भाजपा ने 'ऑपरेशन टाइगर' से पल्ला झाड़ा, बावनकुले बोले — उद्धव गुट करे आत्मचिंतन
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 17 जून को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का 'ऑपरेशन टाइगर' नाम से चर्चित कथित राजनीतिक दल-बदल अभियान से कोई संबंध नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया जब शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के दिल्ली दौरे की खबरों ने पार्टी-परिवर्तन की अटकलों को हवा दे दी थी।
बावनकुले का स्पष्ट इनकार
बावनकुले ने कहा, 'मुझे 'ऑपरेशन टाइगर' के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं पता कि यह क्या है, इसे कौन लाया और क्यों लाया गया।' उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला पूरी तरह एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के बीच का आंतरिक विवाद है, जिसमें BJP की कोई भूमिका नहीं है।
राउत के आरोपों पर पलटवार
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को ₹15 करोड़ की अग्रिम राशि की पेशकश की जा रही है। इस पर बावनकुले ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधि केवल आर्थिक लाभ के लिए पाला नहीं बदलते। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को यह आत्म-मंथन करना चाहिए कि उनके विधायक और सांसद पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं।
भाजपा नेता नवनाथ बन का हमला
भाजपा नेता नवनाथ बन ने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि न तो BJP और न ही शिवसेना का इस कथित 'ऑपरेशन टाइगर' से कोई संबंध है। उनके अनुसार यह उथल-पुथल उद्धव ठाकरे गुट के भीतर की आंतरिक कलह का परिणाम है। बन ने राउत पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया और कहा कि इससे जनता के बीच उनकी साख घटी है।
विचारधारा से भटकाव का आरोप
बन ने आगे कहा कि राजनीतिक संगठन केवल भावनात्मक कसमों के सहारे नहीं चल सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों से भटक गए हैं, हिंदुत्व की विचारधारा को छोड़ दिया और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। बन ने कहा, 'जनता पहले ही दिखा चुकी है कि असली टाइगर कौन है और कौन डरकर भाग रहा है।'
आगे क्या होगा
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में उसका ध्यान शासन और विकास पर केंद्रित है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की दिल्ली यात्रा और 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर उठे सवालों का जवाब अभी आना बाकी है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और गर्म होने की संभावना है।