11 अगस्त 2026
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शिवसेना (यूबीटी) छोड़ शिंदे गुट में शामिल सांसद संजय देशमुख बोले — उद्धव पर कोई टिप्पणी नहीं, विकास ही लक्ष्य

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शिवसेना (यूबीटी) छोड़ शिंदे गुट में शामिल सांसद संजय देशमुख बोले — उद्धव पर कोई टिप्पणी नहीं, विकास ही लक्ष्य

सारांश

महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए। यवतमाल-वाशिम सांसद संजय देशमुख ने कहा — यह संविधान के दायरे में सामूहिक फैसला है, विकास निधि की कमी मुख्य कारण।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसद 23 जून 2025 को एकनाथ शिंदे के गुट में औपचारिक रूप से शामिल हुए।
शिंदे गुट ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया।
सांसद संजय देशमुख ने कहा — विकास कार्यों के लिए धन की कमी के कारण सामूहिक निर्णय लिया गया।
देशमुख ने उद्धव ठाकरे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया; कहा — जनता खुद तय करेगी।
वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेलवे परियोजना और शकुंतला ब्रॉड गेज रेलवे को पूरा करना देशमुख की प्राथमिकता।
बागी सांसदों में धाराशिव, हिंगोली, परभणी, यवतमाल-वाशिम, शिरडी और मुंबई उत्तर पूर्व के प्रतिनिधि शामिल।

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसद सोमवार, 23 जून 2025 को औपचारिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए। इन बागी सांसदों में यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय उत्तमराव देशमुख भी शामिल हैं, जिन्होंने गुट-परिवर्तन के बाद पत्रकारों से पहली बार मुखर होकर अपना पक्ष रखा।

देशमुख ने क्यों छोड़ी पार्टी

संजय देशमुख ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'आम जनता ने हमें चुना है। विकास कार्यों के दौरान धन की कमी का सवाल उठा, इसलिए सभी सांसदों ने एक साथ बैठकर सामूहिक निर्णय लिया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल अकेले उनकी नहीं, बल्कि 6 सांसदों का साझा फैसला था।

देशमुख ने यह भी जोड़ा कि यह निर्णय 'संविधान के दायरे में' लिया गया है और सभी सांसदों ने 'कानून के दायरे में रहते हुए' यह कदम उठाया है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद से ही शिवसेना के दोनों गुटों के बीच खींचतान जारी है।

उद्धव ठाकरे पर चुप्पी, विकास पर ज़ोर

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर देशमुख ने संयम बरतते हुए कहा, 'मैं उद्धव के बारे में कुछ नहीं कहूंगा। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आएंगे, लोगों से मिलेंगे, अपनी भूमिका बताएंगे — और हम अपनी भूमिका बताएंगे।' उन्होंने संकेत दिया कि जनता को दोनों पक्षों का आकलन खुद करने देना चाहिए।

देशमुख ने अपने क्षेत्र की विकास परियोजनाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यवतमाल जिला किसान आत्महत्याओं से जूझ रहा है और वाशिम एक 'आकांक्षी जिला' है। वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेलवे परियोजना और शकुंतला ब्रॉड गेज रेलवे को पूरा करना उनकी प्राथमिकता बताई।

अंजली दमानिया के आरोपों का खंडन

सांसद निधि के कथित दुरुपयोग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया की आलोचना पर देशमुख ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'सांसद विकास निधि के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें तथ्य नहीं है; दमानिया को इसकी जानकारी नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि हर विकास कार्य का अनुमान पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है और तकनीकी कारणों से पोर्टल कभी-कभी बंद हो जाता है — इसमें कोई अनियमितता नहीं है।

'ऑपरेशन टाइगर' — शिंदे गुट की बड़ी सियासी चाल

शिंदे गुट ने इस पूरी कार्रवाई को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया है। सोमवार को एक साथ 6 यूबीटी सांसदों का शिंदे खेमे में विलय महाराष्ट्र की राजनीति में एक सुनियोजित रणनीतिक कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे ने खुद शिवसेना में बगावत कर सरकार बनाई थी — और अब उद्धव गुट के भीतर से ही इसी पैटर्न की पुनरावृत्ति देखी जा रही है।

बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।

आगे क्या होगा

इस विलय के बाद शिवसेना (यूबीटी) की संसद में स्थिति कमज़ोर पड़ सकती है। उद्धव ठाकरे का अगला कदम — चाहे वह अनुशासनात्मक कार्रवाई हो या न्यायिक चुनौती — महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेगा। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले हफ्तों में और भी उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उद्धव ठाकरे के लिए यह संकेत है कि उनकी पार्टी की जड़ें उतनी गहरी नहीं हैं जितनी वे दावा करते हैं। 'विकास निधि की कमी' का तर्क सुनने में तार्किक लगता है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि यही समस्या अचानक एक साथ 6 सांसदों को क्यों प्रभावित करने लगी। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में वादा की गई रेलवे परियोजनाएँ और विकास कार्य वाकई पूरे होते हैं — या यह बदलाव सिर्फ सत्ता की सीढ़ी साबित होता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) के कितने सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए और कौन हैं?
कुल 6 लोकसभा सांसद 23 जून 2025 को शिंदे गुट में शामिल हुए — ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है?
'ऑपरेशन टाइगर' एकनाथ शिंदे के गुट द्वारा चलाई गई वह रणनीतिक कार्रवाई है जिसके तहत शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसदों को एक साथ शिंदे खेमे में शामिल कराया गया। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के गुट को संसदीय स्तर पर कमज़ोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
संजय देशमुख ने पार्टी छोड़ने का क्या कारण बताया?
संजय देशमुख ने कहा कि विकास कार्यों के लिए धन की कमी मुख्य कारण रही और यह निर्णय 6 सांसदों ने मिलकर सामूहिक रूप से लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम संविधान और कानून के दायरे में उठाया गया है।
अंजली दमानिया ने क्या आरोप लगाए और देशमुख ने क्या जवाब दिया?
सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने सांसद विकास निधि के उपयोग पर सवाल उठाए थे। देशमुख ने इन आरोपों को 'तथ्यहीन' बताते हुए कहा कि दमानिया को विकास कार्यों की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है और सभी कार्य पोर्टल पर दर्ज हैं।
इस राजनीतिक बदलाव का उद्धव ठाकरे की पार्टी पर क्या असर पड़ेगा?
6 सांसदों के जाने से शिवसेना (यूबीटी) की लोकसभा में संख्या बल घट जाएगा, जिससे पार्टी की संसदीय ताकत कमज़ोर होगी। उद्धव ठाकरे का अगला कदम — अनुशासनात्मक कार्रवाई या कानूनी चुनौती — आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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