बावनकुले का उद्धव ठाकरे पर पलटवार: 'भाजपा की नहीं, अपनी पार्टी की चिंता करें'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 29 जून 2026 को नागपुर में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ठाकरे ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 'राम मंदिर को लूटने वाली बाबर की पार्टी' करार दिया था। बावनकुले ने ठाकरे को सीधे संदेश देते हुए कहा कि वे भाजपा की चिंता छोड़कर पहले अपनी पार्टी की दुर्दशा पर ध्यान दें।
मुख्य बयान: 'आत्मचिंतन करें उद्धव'
मंत्री बावनकुले ने कहा, 'आज की तारीख में आपकी पार्टी की दुर्गति कैसी है, यह बात किसी से छुपी नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के विधायक और सांसद लगातार पार्टी छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं — यह तथ्य भी सर्वविदित है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में ठाकरे के लिए दूसरों को हिदायत देने के बजाय आत्मचिंतन करना अधिक उचित होगा।
भाजपा की विचारधारा पर जोर
बावनकुले ने स्पष्ट किया कि भाजपा सत्ता के लिए नहीं, बल्कि विचारों और सिद्धांतों के लिए काम करती है और किसी भी प्रकार के समझौते से परहेज करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की बागडोर व्यावहारिक रूप से कांग्रेस के हाथों में सौंप दी है, जिससे उनके पास 'टीका-टिप्पणी के अलावा कुछ नहीं बचा।' उनके शब्दों में, इस तरह की आलोचना से ठाकरे को कुछ भी हासिल नहीं होगा।
बालासाहेब की विरासत का दावा
मंत्री ने कहा कि जनता यह महसूस कर चुकी है कि बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों को आगे ले जाने का काम केवल एकनाथ शिंदे की शिवसेना ही कर सकती है। यही कारण है, उनके अनुसार, कि शिंदे गुट को 'अपार जनसमर्थन' मिल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच 'असली शिवसेना' की राजनीतिक विरासत पर दावेदारी तेज हो गई है।
25 साल के रिश्ते पर टिप्पणी
बावनकुले ने यह भी कहा कि जिन लोगों के साथ उद्धव ठाकरे 25 वर्षों तक रहे, उन पर इस तरह की 'अशोभनीय टिप्पणी' करना उचित नहीं है। यह संदर्भ स्पष्ट रूप से भाजपा और शिवसेना के पुराने गठबंधन की ओर था, जो 2019 में टूट गया था। उन्होंने ठाकरे को सुझाव दिया कि वे अपनी खामियों को पहचानें और उन्हें दूर करने पर ध्यान केंद्रित करें।
आगे क्या
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच वाकयुद्ध थमने के कोई संकेत नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के बाद से शिवसेना (यूबीटी) पर विधायकों और नेताओं के पलायन का दबाव बना हुआ है, और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।