ईडी की दिल्ली-कोलकाता में छापेमारी: फर्जी सॉफ्टवेयर आयात मामले में ₹47 लाख नकद व विदेशी मुद्रा जब्त, ₹1,500 करोड़ का घोटाला
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 नवंबर 2026 को फर्जी सॉफ्टवेयर आयात की आड़ में विदेशों में अवैध धन प्रेषण के एक बड़े मामले में नई दिल्ली और कोलकाता के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में ₹47 लाख बेहिसाबी नकदी और कई देशों की विदेशी मुद्रा बरामद की गई, जबकि मामले में अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की प्रारंभिक अनुमानित राशि ₹1,500 करोड़ बताई जा रही है।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान ₹47 लाख की बेहिसाबी नकदी के अलावा 5,900 अमेरिकी डॉलर, 2,200 यूएई दिरहम और 5,600 चीनी युआन (रेनमिन्बी) बरामद किए गए। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी कागजात और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए। एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों से अवैध धन-लेन-देन और शेल कंपनियों के माध्यम से धन विदेश भेजे जाने के अहम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोपी
यह जांच ईडी के विशाखापत्तनम सब-जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत शुरू की। जांच का आधार विशाखापत्तनम के एमवीपी पुलिस थाने में आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज एफआईआर है। मुख्य आरोपी वड्डी महेश पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली दस्तावेजों की तरह प्रस्तुत करते हुए विभिन्न बैंकों के जरिए विदेश धन भेजने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि वड्डी महेश ने अपने पिता और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कोलकाता में कई कंपनियाँ बनाईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोले। इन खातों के माध्यम से ₹569.03 करोड़ कथित तौर पर सिंगापुर, हांगकांग और चीन की पाँच कंपनियों को 'कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर' खरीदने के नाम पर भेजे गए। हालांकि, ईडी के अनुसार बैंकों को विदेशी कंपनियों के फर्जी चालान (इनवॉइस) दिए गए और इन भुगतानों के बदले वास्तव में कोई सॉफ्टवेयर आयात नहीं किया गया।
तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग का कथित नेटवर्क
जांच में एक अन्य प्रमुख व्यक्ति भीमेंद्र कुमार गोयल का नाम सामने आया है, जिन्हें कोफेपोसा (COFEPOSA) के तहत तीन बार हिरासत में लिया जा चुका है। एजेंसी का आरोप है कि वे कथित तौर पर सीमा शुल्क से बचते हुए भारत में कॉस्मेटिक उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कपड़ा सामग्री की तस्करी करते थे।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2014 से 2017 के बीच तस्करी से अर्जित धन को विदेश भेजने और उसे वैध दिखाने के लिए भीमेंद्र कुमार गोयल ने अपने सहयोगियों के माध्यम से वड्डी महेश से संपर्क किया। यह राशि सिंगापुर और हांगकांग की निष्क्रिय या नव-स्थापित कंपनियों में जमा की गई, जिन्हें नामित निदेशकों के जरिए संचालित किया जा रहा था। बाद में यह धन स्विस फॉक्स पीटीई लिमिटेड और भाव टेक्नोलॉजी चाइना लिमिटेड के खातों में स्थानांतरित किया गया — ये दोनों कंपनियाँ भीमेंद्र कुमार गोयल और उनके परिवार से जुड़ी बताई जाती हैं।
दिल्ली में फर्जी फर्मों का जाल
जांच में यह भी उजागर हुआ कि भीमेंद्र कुमार गोयल ने पवन कुमार रल्ली के साथ मिलकर नई दिल्ली में मेहक ओवरसीज, करण ओवरसीज और गीत एंटरप्राइजेज नामक फर्जी फर्में फर्जी नामों और नकली पतों पर संचालित कीं। ईडी के अनुसार, अवैध धन का एक हिस्सा विलेज हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट के माध्यम से विदेश भेजा गया, जिसे सिंगापुर स्थित ईगल माउंट ट्रेडिंग पीटीई लिमिटेड में प्राप्त किया गया। इस कंपनी का लाभकारी स्वामित्व आशीष टोडी के पास बताया गया है।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। गौरतलब है कि यह मामला महज एक स्थानीय वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि एक बहु-देशीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है जिसमें सिंगापुर, हांगकांग और चीन की कंपनियाँ शामिल हैं। ₹1,500 करोड़ के अनुमानित अपराध-अर्जित धन की बरामदगी की दिशा में यह छापेमारी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।