सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति पर बिहार सरकार को जारी किया नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 जून 2026 को बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति को संवैधानिक चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि बिना विधायक चुने किसी व्यक्ति को बार-बार मंत्री पद पर नियुक्त करना संविधान के अनुच्छेद 164(4) का उल्लंघन है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के अनुसार, दीपक प्रकाश न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। इसके बावजूद उन्हें 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया था। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है, बशर्ते उस दौरान वह राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल कर ले।
सरकार बदली, नियुक्ति दोहराई गई
15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार की सरकार गिर गई और मंत्रिपरिषद भंग हो गई। 22 दिनों के अंतराल के बाद 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार गठित हुई और प्रकाश को पुनः मंत्री पद पर नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि पहली नियुक्ति से गिनती शुरू होने पर छह महीने की समय-सीमा 20 मई 2026 को ही समाप्त हो चुकी थी।
संवैधानिक सवाल क्या है
याचिका में तर्क दिया गया है कि अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाली छह महीने की छूट एकमात्र और एकबारगी अवसर है। सरकार बदलने पर इसे रीसेट कर दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी नियुक्तियों को वैध माना गया, तो यह संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधि सरकार, सामूहिक जिम्मेदारी और चुनावी जवाबदेही के मूलभूत सिद्धांतों को कमज़ोर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सोमवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद तीनों पक्षों — बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग — को नोटिस जारी कर जवाब माँगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यों में गैर-निर्वाचित व्यक्तियों को मंत्री पद देने की परंपरा पर संवैधानिक बहस तेज़ होती जा रही है।
आगे क्या होगा
तीनों पक्षों को नोटिस का जवाब देना होगा, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा। यदि न्यायालय याचिका में दम पाता है, तो दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर बने रहने की वैधता संकट में पड़ सकती है और बिहार सरकार को नए सिरे से फैसला करना होगा।