होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर ईरान का अमेरिका को प्रस्ताव: 7 दिनों में वार्ता की पेशकश
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों को बताया कि तेहरान ने ट्रंप प्रशासन को एक औपचारिक प्रस्ताव दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और सात दिनों के भीतर शांति वार्ता फिर शुरू करने की पेशकश की गई है। द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी अधिकारियों तक पहुँचाया गया है, हालाँकि व्हाइट हाउस की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
यह पहल महीनों से जारी उस संघर्ष की पृष्ठभूमि में आई है, जिसकी शुरुआत कथित तौर पर फरवरी 2026 के अंत में इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाईं और जहाज़ों को चेतावनी दी कि बिना तेहरान की सहमति के इस जलमार्ग से न गुज़रें।
गौरतलब है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इस रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुज़रता है। इसकी बंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित किया और कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखा गया।
ईरानी शर्तें और जून की सहमति
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान की शर्तें काफ़ी हद तक उस समझौता ज्ञापन (MOU) जैसी हैं, जिस पर दोनों पक्ष जून 2026 में सहमत हुए थे। उन्होंने कहा, 'हमने जो शर्तें रखी हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है।'
हालाँकि, एक महत्वपूर्ण विवाद यह है कि तेहरान ने जून की सहमति का अर्थ यह निकाला कि इसमें होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता दी गई है — जबकि अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगी इस व्याख्या को अस्वीकार करते रहे हैं।
ट्रंप और पेजेश्कियन के तेवर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में ईरान के साथ इस कूटनीतिक संपर्क की बात स्वीकार की। ट्रंप ने कहा कि ईरान या तो संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते पर आए या फिर उसे 'पूरी तरह खत्म होने' का सामना करना पड़ सकता है। उनके इस बयान पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सभागार से बाहर चले गए।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बुधवार को महासभा में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'ईरान को ताकतवर होना चाहिए, ताकि उसे धमकाया न जा सके।' उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान वार्ता और कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन 'ताकत के दम पर बात मनवाने की भाषा' स्वीकार नहीं करेगा।
परमाणु विवाद: सबसे बड़ी रुकावट
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इजरायल के साथ इस संघर्ष में इसलिए शामिल हुआ ताकि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सके। वहीं, पेजेश्कियन ने दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा, परंतु उसे 'शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक' विकसित करने का अधिकार है।
यह विरोधाभास किसी भी संभावित समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है — वॉशिंगटन एक पुख्ता सत्यापन व्यवस्था चाहता है, जबकि तेहरान नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर किसी बंधन को संप्रभुता के विरुद्ध मानता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाज़ार महीनों से अस्थिर हैं और कई देश होर्मुज की बंदी के चलते गंभीर ऊर्जा संकट झेल रहे हैं। अगर ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव का सकारात्मक जवाब देता है, तो सात दिनों की समय-सीमा में कूटनीतिक वार्ता का नया दौर शुरू हो सकता है — हालाँकि परमाणु मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच की खाई अभी भी पाटना बाकी है।