फीफा वर्ल्ड कप 2026: इंग्लैंड ने फ्रांस को 6-4 से हराया, 64 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे स्थान के मुकाबले में इंग्लैंड ने 19 जुलाई को फ्रांस को 6-4 से पराजित कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक मैच में दोनों टीमों ने मिलकर 10 गोल दागे और 64 साल पुराना विश्व कप रिकॉर्ड तोड़ दिया। 1966 में खिताब जीतने के बाद यह इंग्लैंड का विश्व कप में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
कौन-सा रिकॉर्ड टूटा
पिछले 64 वर्षों में यह पहला अवसर था जब फीफा विश्व कप के किसी एक मैच में दोनों पक्षों ने चार या उससे अधिक गोल किए। इससे पहले 1962 में सोवियत संघ और कोलंबिया के बीच मुकाबला 4-4 से बराबर रहा था। गौरतलब है कि तीसरे स्थान के मुकाबले में सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड भी इसी मैच ने स्थापित किया। विश्व कप इतिहास में किसी एक मैच में सर्वाधिक गोल का समग्र रिकॉर्ड अभी भी 1982 के हंगरी बनाम अल साल्वाडोर मैच के नाम है, जिसमें 11 गोल लगे थे और हंगरी ने 10-1 से जीत दर्ज की थी।
साका की हैट्रिक, बेलिंगहम का इतिहास
इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक बुकायो साका रहे, जिन्होंने 37वें, 43वें और 87वें मिनट में तीन गोल दागकर हैट्रिक पूरी की। वह विश्व कप में इंग्लैंड की ओर से हैट्रिक लगाने वाले चौथे खिलाड़ी बने और नॉकआउट मुकाबले में ऐसा करने वाले दूसरे इंग्लिश खिलाड़ी। जूड बेलिंगहम ने भी इस मैच में एक गोल किया और फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कुल 7 गोल के साथ किसी एक संस्करण में इंग्लैंड के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए।
मैच का पूरा घटनाक्रम
इंग्लैंड ने पहले हाफ में दबदबा बनाया। तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने पहला गोल दागा, इसके बाद 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने दूसरा गोल किया। साका ने 37वें और 43वें मिनट में लगातार दो गोल दागते हुए इंग्लैंड की बढ़त 4-0 कर दी।
दूसरे हाफ में फ्रांस ने जोरदार वापसी की। किलियन एम्बाप्पे ने 48वें और 63वें मिनट में दो गोल किए, जबकि 58वें मिनट में बारकोला ने भी नेट हिलाया और स्कोर 4-3 हो गया। 87वें मिनट में साका ने अपनी हैट्रिक पूरी कर इंग्लैंड को राहत दी। इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेल ने फ्रांस के लिए चौथा गोल दागा, लेकिन बेलिंगहम ने छठा गोल करते हुए इंग्लैंड की जीत सुनिश्चित कर दी।
ऐतिहासिक संदर्भ
यह मुकाबला विश्व कप के इतिहास में उन चुनिंदा मैचों में शामिल हो गया है जो अपनी गोल-बहुलता के लिए याद किए जाएंगे। इंग्लैंड के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि टीम ने 1966 के बाद पहली बार पदक जीता है — और वह भी एक ऐसे मुकाबले में जो खेल इतिहास में दर्ज हो गया। आगे फाइनल के परिणाम के साथ इस टूर्नामेंट की विरासत और भी स्पष्ट होगी।