होर्मुज स्ट्रेट दो दिन में खुल सकता है, ईरान बोला — अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी हटे
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को तेहरान में आयोजित साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि अमेरिका ईरान की 'वैध' मांगों को स्वीकार कर लेता है, तो होर्मुज स्ट्रेट को मात्र दो दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक बंद पड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
बाघेई ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थों के ज़रिए जो भी अप्रत्यक्ष बातचीत हो रही है, उसका आधार वही सात-दिवसीय योजना है जो ईरान ने सितंबर 2026 में प्रस्तावित की थी। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी सकारात्मक मंशा दर्शाते हुए इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि सात दिनों से घटाकर दो दिन कर दी है।
बाघेई के शब्दों में, 'हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि ईरान की मांगें पूरी की जाती हैं, तो होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बहाल करना और कम समय में बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना संभव होगा।' उन्होंने जोड़ा कि आगे क्या होगा, यह पूरी तरह अमेरिका के फैसले पर निर्भर करता है।
ईरान की शर्तें
ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान की मांगें 'स्पष्ट, उचित और तार्किक' हैं। उन्होंने साफ किया कि जब तक अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता और ईरान की 'वैध' मांगें नहीं मानता, तब तक न तो कोई समझौता होगा और न ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला या सुरक्षित बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि ईरान ने सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका को यह सात-दिवसीय योजना और अपनी शर्तें सौंपी थीं। इसके बाद दोनों देशों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहने की खबरें सामने आती रही हैं।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल तथा क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
यह संकट ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही अस्थिर हैं। होर्मुज स्ट्रेट की बंदी का सीधा असर खाड़ी देशों से होने वाले तेल और गैस के निर्यात पर पड़ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचता है।
भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए खाड़ी पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं, इस जलमार्ग की बंदी से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इस संकट का निपटारा न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्या होगा आगे
बाघेई के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अभी भी बातचीत का रास्ता खुला मानता है, परंतु शर्तें अमेरिका को स्वीकार करनी होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच की खाई अभी भी गहरी है और यह स्थिति निकट भविष्य में और जटिल हो सकती है। अगले कुछ दिनों में मध्यस्थ देशों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।