19 जुलाई 2026
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कुंभ की वायरल मोनालिसा के पति फरमान को केरल HC से राहत, एक माह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत

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कुंभ की वायरल मोनालिसा के पति फरमान को केरल HC से राहत, एक माह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत

सारांश

कुंभ मेले की वायरल चेहरा मोनालिसा भोसले के पति मोहम्मद फरमान को केरल HC से एक माह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिल गई। मध्य प्रदेश पुलिस ने अपहरण, जालसाज़ी, SC/ST एक्ट और पोक्सो जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है। दंपती ने ऑनर किलिंग की आशंका जताते हुए उम्र संबंधी दस्तावेज़ अदालत में पेश किए।

मुख्य बातें

केरल HC ने 3 जून को मोहम्मद फरमान को एक माह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी।
केस मध्य प्रदेश पुलिस ने मोनालिसा के पिता की शिकायत पर दर्ज किया।
आरोपों में अपहरण, जालसाज़ी, SC/ST एक्ट , बाल विवाह निषेध अधिनियम व पोक्सो शामिल।
दंपती ने आधार, वोटर आईडी समेत दस्तावेज़ देकर मोनालिसा के बालिग होने का दावा किया।
MP सरकार ने अधिकार क्षेत्र और SC/ST एक्ट की पाबंदियों का हवाला देकर विरोध किया।
नियमित अग्रिम जमानत के लिए अब MP की संबंधित अदालतों का रुख़ करना होगा।

केरल उच्च न्यायालय ने 3 जून को कुंभ मेले की वायरल चेहरा बनीं मोनालिसा भोसले के पति मोहम्मद फरमान को मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एक आपराधिक मामले में एक महीने की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मंज़ूर कर ली। यह मामला मोनालिसा के पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें अपहरण, जालसाज़ी और नाबालिग से विवाह सहित कई गंभीर आरोप शामिल हैं।

अदालत का आदेश

न्यायमूर्ति कौसर एडापगाथ की पीठ ने फरमान को गिरफ़्तारी से एक महीने की अंतरिम सुरक्षा देते हुए निर्देश दिया कि इस अवधि में उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने कहा कि यह राहत इसलिए दी जा रही है ताकि वे मध्य प्रदेश की संबंधित अदालतों में जाकर नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मंगलवार को फ़ैसला सुरक्षित रखा था।

क्या हैं आरोप

मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान पर अपहरण, जालसाज़ी के साथ-साथ अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, पोक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि विवाह के समय मोनालिसा नाबालिग थीं और फरमान ने धोखाधड़ी से विवाह प्रमाण पत्र हासिल किया।

दंपती का पक्ष

जोड़े की ओर से वकील एम. ससिंद्रन ने अदालत को बताया कि आरोप झूठे हैं और शूटिंग के दौरान दोनों के बीच प्रेम-संबंध बना, जिसके बाद उन्होंने केरल के नेय्याट्टिनकारा में विवाह किया। उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा के पिता ने पहले इस रिश्ते को स्वीकार किया था, लेकिन मध्य प्रदेश लौटने के बाद उनका रुख बदल गया।

दंपती ने अदालत में कहा कि यदि वे मध्य प्रदेश लौटते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकियों और कथित तौर पर ऑनर किलिंग का अंदेशा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोनालिसा का असली जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर, कथित तौर पर उनके छोटे भाई का जन्म प्रमाण पत्र पेश कर उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की जा रही है। उम्र के प्रमाण के रूप में अदालत में आधार कार्ड, वोटर आईडी और बैंक खाते का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया, साथ ही मोनालिसा का हलफ़नामा भी दाख़िल हुआ, जिसमें उन्होंने ख़ुद को विवाह के समय बालिग बताया।

मध्य प्रदेश सरकार की आपत्ति

राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि मामला मध्य प्रदेश में दर्ज है, इसलिए केरल उच्च न्यायालय इसकी सुनवाई का उपयुक्त मंच नहीं है। उन्होंने ट्रांजिट अग्रिम जमानत से जुड़े अधिकार क्षेत्र पर सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला दिया। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि SC/ST अधिनियम के तहत आरोप होने के कारण क़ानूनी पाबंदियों के चलते अग्रिम जमानत पर विचार ही नहीं किया जा सकता।

आगे क्या

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय जोड़े के विवाह प्रमाण पत्र की जाँच के बाद उन्हें अंतरिम सुरक्षा दे चुका था। मोनालिसा ने अपने जन्म प्रमाण पत्र को रद्द किए जाने के विरुद्ध मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पहले ही याचिका दायर कर रखी है। ताज़ा आदेश से फरमान को तत्काल राहत भले मिल गई हो, लेकिन उम्र, विवाह की वैधता और आपराधिक आरोपों पर अंतिम फ़ैसला अब मध्य प्रदेश की संबंधित अदालतों में होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उम्र के दस्तावेज़ी विवाद और क्षेत्राधिकार की क़ानूनी पेचीदगियों के टकराव का क्लासिक उदाहरण है। ट्रांजिट अग्रिम जमानत राहत ज़रूर है, पर अंतिम परीक्षा MP की अदालतों में होगी — जहाँ SC/ST एक्ट और पोक्सो की धाराओं के कारण नियमित अग्रिम जमानत का रास्ता बेहद संकरा है। जन्म प्रमाण पत्र को लेकर परस्पर-विरोधी दावे यह बताते हैं कि असली लड़ाई अब दस्तावेज़ी सत्यापन की है, न कि भावनात्मक आख्यानों की। वायरल प्रसिद्धि ने इस केस को सुर्खियों में ज़रूर ला दिया, लेकिन क़ानून की चक्की उसी रफ़्तार से चलेगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने मोहम्मद फरमान को क्या राहत दी है?
केरल उच्च न्यायालय ने 3 जून को फरमान को एक महीने की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी है, यानी इस अवधि में उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया जा सकेगा। यह राहत इसलिए दी गई ताकि वे मध्य प्रदेश की संबंधित अदालतों में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें।
मोनालिसा भोसले के पति पर कौन-कौन से आरोप हैं?
फरमान पर अपहरण, जालसाज़ी, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, पोक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। मध्य प्रदेश पुलिस का आरोप है कि शादी के समय मोनालिसा नाबालिग थीं।
मामला कहाँ और किसकी शिकायत पर दर्ज हुआ?
यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस ने मोनालिसा के पिता की शिकायत पर दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि शादी धोखाधड़ी से कराई गई और प्रमाण पत्र फ़र्ज़ी ढंग से हासिल किया गया।
दंपती ने अपनी सफ़ाई में क्या दलीलें दीं?
दंपती के वकील ने अदालत को बताया कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच प्रेम-संबंध बना और उन्होंने केरल के नेय्याट्टिनकारा में विवाह किया। उन्होंने मोनालिसा का हलफ़नामा, आधार कार्ड, वोटर आईडी और बैंक खाता विवरण देकर उन्हें विवाह के समय बालिग बताया, साथ ही ऑनर किलिंग की आशंका भी जताई।
अब इस केस में आगे क्या होगा?
एक महीने की राहत अवधि में फरमान को मध्य प्रदेश की संबंधित अदालतों में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना होगा। साथ ही, मोनालिसा की जन्म प्रमाण पत्र रद्दीकरण को चुनौती देने वाली याचिका मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
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