शिवसेना (यूबीटी) छोड़ शिंदे गुट में शामिल सांसद संजय देशमुख बोले — उद्धव पर कोई टिप्पणी नहीं, विकास ही लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसद सोमवार, 23 जून 2025 को औपचारिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए। इन बागी सांसदों में यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय उत्तमराव देशमुख भी शामिल हैं, जिन्होंने गुट-परिवर्तन के बाद पत्रकारों से पहली बार मुखर होकर अपना पक्ष रखा।
देशमुख ने क्यों छोड़ी पार्टी
संजय देशमुख ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'आम जनता ने हमें चुना है। विकास कार्यों के दौरान धन की कमी का सवाल उठा, इसलिए सभी सांसदों ने एक साथ बैठकर सामूहिक निर्णय लिया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल अकेले उनकी नहीं, बल्कि 6 सांसदों का साझा फैसला था।
देशमुख ने यह भी जोड़ा कि यह निर्णय 'संविधान के दायरे में' लिया गया है और सभी सांसदों ने 'कानून के दायरे में रहते हुए' यह कदम उठाया है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद से ही शिवसेना के दोनों गुटों के बीच खींचतान जारी है।
उद्धव ठाकरे पर चुप्पी, विकास पर ज़ोर
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर देशमुख ने संयम बरतते हुए कहा, 'मैं उद्धव के बारे में कुछ नहीं कहूंगा। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आएंगे, लोगों से मिलेंगे, अपनी भूमिका बताएंगे — और हम अपनी भूमिका बताएंगे।' उन्होंने संकेत दिया कि जनता को दोनों पक्षों का आकलन खुद करने देना चाहिए।
देशमुख ने अपने क्षेत्र की विकास परियोजनाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यवतमाल जिला किसान आत्महत्याओं से जूझ रहा है और वाशिम एक 'आकांक्षी जिला' है। वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेलवे परियोजना और शकुंतला ब्रॉड गेज रेलवे को पूरा करना उनकी प्राथमिकता बताई।
अंजली दमानिया के आरोपों का खंडन
सांसद निधि के कथित दुरुपयोग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया की आलोचना पर देशमुख ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'सांसद विकास निधि के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें तथ्य नहीं है; दमानिया को इसकी जानकारी नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि हर विकास कार्य का अनुमान पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है और तकनीकी कारणों से पोर्टल कभी-कभी बंद हो जाता है — इसमें कोई अनियमितता नहीं है।
'ऑपरेशन टाइगर' — शिंदे गुट की बड़ी सियासी चाल
शिंदे गुट ने इस पूरी कार्रवाई को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया है। सोमवार को एक साथ 6 यूबीटी सांसदों का शिंदे खेमे में विलय महाराष्ट्र की राजनीति में एक सुनियोजित रणनीतिक कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे ने खुद शिवसेना में बगावत कर सरकार बनाई थी — और अब उद्धव गुट के भीतर से ही इसी पैटर्न की पुनरावृत्ति देखी जा रही है।
बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।
आगे क्या होगा
इस विलय के बाद शिवसेना (यूबीटी) की संसद में स्थिति कमज़ोर पड़ सकती है। उद्धव ठाकरे का अगला कदम — चाहे वह अनुशासनात्मक कार्रवाई हो या न्यायिक चुनौती — महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेगा। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले हफ्तों में और भी उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।