महाराष्ट्र कांग्रेस का BJP पर हमला: 'लोकतंत्र बचाओ' रैलियाँ 'खुद चोर कोतवाल को डांटे' जैसी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र और संविधान बचाओ' अभियान को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यह 'खुद चोर कोतवाल को डांटे' जैसी स्थिति है। सपकाल ने आरोप लगाया कि BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ही लोकतंत्र एवं संविधान के वास्तविक विरोधी हैं।
रैलियों की पृष्ठभूमि
सपकाल के अनुसार, दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन द्वारा आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मेगा रैली से BJP को करारा झटका लगा, और उसी के प्रतिक्रियास्वरूप BJP अब देशभर में 'लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ' रैलियाँ आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कांग्रेस पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप 'हास्यास्पद' है।
संविधान और RSS पर कांग्रेस के आरोप
सपकाल ने आरोप लगाया कि BJP की मातृ संस्था RSS ने कभी डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान को स्वीकार नहीं किया, और BJP नेता खुलेआम इसे बदलने की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'BJP संविधान का नाम तो लेती है, लेकिन उसके हृदय में मनुस्मृति बसी है।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है।
चुनावी भ्रष्टाचार के आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकारें 2024 के चुनावों में कथित वोट चोरी के ज़रिये सत्ता में आईं। उन्होंने कहा कि इस कथित चुनावी भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो चुका है, और सत्ताधारी नेता चुनाव हारने के बाद संभावित कार्रवाई की आशंका से चिंतित हैं। ये आरोप सपकाल की ओर से लगाए गए हैं; BJP की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं है।
मतदाता सूची और ज्ञानेश कुमार विवाद
सपकाल ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार, ज्ञानेश कुमार की सहायता से, 13 करोड़ नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार का हनन है। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि घुसपैठियों का मुद्दा वास्तविक है, तो सरकार को उनके ठोस आँकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने और लोकतंत्र को कमज़ोर करने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, RSS और BJP से संबद्ध व्यक्तियों को संवैधानिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि BJP 13 साल सत्ता में रहने के बावजूद अपनी उपलब्धियाँ गिनाने के बजाय जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी को निशाना बनाती रहती है। महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने के संकेत हैं।