25 सितंबर 2026
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प्रो. सतीश धवन जयंती 2026: इसरो के पूर्व अध्यक्ष को गडकरी, मनोहर लाल समेत कई नेताओं ने किया नमन

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प्रो. सतीश धवन जयंती 2026: इसरो के पूर्व अध्यक्ष को गडकरी, मनोहर लाल समेत कई नेताओं ने किया नमन

सारांश

प्रो. सतीश धवन की जयंती पर 25 सितंबर 2026 को गडकरी, मनोहर लाल, भजनलाल शर्मा, डॉ. मोहन यादव और केशव मौर्य समेत कई नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। इसरो को SLV-3 युग में वैश्विक पहचान दिलाने वाले इस पद्म विभूषण वैज्ञानिक का नाम श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र में आज भी जीवित है।

मुख्य बातें

सतीश धवन की जयंती 25 सितंबर 2026 को देशभर में मनाई गई।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट कर प्रो.
धवन को श्रद्धांजलि दी।
राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा और MP के CM डॉ.
मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पर नमन अर्पित किया।
UP के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और BJP सांसद मेधा कुलकर्णी ने उन्हें 'अंतरिक्ष अनुसंधान का आधारस्तंभ' बताया।
धवन ने 1972–1984 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में SLV-3 जैसे ऐतिहासिक मिशन सफल किए।
श्रीहरिकोटा स्थित देश का प्रमुख अंतरिक्ष केंद्र उन्हीं के नाम पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र है।

भारत के महान एयरोस्पेस वैज्ञानिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एवं पद्म विभूषण से सम्मानित प्रो. सतीश धवन की जयंती पर 25 सितंबर 2026 को देशभर के नेताओं और मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक, सभी ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ देने वाले इस महान वैज्ञानिक को याद किया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, 'महान भारतीय रॉकेट वैज्ञानिक, इसरो के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. सतीश धवन की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन। विज्ञान के क्षेत्र में देश के प्रति उनका योगदान अमूल्य है।'

केंद्रीय आवास, शहरी मामलों एवं बिजली मंत्री मनोहर लाल ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा, 'भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देने वाले महान वैज्ञानिक एवं इसरो के पूर्व अध्यक्ष, पद्म विभूषण प्रो. सतीश धवन की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन अर्पित करता हूँ। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रो. धवन का 'अद्भुत शोध और अथक परिश्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज रहेंगे।'

मुख्यमंत्रियों ने जताया सम्मान

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में प्रो. धवन को 'भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का शिल्पकार' बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अद्वितीय नेतृत्व और अतुलनीय योगदान से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा और ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। शर्मा ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान के प्रति उनका समर्पण तथा राष्ट्रनिर्माण की उनकी वैज्ञानिक दृष्टि 'सदैव प्रेरणादायी रहेगी।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर लिखा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा और ऊँचाइयों तक ले जाने में प्रो. धवन का 'महत्वपूर्ण योगदान' था और उनकी उपलब्धियाँ 'सदैव प्रेरणादायी रहेंगी।'

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने एक्स पर पोस्ट कर प्रो. धवन को 'शत-शत नमन' करते हुए कहा कि उन्होंने 'दूरदर्शी नेतृत्व, वैज्ञानिक प्रतिभा और समर्पण से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. धवन का योगदान भारत की अंतरिक्ष यात्रा में 'सदैव स्मरणीय रहेगा।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी पोस्ट में प्रो. धवन को 'भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान का आधारस्तंभ' बताया। उन्होंने कहा कि प्रो. धवन के 'दूरदर्शी नेतृत्व, उत्कृष्ट शोध और अटूट समर्पण ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई।' कुलकर्णी ने यह भी जोड़ा कि उनका 'प्रेरणादायी जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश-स्तंभ बना रहेगा।'

प्रो. सतीश धवन की विरासत

गौरतलब है कि प्रो. सतीश धवन ने 1972 से 1984 तक इसरो के अध्यक्ष पद पर रहते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैज्ञानिक आधार और संस्थागत मजबूती दी। उनके नेतृत्व में भारत ने पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) विकसित किया और देश की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमताओं की नींव रखी। श्रीहरिकोटा स्थित देश के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र का नाम उनके सम्मान में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र रखा गया है।

यह ऐसे समय में है जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम चंद्रयान और गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों के साथ नई ऊँचाइयाँ छू रहा है — प्रो. धवन के उस सपने को साकार करते हुए जो उन्होंने दशकों पहले देखा था। उनके जन्मदिन पर नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि वे भारत के वैज्ञानिक इतिहास में एक अमिट स्थान रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उनकी वैज्ञानिक विरासत को नीतिगत स्तर पर उतना ही सम्मान मिल रहा है। धवन ने इसरो में जो संस्थागत स्वायत्तता और विफलता को वैज्ञानिक अनुभव मानने की संस्कृति विकसित की थी, वह आज के राजनीतिक दबाव के युग में कितनी जीवंत है — यह विचारणीय प्रश्न है। उनके नाम का स्मरण तभी सार्थक होगा जब वैज्ञानिक संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए और युवा शोधकर्ताओं को वैसा ही संरक्षण मिले जैसा धवन ने अपने समय में दिया था।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रो. सतीश धवन कौन थे?
प्रो. सतीश धवन भारत के महान एयरोस्पेस वैज्ञानिक और 1972 से 1984 तक इसरो के अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-3 सफलतापूर्वक विकसित किया और देश की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमताओं की नींव रखी।
सतीश धवन को कौन-से सम्मान प्राप्त हुए थे?
प्रो. सतीश धवन को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण और पद्म विभूषण — दोनों से सम्मानित किया गया था। श्रीहरिकोटा स्थित देश के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र का नाम भी उनके सम्मान में 'सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र' रखा गया है।
25 सितंबर 2026 को सतीश धवन जयंती पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और BJP सांसद मेधा कुलकर्णी समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रो. धवन को नमन किया।
इसरो के अध्यक्ष के रूप में प्रो. धवन की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी?
प्रो. धवन के नेतृत्व में भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-3 सफलतापूर्वक विकसित और प्रक्षेपित किया। उन्होंने इसरो को एक मज़बूत संस्थागत ढाँचा और वैज्ञानिक संस्कृति दी, जो आज के चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशनों की बुनियाद है।
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र कहाँ स्थित है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित है और यह भारत का एकमात्र प्राथमिक रॉकेट प्रक्षेपण स्थल है। इसी केंद्र से इसरो के लगभग सभी प्रमुख मिशन — चंद्रयान, मंगलयान और PSLV श्रृंखला — प्रक्षेपित किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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