मई में थोक महंगाई 9.68% रही; सरकार ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ नई WPI सीरीज लॉन्च की
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार, 15 जून 2026 को 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (WPI) सीरीज जारी की। इसके साथ ही मंत्रालय ने घोषणा की कि मई 2026 में अखिल भारतीय थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई और सभी वस्तुओं का सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुँच गया। यह संशोधित सीरीज 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी WPI सीरीज की जगह लेती है।
नई WPI सीरीज में क्या बदला
संशोधित WPI बास्केट में शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। नई सीरीज में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को भी बास्केट में शामिल किया गया है। इसके अलावा, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में स्थानांतरित किया गया है।
वस्तुओं का वेटेज तय करने के लिए अब ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (GVO) पद्धति अपनाई गई है। साथ ही इंडेक्स निर्माण और कीमतों के अनुपलब्ध होने की स्थिति से निपटने हेतु नई तकनीकों को भी अपनाया गया है।
नए मूल्य सूचकांकों की शुरुआत
संशोधित WPI के साथ-साथ सरकार ने तीन नई सीरीज भी जारी की हैं — आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) और सात सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI)। मंत्रालय के अनुसार, मई में सभी वस्तुओं के लिए OPPI 109.6 और विनिर्माण क्षेत्र के लिए IPPI 104.9 दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उपयोगकर्ताओं को नई प्रणाली अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से पुरानी WPI सीरीज को अगले पाँच वर्षों तक समानांतर रूप से जारी रखा जाएगा।
श्रेणीवार महंगाई का विश्लेषण
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, मई में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर 4.99 प्रतिशत रही। ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई लगभग 30 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो समग्र थोक महंगाई को ऊपर धकेलने वाला प्रमुख कारक रही। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत और WPI खाद्य सूचकांक के तहत खाद्य महंगाई 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई।
महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स शामिल रहे।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मूल्य माप प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया तेज हो रही है। नई PPI-आधारित प्रणाली की ओर यह संक्रमण उत्पादक स्तर पर मूल्य दबावों को अधिक सटीकता से मापने में सहायक होगी। अगले पाँच वर्षों में दोनों सीरीज के समानांतर संचालन से नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत को नई पद्धति को समझने और अपनाने का अवसर मिलेगा।