राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा, 'सम्मान नहीं मिला' — तेजस्वी से शिकायत भी रही अनसुनी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों की निष्ठा और समर्पण के बावजूद पार्टी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। यह घटनाक्रम पटना स्थित राजद प्रदेश कार्यालय में उस समय सामने आया जब तिवारी ने प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना फैसला सुनाया।
मुख्य घटनाक्रम
मृत्युंजय तिवारी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने राजद प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष महाबीर लाल मंडल और अन्य वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपनी नाराजगी खुलकर रखी। उनका कहना था कि एक समर्पित कार्यकर्ता के लिए अब पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं बचा है।
तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायतें पार्टी नेतृत्व के सामने कई बार रखीं — विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के समक्ष — लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जब किसी कार्यकर्ता की बात लगातार अनसुनी की जाए, तो उसके लिए राजनीति करना मुश्किल हो जाता है।
राजद से तिवारी का पुराना नाता
मृत्युंजय तिवारी ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राजद के सबसे कठिन दौर में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। वर्ष 2014 में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी बनाया था। इस जिम्मेदारी को उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया तथा हर परिस्थिति में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजद बिहार में विपक्ष की भूमिका में है और पार्टी के भीतर आंतरिक संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राजद प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने तिवारी के इस्तीफे को अंतिम फैसला मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मृत्युंजय तिवारी पार्टी के बेहद वफादार, समर्पित और प्रभावशाली कार्यकर्ता हैं। मंडल के अनुसार, तिवारी की लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव में पूरी आस्था और विश्वास है, इसलिए उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की नाराजगी है तो उसे बातचीत के जरिए दूर किया जाएगा।
आम जनता और पार्टी पर असर
तिवारी जैसे वरिष्ठ और मुखर प्रवक्ता का पार्टी से नाराज होना राजद के लिए छवि की दृष्टि से नुकसानदेह हो सकता है, विशेष रूप से तब जब पार्टी 2025 बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की आंतरिक कलह पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है।
क्या होगा आगे
फिलहाल राजद नेतृत्व ने मामले को आंतरिक स्तर पर सुलझाने का संकेत दिया है। यदि बातचीत विफल रहती है, तो तिवारी का यह इस्तीफा पार्टी के लिए एक औपचारिक झटका बन सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या पार्टी नेतृत्व उनकी शिकायतों को दूर करने में सफल होता है या नहीं।