आईटीसी Q2 नतीजे: मुनाफा 20% घटकर ₹4,137 करोड़, मार्जिन 28% पर आया
सारांश
मुख्य बातें
आईटीसी का वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 20.1% की गिरावट के साथ ₹4,137 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में ₹5,176 करोड़ था। कंपनी ने यह नतीजे 2 नवंबर 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए सार्वजनिक किए।
आय में मामूली बढ़त, लेकिन मुनाफा दबाव में
तिमाही आय की बात करें तो कंसोलिडेटेड राजस्व सालाना आधार पर 1.8% बढ़कर ₹18,401 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह ₹18,081 करोड़ था। हालाँकि राजस्व वृद्धि सकारात्मक रही, लेकिन मार्जिन में आई भारी गिरावट ने मुनाफे पर सीधा असर डाला।
कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 34.6% से घटकर 28% पर आ गया — यानी 6.6 प्रतिशत अंकों की गिरावट। यही गिरावट मुनाफे में तीव्र कमी का मुख्य कारण बताई जा रही है।
एफएमसीजी सेगमेंट: सबसे बड़ा राजस्व योगदान
स्टैंडअलोन कारोबार के प्रमुख सेगमेंट में एफएमसीजी (FMCG) अग्रणी रहा। सितंबर तिमाही में इस सेगमेंट की आय बढ़कर ₹22,503.30 करोड़ हो गई, जो एक साल पहले ₹14,746.35 करोड़ थी। इसमें सिगरेट कारोबार से ₹15,536.13 करोड़ और नॉन-सिगरेट एफएमसीजी पोर्टफोलियो से ₹6,967.17 करोड़ का राजस्व शामिल है।
गौरतलब है कि आईटीसी का नॉन-सिगरेट एफएमसीजी कारोबार — जिसमें आटा, बिस्कुट, अगरबत्ती और होटल आपूर्ति उत्पाद शामिल हैं — धीरे-धीरे विविधीकरण की दिशा में बढ़ रहा है, हालाँकि सिगरेट अभी भी मुख्य राजस्व चालक बना हुआ है।
अन्य सेगमेंट में भी ग्रोथ
एग्री बिजनेस सेगमेंट की आय ₹3,976.24 करोड़ से बढ़कर ₹4,451.69 करोड़ हो गई। वहीं, पेपरबोर्ड, पेपर और पैकेजिंग सेगमेंट से होने वाली आय ₹2,219.92 करोड़ से उछलकर ₹3,015.85 करोड़ पर पहुँच गई — इस सेगमेंट में वृद्धि की रफ़्तार उल्लेखनीय रही।
शेयर बाज़ार में आईटीसी का प्रदर्शन
नतीजों के दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आईटीसी का शेयर हल्की बढ़त के साथ ₹266.40 पर बंद हुआ। बीते एक हफ्ते में शेयर ने 2.26% और एक महीने में 4.10% का रिटर्न दिया है।
हालाँकि दीर्घकालिक तस्वीर चिंताजनक है — इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर -26.78% और पिछले एक साल में -36.62% लुढ़क चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब एफएमसीजी क्षेत्र में समग्र उपभोक्ता माँग सुस्त बनी हुई है।
आगे की राह
मार्जिन संकुचन और शेयर के दीर्घकालिक दबाव को देखते हुए निवेशकों की नज़र अब अगली तिमाही के परिणामों और प्रबंधन की रणनीतिक टिप्पणियों पर होगी। कंपनी के विविधीकरण प्रयास — खासकर नॉन-सिगरेट एफएमसीजी और एग्री सेगमेंट में — आने वाली तिमाहियों में मार्जिन सुधार की कुंजी बन सकते हैं।