25 जुलाई 2026
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राजद ने शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर किया, पार्टी बोली — 'समर्पित सिपाही हैं'

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राजद ने शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर किया, पार्टी बोली — 'समर्पित सिपाही हैं'

सारांश

बिहार विधान परिषद में टिकट न मिलने पर राजद के दलित चेहरे शिवचंद्र राम ने इस्तीफा दिया, भावुक होकर रोए — लेकिन 24 घंटे के भीतर पार्टी ने इस्तीफा नामंजूर कर उन्हें मना लिया। यह घटनाक्रम राजद के भीतर दलित प्रतिनिधित्व को लेकर गहरे असंतोष को उजागर करता है।

मुख्य बातें

राजद ने वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम का अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा नामंजूर कर दिया।
मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने मंगलवार को पुष्टि की कि शिवचंद्र राम पार्टी में बने रहने पर सहमत हो गए हैं।
मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे बातचीत कर नाराजगी दूर कराई।
सुनील कुमार सिंह के नामांकन पर पार्टी के भीतर और रोहिणी आचार्य ने भी सवाल उठाए थे।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने वरिष्ठ नेता और अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। बिहार विधान परिषद चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने पद छोड़ने की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व की पहल के बाद वे अपनी नाराजगी दूर करने और पार्टी में बने रहने पर सहमत हो गए।

पार्टी की प्रतिक्रिया और मनाने का प्रयास

मंगलवार को राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने स्पष्ट किया कि शिवचंद्र राम का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद पार्टी के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे सीधी बातचीत की और उन्हें मनाने का प्रयास किया।

शक्ति सिंह यादव ने कहा, शिवचंद्र राम राजद के पुराने और समर्पित सिपाही हैं। सामाजिक न्याय की विचारधारा के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है और पार्टी उनके योगदान का पूरा सम्मान करती है। राजद नेतृत्व उनके अनुभव और समर्पण को महत्व देता है।

मुख्य घटनाक्रम — इस्तीफे से मनुहार तक

सोमवार को हुए नाटकीय घटनाक्रम में शिवचंद्र राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनुसूचित जाति-जनजाति समाज की उपेक्षा और सम्मान न मिलने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। इस दौरान वे भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े, हालाँकि उन्होंने पार्टी में बने रहने की बात भी कही।

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को भेजे गए दो पन्ने के त्यागपत्र में उन्होंने बिहार विधान परिषद की रिक्त सीट को लेकर दलित समाज और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि विधान परिषद सीट को लेकर दलित, रविदास समाज और हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं में उम्मीद थी, लेकिन हाल की घटनाओं से समाज में निराशा और पीड़ा बढ़ी है। इस्तीफे की घोषणा के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की भी खबर आई थी।

उम्मीदवार चयन पर उठे सवाल

गौरतलब है कि सोमवार को राजद उम्मीदवार के रूप में डॉ. सुनील कुमार सिंह ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनकी उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर भी असहमति के स्वर उठे। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया के ज़रिए उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाए।

विपक्ष और अन्य दलों की प्रतिक्रिया

शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी। पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने उनकी नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल शिवचंद्र राम के साथ खड़ी है। वहीं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर राजद पर निशाना साधा।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर दलित-वोट बैंक की राजनीति तेज है। राजद के लिए शिवचंद्र राम जैसे दलित चेहरे को पार्टी में बनाए रखना रणनीतिक रूप से अहम है। पार्टी नेतृत्व की त्वरित पहल यह संकेत देती है कि वह इस मुद्दे को आंतरिक रूप से सुलझाने का प्रयास कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या विधायी सीटों पर भी वास्तविक हिस्सेदारी देगी — क्योंकि बिहार में दलित वोटबैंक की राजनीति 2025 के चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवचंद्र राम ने राजद से इस्तीफा क्यों दिया था?
शिवचंद्र राम ने बिहार विधान परिषद चुनाव में टिकट न मिलने और दलित-अनुसूचित जाति समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राजद के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा की थी। उन्होंने तेजस्वी प्रसाद यादव को दो पन्ने का त्यागपत्र भी भेजा था।
राजद ने शिवचंद्र राम का इस्तीफा कैसे नामंजूर किया?
राजद के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने शिवचंद्र राम से सीधी बातचीत कर उन्हें मनाया। इसके बाद मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया और शिवचंद्र राम पार्टी में बने रहेंगे।
बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद ने किसे उम्मीदवार बनाया?
राजद ने डॉ. सुनील कुमार सिंह को विधान परिषद चुनाव का उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। इनकी उम्मीदवारी पर पार्टी के भीतर असहमति थी और रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे।
इस विवाद पर अन्य राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया रही?
पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल शिवचंद्र राम के साथ है, जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर राजद पर निशाना साधा। इस घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
राजद में दलित प्रतिनिधित्व का यह मुद्दा क्यों अहम है?
बिहार में दलित और रविदास समाज एक बड़ा वोटबैंक है जिस पर राजद की चुनावी रणनीति काफी हद तक निर्भर करती है। विधान परिषद की सीट पर दलित उम्मीदवार न देने से समाज में निराशा बढ़ी, जो शिवचंद्र राम के त्यागपत्र में भी स्पष्ट दिखी।
राष्ट्र प्रेस
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