'ऑपरेशन टाइगर' पर इंडिया गठबंधन का पलटवार: 'ऑफर आएंगे-जाएंगे, हम नहीं बिकेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की राजनीति में 17 जून 2026 को 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर तीखी बयानबाज़ी छिड़ गई, जब इंडिया गठबंधन के सांसदों ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर खुलकर निशाना साधा। रिपोर्टों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिशें चल रही हैं — इन्हीं अटकलों के बीच विपक्षी खेमे ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि विचारधारा से जुड़े लोगों को कोई भी प्रलोभन नहीं डिगा सकता।
कांग्रेस सांसद का सीधा जवाब
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'जो लोग पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित हैं, वे कभी अलग नहीं होंगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडिया गठबंधन के सांसदों के पास प्रलोभन लेकर कोई इसलिए नहीं आता, क्योंकि विरोधी जानते हैं कि उनकी विचारधारा क्या है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि जो लोग सदन में साथ थे और बाद में अलग राह पर चले गए, उनसे सबक लिया जाना चाहिए।
एनसीपी (एसपी) का सतर्क रुख
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सांसद सुरेश म्हात्रे ने सधे हुए शब्दों में कहा कि शिवसेना की विचारधारा और उनकी पार्टी की विचारधारा अलग-अलग है, इसलिए वे शिवसेना के आंतरिक मामलों पर सीधी टिप्पणी करने से बचेंगे। उन्होंने कहा, 'हम इंडिया गठबंधन में साथ हैं, फिर भी हम अलग-अलग पार्टियाँ हैं — इसलिए ऐसे मामलों में दखल नहीं देते।' म्हात्रे ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति अब नई दिल्ली तक पहुँच चुकी है, जो राज्य की राजनीतिक ताकत को दर्शाता है।
शिवसेना (यूबीटी) का तीखा व्यंग्य
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 'ऑपरेशन टाइगर' नाम पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि मूल 'ऑपरेशन टाइगर' बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए शुरू किया गया था, लेकिन यह 'ऑपरेशन' तो उनके सांसदों की संख्या घटाने और उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, 'यह बाघों को बचाने वाला ऑपरेशन कम और बाघों को मारने वाला ऑपरेशन ज़्यादा लग रहा है।'
2022 से 2026 तक: टूट का सिलसिला
दुबे ने याद दिलाया कि 2022 में शिवसेना (यूबीटी) पहली बार टूटी थी। पार्टी ने उस वक्त कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कहा कि 2026 में एक बार फिर उसी प्रक्रिया को दोहराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया, 'जिस पार्टी ने टिकट दिया और जिसके बल पर चुनाव जीते, नैतिकता कहती है कि कम से कम पाँच साल तो उसी के साथ रहना चाहिए।' दुबे ने यह भी कहा कि दूसरी तरफ सत्ता की भूख कब खत्म होगी, यह समझ से परे है।
आगे क्या
एनसीपी (एसपी) सांसद म्हात्रे ने संकेत दिया कि शाम तक स्थिति पर पूरी जानकारी मिलने के बाद गठबंधन कोई सामूहिक रुख तय कर सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। आने वाले दिनों में 'ऑपरेशन टाइगर' की सच्चाई और इसके परिणाम महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।