आरजेडी छोड़ने के बाद मृत्युंजय तिवारी का हमला: ईमानदार कार्यकर्ताओं की गरिमा तार-तार, तेजस्वी के रणनीतिकार नाकाम
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने 19 जुलाई को पार्टी से इस्तीफे के बाद खुलकर बोलते हुए कहा कि पार्टी में समर्पित और ईमानदार कार्यकर्ताओं की गरिमा की कोई रक्षा नहीं हो रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने फैसले पर पूरी तरह कायम हैं और आरजेडी में वापसी की कोई संभावना नहीं है। पटना से बोलते हुए तिवारी ने पार्टी नेतृत्व, चुनावी रणनीति और विपक्ष की भूमिका — तीनों पर तीखे सवाल उठाए।
पार्टी में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा
तिवारी ने कहा कि आरजेडी में वफादार और मेहनती कार्यकर्ताओं की गरिमा की रक्षा नहीं हो रही, जिससे उन्हें गहरी निराशा हुई। उनके अनुसार, 'यदि समय रहते स्थिति सुधारी जाती तो बात अलग होती, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।' यह बयान संकेत देता है कि पार्टी के भीतर असंतोष लंबे समय से पनप रहा था और इस्तीफा किसी एक घटना का नहीं, बल्कि संचित मोहभंग का परिणाम है।
तेजस्वी के रणनीतिकारों पर सवाल
तेजस्वी यादव — जो विपक्ष के नेता और दो बार बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं — के करीबी रणनीतिकारों पर तिवारी ने सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए थी, जो नहीं हुई। तिवारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव का पार्टी पर प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा और जिन लोगों के भरोसे राजनीतिक रणनीतियाँ बनाई जा रही हैं, वे अपेक्षित परिणाम देने में विफल साबित हुए हैं।
राहुल गांधी और राम मंदिर विवाद पर राय
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के सवाल पर तिवारी ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में सरकार से जवाब माँगना राहुल गांधी का अधिकार और कर्तव्य है। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाया कि राहुल गांधी को अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन करने चाहिए — उनके अनुसार इससे रामभक्तों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।
विपक्ष की कमज़ोरी पर चिंता
तिवारी ने लोकतंत्र में मज़बूत विपक्ष की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में विपक्षी दल आपसी मतभेदों और अंदरूनी संघर्ष में उलझे हुए हैं। उनका कहना था, 'जब विपक्ष अपनी ही पार्टियों को मजबूत नहीं रख पा रहा, तब सरकार को प्रभावी ढंग से घेरना मुश्किल हो जाता है।' उन्होंने आगाह किया कि विपक्ष की यह कमज़ोरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है।
बांकीपुर उपचुनाव और जमीनी राजनीति
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में तिवारी ने कहा कि यह सीट पिछले करीब 35 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल राजनीतिक हलचल या इवेंट मैनेजमेंट से चुनाव नहीं जीते जाते — जनता उसी नेता को समर्थन देती है जिसने लंबे समय तक जमीन पर रहकर काम किया हो और लोगों का विश्वास अर्जित किया हो। यह टिप्पणी परोक्ष रूप से आरजेडी की चुनावी रणनीति पर भी कटाक्ष मानी जा रही है। आने वाले समय में तिवारी की राजनीतिक दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।