31 जुलाई 2026
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भाजपा विधायक देवेश कुमार का इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के विधान परिषद प्रवेश का रास्ता साफ

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भाजपा विधायक देवेश कुमार का इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के विधान परिषद प्रवेश का रास्ता साफ

सारांश

BJP विधायक देवेश कुमार के इस्तीफे ने बिहार विधान परिषद में एक सीट खाली कर दी है। अब सत्ताधारी NDA पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को उस सीट पर लाने की तैयारी में है — जो अनुच्छेद 164(4) के तहत उनकी अनिवार्य विधायी सदस्यता की शर्त पूरी करेगा और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचे विवाद का पटाक्षेप करेगा।

मुख्य बातें

BJP विधायक देवेश कुमार ने 31 जुलाई 2026 को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया।
इस्तीफे के समय राज्य BJP अध्यक्ष संजय सरावगी सहित वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद — किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत मंत्री को नियुक्ति के 6 माह के भीतर विधायी सदस्यता अनिवार्य है।
मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था; रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

बिहार में 31 जुलाई 2026 को राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद से अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस कदम से पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के उच्च सदन में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जो एक लंबे समय से चले आ रहे संवैधानिक विवाद का समाधान हो सकता है।

इस्तीफे का घटनाक्रम

देवेश कुमार शुक्रवार शाम बिहार विधान परिषद पहुँचे और अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा। इस अवसर पर राज्य BJP अध्यक्ष संजय सरावगी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। इस्तीफे के तत्काल बाद रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।

संवैधानिक अनिवार्यता और विवाद

संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, राज्य विधानमंडल का सदस्य न होने वाले किसी मंत्री को मंत्रिपरिषद में नियुक्ति के छह माह के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होती है। दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री हैं, किंतु वे विधानसभा अथवा विधान परिषद — किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

यह मामला राजनीतिक रूप से विवादास्पद बन चुका था। विपक्षी दलों ने बार-बार यह प्रश्न उठाया कि बिना विधायी सदस्यता के मंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुँचा, जहाँ राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया।

सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया

सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने दावा किया है कि कानून के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि संवैधानिक आवश्यकताओं का सख्ती से और समय-सीमा के भीतर पालन होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पटना में राजनीतिक गतिविधियाँ पहले से ही तेज़ हैं।

आगे की प्रक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, देवेश कुमार का इस्तीफा बिहार सरकार के लिए एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम है। औपचारिक नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर दीपक प्रकाश को रिक्त सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। यदि वे निर्वाचित होते हैं, तो उनके मंत्री पद से जुड़ा तात्कालिक संवैधानिक प्रश्न हल हो जाएगा और उन्हें राज्य विधानमंडल में औपचारिक स्थान प्राप्त हो जाएगा। उनकी उम्मीदवारी के संबंध में आधिकारिक घोषणा अभी प्रतीक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सत्ताधारी NDA ने यह कदम तब उठाया जब कानूनी और राजनीतिक दबाव चरम पर था। असली सवाल यह है कि क्या यह प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी होगी — और क्या विपक्ष इस 'व्यवस्थित इस्तीफे' को न्यायालय में चुनौती देगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद से इस्तीफा क्यों दिया?
देवेश कुमार का इस्तीफा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद में प्रवेश दिलाने के लिए सीट रिक्त करने का राजनीतिक कदम माना जा रहा है। दीपक प्रकाश वर्तमान में बिना किसी विधायी सदस्यता के मंत्री पद पर हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत विवाद का विषय बन चुका था।
अनुच्छेद 164(4) क्या कहता है और दीपक प्रकाश पर यह कैसे लागू होता है?
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, राज्य विधानमंडल का सदस्य न होने वाले किसी व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में नियुक्त होने के छह माह के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होती है। दीपक प्रकाश विधानसभा और विधान परिषद — दोनों सदनों के सदस्य नहीं हैं, इसलिए यह प्रावधान उन पर सीधे लागू होता है।
क्या यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया था?
हाँ, दीपक प्रकाश की बिना विधायी सदस्यता के मंत्री बने रहने का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था, जहाँ राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया था। देवेश कुमार के इस्तीफे को इसी कानूनी और राजनीतिक दबाव के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
दीपक प्रकाश को विधान परिषद में कब तक प्रवेश मिल सकता है?
औपचारिक नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद दीपक प्रकाश को रिक्त सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा अभी प्रतीक्षित है और प्रक्रिया की समय-सीमा स्पष्ट नहीं है।
विपक्ष का इस घटनाक्रम पर क्या रुख है?
विपक्षी दलों का कहना है कि संवैधानिक आवश्यकताओं का सख्ती से और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पालन होना चाहिए। उन्होंने बार-बार यह सवाल उठाया है कि बिना विधायी सदस्यता के मंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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