आदित्य ठाकरे का एकनाथ शिंदे पर हमला — 'जवाबदेही से भागते हैं डिप्टी सीएम', यूबीटी में 6 सांसदों की बगावत के बीच विधानसभा में तीखी जंग
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार, 23 जून को सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखे प्रहार किए। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया जब यूबीटी गुट भारी राजनीतिक संकट में है — उसके 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं।
विधानसभा में आरोप-प्रत्यारोप
सदन की कार्यवाही के दौरान आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम शिंदे जानबूझकर विपक्ष के सवालों से मुँह चुराते हैं और अपने विभागों से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देने की ज़िम्मेदारी अन्य मंत्रियों पर थोप देते हैं। उन्होंने शिंदे पर जवाबदेही से बचने का सीधा आरोप मढ़ा।
सदन के बाहर आदित्य ने शिंदे को 'फेक-नाथ मिंधे' (नकली शिंदे) की संज्ञा दी और दावा किया कि डिप्टी सीएम 'जवाब देने से डरते हैं।' उन्होंने अपनी बात को धार देने के लिए शिंदे के बोलने के अंदाज़ की भी नकल उतारी।
विपक्ष के वॉकआउट पर विधानसभा अध्यक्ष का जवाब
जब विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन से वॉकआउट किया, तब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि 2019-2020 में भी ऐसी ही व्यवस्था अमल में थी। आदित्य ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के कार्यकाल में किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री ने सवालों से बचने के ऐसे 'रास्ते' नहीं अपनाए थे।
शिंदे का पलटवार — मराठी गाने से तंज
एकनाथ शिंदे ने भी सदन में जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने आदित्य के राजनीतिक पतन पर तंज कसते हुए एक लोकप्रिय मराठी गाने की पंक्तियाँ उद्धृत कीं — 'तुम कौन थे, और क्या बन गए हो... अरे दीवाने, तुम पूरी तरह बर्बाद हो गए हो।'
शिंदे ने जयंत पाटिल जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं पर भी व्यंग्य किया और मज़ाकिया लहजे में पूछा कि अनुभवी राजनेता 'बच्चों' (पोरा-टोरा) के निर्देशों का आँख मूँदकर पालन क्यों कर रहे हैं — यह इशारा फ्लोर रणनीति में आदित्य की भूमिका की ओर था।
यूबीटी में बगावत पर आदित्य का एक्स पोस्ट
विधानसभा की बहस से इतर, आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ा सार्वजनिक बयान जारी किया। उन्होंने इन नेताओं पर 'लालच में आकर बेशर्मी से अपनी वफादारी और प्रतिष्ठा बेचने' का आरोप लगाया।
आदित्य का तर्क था कि ये 6 सांसद अपनी सीटें इसलिए जीते क्योंकि मतदाताओं ने एनडीए के विरुद्ध एमवीए के मंच को चुना था। उन्होंने रातोंरात पाला बदलने को जनता के जनादेश के साथ 'सरासर धोखा' बताया।
आगे क्या होगा
यूबीटी के भीतर इस बगावत और विधानसभा में बढ़ते टकराव के बाद महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति की दिशा निर्णायक मोड़ पर है। गौरतलब है कि मानसून सत्र अभी जारी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है।