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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स Q1 FY27 में 3.6% बढ़ा, चंडीगढ़ सबसे आगे

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स Q1 FY27 में 3.6% बढ़ा, चंडीगढ़ सबसे आगे

सारांश

भारत का HPI Q1 FY27 में 3.6% बढ़ा, लेकिन असली कहानी बड़े शहरों की नहीं है। चंडीगढ़ 49.6% और जयपुर 36.4% की छलांग के साथ आगे हैं, जबकि कोलकाता में 31.5% की गिरावट। टियर-2 शहर अब आवासीय माँग की नई धुरी बन रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सालाना 3.6 प्रतिशत बढ़ा — पिछले साल की समान तिमाही के बराबर।
तिमाही आधार पर वृद्धि 1.1 प्रतिशत रही, जो Q4 FY26 की 0.5 प्रतिशत से दोगुनी है।
हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि Q1 FY27 में 11 प्रतिशत रही।
चंडीगढ़ (49.6%) , जयपुर (36.4%) और कानपुर (27.5%) HPI वृद्धि में शीर्ष पर रहे।
कोलकाता (-31.5%) , दिल्ली (-1.2%) और हैदराबाद (-0.8%) में गिरावट या स्थिरता रही।
चंडीगढ़ में 1 अप्रैल 2026 से लागू नए कलेक्टर रेट और ज़मीन की कमी प्रमुख कारण।

भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है — जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की वृद्धि दर के बराबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा की बुधवार, 16 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, आवासीय बाज़ार स्थिरता बनाए हुए है, हालाँकि इनपुट लागत और वैश्विक महँगाई का दबाव क्षेत्रवार असर दिखा रहा है।

मुख्य आँकड़े

तिमाही आधार पर HPI वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत बढ़ा, जो वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही की 0.5 प्रतिशत की वृद्धि से काफी अधिक है। सालाना आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह 4.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 3.6 प्रतिशत पर आ गया है — यानी मूल्य वृद्धि की रफ्तार में हल्की नरमी आई है। इसी अवधि में हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर 11 प्रतिशत रही, जो माँग में बुनियादी मज़बूती का संकेत देती है।

चंडीगढ़ और टियर-2 शहरों की अगुवाई

इस तिमाही में HPI वृद्धि में सबसे अधिक योगदान देने वाले शहर रहे — चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत)। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में कीमतों में तेज़ उछाल का प्रमुख कारण 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए कलेक्टर रेट और नई ज़मीन की कमी है। गौरतलब है कि ये सभी टियर-2 शहर हैं, और बेहतर कनेक्टिविटी एवं सेवा क्षेत्र में बढ़ते रोज़गार के कारण ये बड़े महानगरों के मुकाबले आवासीय माँग का नया केंद्र बन रहे हैं।

महानगरों में सुस्ती या गिरावट

बड़े शहरों की तस्वीर मिश्रित रही। कोलकाता में सालाना आधार पर -31.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली (-1.2 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) भी नकारात्मक क्षेत्र में रहे। मुंबई में मामूली 2.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। यह ऐसे समय में आया है जब महानगरों में संपत्ति की कीमतें पहले से ही ऊँचे स्तर पर हैं, जिससे नए खरीदारों की क्षमता प्रभावित हो रही है।

महँगाई और वैश्विक दबाव का असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी और निर्माण लागत में वृद्धि ने घरों की कीमतों को ऊपर धकेला है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, जिससे वैश्विक विकास पर दबाव पड़ा और भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महँगाई तेज़ रही, जिसका असर आवास सहित कई उद्योगों पर देखा गया।

आगे क्या

आँकड़ों के अनुसार, टियर-2 शहरों में आवासीय माँग का यह उभार निकट भविष्य में जारी रह सकता है, बशर्ते रोज़गार और कनेक्टिविटी की रफ्तार बनी रहे। विश्लेषकों का मानना है कि हाउसिंग क्रेडिट की 11 प्रतिशत वृद्धि दर यह दर्शाती है कि बाज़ार में खरीदारों की रुचि कायम है, हालाँकि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती इनपुट लागत HPI की सालाना वृद्धि को और नरम कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली खबर शहरों के बीच की खाई है — चंडीगढ़ में 49.6 प्रतिशत और कोलकाता में -31.5 प्रतिशत एक ही रिपोर्ट में है। यह मात्र क्षेत्रीय उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है जहाँ टियर-2 शहर सस्ती ज़मीन, सेवा क्षेत्र के रोज़गार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर महानगरों को पीछे छोड़ रहे हैं। लेकिन चंडीगढ़ की उछाल में कलेक्टर रेट संशोधन का बड़ा हाथ है — यह बाज़ार की वास्तविक माँग कम, नीतिगत बदलाव का असर अधिक है, जो दीर्घकालिक तस्वीर को जटिल बनाता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) क्या होता है?
हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) आवासीय संपत्तियों की कीमतों में समय के साथ होने वाले बदलाव को मापता है। यह रिपोर्ट बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा तैयार की गई है और Q1 FY27 के आँकड़ों पर आधारित है।
Q1 FY27 में HPI कितना बढ़ा और पिछली तिमाही से कैसे अलग है?
सालाना आधार पर HPI Q1 FY27 में 3.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि Q4 FY26 में यह 4.5 प्रतिशत था। तिमाही आधार पर Q1 FY27 में 1.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो Q4 FY26 की 0.5 प्रतिशत से अधिक है।
चंडीगढ़ में आवास कीमतें इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ीं?
1 अप्रैल 2026 से लागू नए कलेक्टर रेट और शहर में नई ज़मीन की कमी चंडीगढ़ में 49.6 प्रतिशत की तेज़ HPI वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। यह वृद्धि काफी हद तक नीतिगत बदलाव के कारण है, न कि केवल बाज़ार माँग के कारण।
कोलकाता और दिल्ली में आवास कीमतें क्यों गिरीं?
कोलकाता में Q1 FY27 में -31.5 प्रतिशत और दिल्ली में -1.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। महानगरों में पहले से ऊँचे मूल्य स्तर और खरीदारों की सीमित क्रय क्षमता इस सुस्ती के पीछे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
टियर-2 शहर आवासीय बाज़ार में आगे क्यों हैं?
बेहतर कनेक्टिविटी और सेवा क्षेत्र में बढ़ते रोज़गार अवसरों ने जयपुर, कानपुर, लखनऊ जैसे टियर-2 शहरों में आवासीय माँग को बढ़ाया है। अपेक्षाकृत सस्ती संपत्ति और बुनियादी ढाँचे में सुधार इन शहरों को नए घर खरीदारों की पहली पसंद बना रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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