुरक्षा आदेश रद्द कर दिया। सरकारी वकील ने अदालत को बताया, 'पुलिस सुरक्षा देना चाहती थी, लेकिन याचिकाकर्ता से संपर्क नहीं हो पाया। यह एक नियमित स्थिति बन गई है — जब भी वह पुलिस सुरक्षा की माँग को लेकर अदालत आती हैं, पुलिस उनसे संपर्क नहीं कर पाती।'
मोनालिसा के वकील ने भी स्वीकार किया कि उन्हें सरकार की दलीलों के संदर्भ में अपनी मुवक्किल से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अदालत ने हालाँकि स्पष्ट किया कि यदि मोनालिसा लिखित रूप से पुलिस से सुरक्षा माँगती हैं, तो अधिकारियों को उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी।
मोनालिसा कौन हैं और विवाद की जड़ क्या है
महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद मोनालिसा भोसले देशभर में चर्चित हो गई थीं। बाद में उन्होंने मोहम्मद फरमान से विवाह किया, जिसके बाद कथित तौर पर मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नफरत भरे अभियान शुरू हो गए। मोनालिसा ने इसी आधार पर केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान मोनालिसा ने पुलिस सहायता माँगी थी और आरोप लगाया था कि उनका परिवार उनकी शादी का विरोध कर रहा है।
दो राज्यों में कानूनी लड़ाई
मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि फरमान ने उनकी बेटी का अपहरण किया है। इसके बाद दंपति ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ फरमान को एक महीने की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी ताकि वह मध्य प्रदेश की सक्षम अदालतों से नियमित राहत प्राप्त कर सकें।
दंपति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है और आरोप लगाया है कि मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार किया गया, ताकि फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा सके।
ताज़ा कानूनी स्थिति
पिछले सप्ताह केरल हाईकोर्ट ने फरमान की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इससे पहले मध्य प्रदेश की पॉक्सो अदालत ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब यह मामला एक साथ दो राज्यों की अदालतों में विचाराधीन है, जो इस पूरे प्रकरण की कानूनी जटिलता को उजागर करता है।
अदालत का अगला कदम और मोनालिसा की उपस्थिति — दोनों इस मामले की दिशा तय करेंगे। 21 जुलाई की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।