जूड बेलिंगहम का FIFA वर्ल्ड कप 2026 में 7वाँ गोल, एक टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले पहले इंग्लिश खिलाड़ी बने
सारांश
मुख्य बातें
जूड बेलिंगहम ने फीफा विश्व कप 2026 में इतिहास रच दिया — फ्रांस के खिलाफ तीसरे स्थान के मुकाबले में इंजरी टाइम में गोल दागकर वे किसी एक विश्व कप संस्करण में इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक 7 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इस ऐतिहासिक जीत में इंग्लैंड ने फ्रांस को 6-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
बेलिंगहम की ऐतिहासिक उपलब्धि
फ्रांस के खिलाफ बेलिंगहम का यह टूर्नामेंट में सातवाँ गोल था, जिसने उन्हें हैरी केन और गैरी लाइनकर दोनों से आगे कर दिया। केन ने 2018 के विश्व कप और मौजूदा टूर्नामेंट में छह-छह गोल किए थे, जबकि लाइनकर ने 1986 के विश्व कप में इंग्लैंड की ओर से 6 गोल दागे थे। बेलिंगहम ने इस मुकाबले में अपना एकमात्र गोल इंजरी टाइम में किया, लेकिन यही गोल उनके नाम को इंग्लिश फुटबॉल इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज कर गया।
मैच का घटनाक्रम
इंग्लैंड ने मैच में शुरुआत से ही दबदबा बनाया। तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने पहला गोल दागकर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिलाई। 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने दूसरा गोल किया। इसके बाद बुकायो साका ने 37वें और 43वें मिनट में दो लगातार गोल दागे और पहले हाफ में इंग्लैंड 4-0 से आगे था।
दूसरे हाफ में फ्रांस ने जबरदस्त वापसी की। किलियन एम्बाप्पे ने 48वें और फिर एक और मिनट में गोल किए, जबकि बारकोला ने 58वें मिनट में गोल दागा और स्कोर 4-3 हो गया। 87वें मिनट में साका ने पेनल्टी पर गोल करके इंग्लैंड को 5-3 से आगे किया। इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेल ने फ्रांस के लिए चौथा गोल किया, लेकिन बेलिंगहम ने अंतिम गोल करके 6-4 की जीत सुनिश्चित की।
इंग्लैंड का ऐतिहासिक प्रदर्शन
1966 में विश्व चैंपियन बनने के बाद यह इंग्लैंड का फीफा विश्व कप में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इंग्लैंड ने छह दशकों के इंतजार के बाद विश्व कप मंच पर अपनी प्रासंगिकता एक बार फिर साबित की। यह ऐसे समय में आया है जब इंग्लिश फुटबॉल युवा प्रतिभाओं की नई पीढ़ी पर टिकी है, जिसमें बेलिंगहम सबसे आगे हैं।
आगे की राह
बेलिंगहम की यह उपलब्धि उन्हें आने वाले वर्षों में इंग्लैंड की विश्व कप महत्वाकांक्षाओं का केंद्रबिंदु बनाती है। साका का तीन गोल का प्रदर्शन और राइस की मिडफील्ड में भूमिका भी इस टूर्नामेंट की बड़ी सकारात्मकताएँ रहीं। इंग्लैंड की यह टीम 2030 विश्व कप के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है।