भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स Q1 FY27 में 3.6% बढ़ा, चंडीगढ़ सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है — जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की वृद्धि दर के बराबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा की बुधवार, 16 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, आवासीय बाज़ार स्थिरता बनाए हुए है, हालाँकि इनपुट लागत और वैश्विक महँगाई का दबाव क्षेत्रवार असर दिखा रहा है।
मुख्य आँकड़े
तिमाही आधार पर HPI वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत बढ़ा, जो वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही की 0.5 प्रतिशत की वृद्धि से काफी अधिक है। सालाना आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह 4.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 3.6 प्रतिशत पर आ गया है — यानी मूल्य वृद्धि की रफ्तार में हल्की नरमी आई है। इसी अवधि में हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर 11 प्रतिशत रही, जो माँग में बुनियादी मज़बूती का संकेत देती है।
चंडीगढ़ और टियर-2 शहरों की अगुवाई
इस तिमाही में HPI वृद्धि में सबसे अधिक योगदान देने वाले शहर रहे — चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत)। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में कीमतों में तेज़ उछाल का प्रमुख कारण 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए कलेक्टर रेट और नई ज़मीन की कमी है। गौरतलब है कि ये सभी टियर-2 शहर हैं, और बेहतर कनेक्टिविटी एवं सेवा क्षेत्र में बढ़ते रोज़गार के कारण ये बड़े महानगरों के मुकाबले आवासीय माँग का नया केंद्र बन रहे हैं।
महानगरों में सुस्ती या गिरावट
बड़े शहरों की तस्वीर मिश्रित रही। कोलकाता में सालाना आधार पर -31.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली (-1.2 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) भी नकारात्मक क्षेत्र में रहे। मुंबई में मामूली 2.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह ऐसे समय में आया है जब महानगरों में संपत्ति की कीमतें पहले से ही ऊँचे स्तर पर हैं, जिससे नए खरीदारों की क्षमता प्रभावित हो रही है।
महँगाई और वैश्विक दबाव का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी और निर्माण लागत में वृद्धि ने घरों की कीमतों को ऊपर धकेला है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, जिससे वैश्विक विकास पर दबाव पड़ा और भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महँगाई तेज़ रही, जिसका असर आवास सहित कई उद्योगों पर देखा गया।
आगे क्या
आँकड़ों के अनुसार, टियर-2 शहरों में आवासीय माँग का यह उभार निकट भविष्य में जारी रह सकता है, बशर्ते रोज़गार और कनेक्टिविटी की रफ्तार बनी रहे। विश्लेषकों का मानना है कि हाउसिंग क्रेडिट की 11 प्रतिशत वृद्धि दर यह दर्शाती है कि बाज़ार में खरीदारों की रुचि कायम है, हालाँकि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती इनपुट लागत HPI की सालाना वृद्धि को और नरम कर सकती है।