बिहार MLC चुनाव: NDA ने दीपक प्रकाश को टिकट नहीं दिया, मंत्री पद पर संकट; कुशवाहा बोले- 'सवाल उन्हीं से पूछिए'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता और बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाया। चूँकि दीपक प्रकाश इस समय बिहार विधानसभा या विधान परिषद — किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनके मंत्री पद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कुशवाहा की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सीट न मिलने पर सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'यह सवाल तो उनसे पूछिए — मैं इसका जवाब कैसे दे सकता हूँ?' कुशवाहा ने सोमवार को नामांकन दाखिल करने वाले सभी NDA उम्मीदवारों को शुभकामनाएँ दीं।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने से जुड़े सवाल पर कुशवाहा ने कहा कि NDA के नेताओं ने मिलकर उन्हें मंत्री बनाया था और जब तक के लिए बनाया है, वे मंत्री बने रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस दिन दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली थी, उस दिन भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे।
NDA की एकजुटता का दावा
RLM विधायक माधव आनंद ने इस पूरे विवाद को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि NDA पूरी तरह एकजुट है। सीट न मिलने के मामले को उन्होंने 'पार्टी नेतृत्व का आंतरिक निर्णय' बताया और इस पर अधिक टिप्पणी करने से बचे।
नामांकन प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम
सोमवार, 8 जून को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। NDA की ओर से जनता दल (यूनाइटेड) के निशांत कुमार सहित सभी नौ उम्मीदवारों ने पर्चा भर दिया। इसी दिन विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुनील सिंह ने भी नामांकन दाखिल किया।
यदि आवश्यकता पड़ी तो बिहार विधान परिषद की नौ सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को प्रस्तावित है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई एक सीट पर उपचुनाव भी इसी कार्यक्रम के तहत कराया जा रहा है।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर कानूनी स्थिति
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर किसी न किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है, अन्यथा उसे पद छोड़ना पड़ता है। दीपक प्रकाश के लिए MLC चुनाव में टिकट न मिलना इस समय-सीमा को और संकुचित कर देता है। गौरतलब है कि कुशवाहा ने स्वयं माना कि प्रकाश शपथ के समय भी किसी सदन के सदस्य नहीं थे, जिससे यह प्रश्न और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
यह देखना बाकी है कि NDA नेतृत्व दीपक प्रकाश की सदस्यता की समस्या का समाधान किस रास्ते से निकालता है — चाहे वह उपचुनाव हो या कोई अन्य विकल्प।