ऑपरेशन टाइगर: शिंदे गुट में शामिल हुए यूबीटी के 6 सांसद, लोकसभा में उद्धव की ताकत 9 से घटकर 3
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की राजनीति में 22 जून 2026 को एक बड़ा भूचाल आया, जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 'ऑपरेशन टाइगर' को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसदों को अपने गुट में शामिल कर लिया। इस राजनीतिक उलटफेर के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी की संसदीय संख्या 9 से घटकर महज 3 रह गई है।
कौन हैं छह बागी सांसद
शिंदे गुट में शामिल होने वाले छह सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं। उद्धव ठाकरे के साथ केवल तीन सांसद बचे हैं — अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक)।
दलबदल विरोधी कानून से कैसे बचे
दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में 9 में से 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने दरार के संकेत पहले ही दे दिए थे। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया। गौरतलब है कि दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए किसी दल के कम-से-कम दो-तिहाई सांसदों का एकसाथ आना अनिवार्य है — और छह सांसदों ने मिलकर यह सीमा पार कर ली।
बागियों ने क्यों छोड़ा उद्धव का साथ
नागेश आष्टीकर और ओमराजे निंबालकर ने स्वीकार किया कि विपक्ष में रहने के कारण पिछले दो वर्षों में उनके निर्वाचन क्षेत्रों को विकास निधि से वंचित रहना पड़ा। उनके अनुसार, ₹5 करोड़ की सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडी) पर्याप्त नहीं थी और राज्य-समर्थित निधि के अभाव में उनका जमीनी प्रभाव कमजोर पड़ रहा था। आष्टीकर ने फेसबुक लाइव के माध्यम से कहा कि उद्धव ठाकरे के प्रति उनके मन में कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है, किंतु दिल्ली बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद संजय राउत जैसे वरिष्ठ नेताओं द्वारा प्रदर्शित 'अपमानजनक भाषा' और अविश्वास से वे आहत थे।
निंबालकर के दलबदल की अलग पृष्ठभूमि
ओमराजे निंबालकर का यह कदम उस समय आया जब सत्र न्यायालय ने उनके पिता पवनराजे निंबालकर की हत्या के आरोपियों को बरी कर दिया। निंबालकर ने बताया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात करवाई और उन्हें आश्वासन दिया कि सीबीआई इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी।
उद्धव का पलटवार और आगे की राह
उद्धव ठाकरे ने नुकसान की भरपाई के लिए राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, जिसकी शुरुआत बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों — यवतमाल, वाशिम और हिंगोली — से की गई है। उन्होंने दलबदलुओं पर चुनाव के बाद 'खुद को बेचने' का आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश में है, और विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) के भीतर एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।