सिद्धिविनायक मंदिर चोरी विवाद: शिवसेना-यूबीटी ने एकनाथ शिंदे को 'गद्दार' और 'भगोड़ा' बताया
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर के दान में कथित गबन को लेकर छिड़े राजनीतिक संग्राम में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) समेत विपक्षी दलों ने शनिवार, 11 जुलाई को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं ने शिंदे को 'गद्दार' और 'भगोड़ा' जैसे कड़े शब्दों से नवाज़ा। यह प्रतिक्रिया शिंदे द्वारा एक दिन पहले शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर सिद्धिविनायक मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाने के बाद आई।
सावंत का शिंदे पर सीधा हमला
शिवसेना-यूबीटी सांसद अरविंद सावंत ने उद्धव ठाकरे को भगवान राम का अनन्य भक्त बताते हुए शिंदे से सवाल किया कि यदि उन्हें हिंदुत्व के प्रति इतनी गहरी आस्था थी, तो वे ठाकरे के साथ ढाई वर्षों तक सत्ता में क्यों रहे। सावंत ने आरोप लगाया कि शिंदे ईडी के भय से पलायन कर गए और उन्हें 'कायर' व 'देशद्रोही' करार दिया।
सावंत ने तंज़ कसते हुए कहा कि जिसने एक 'संत' जैसे व्यक्ति को 'चाकू मारा और भाग गया', ऐसे व्यक्ति को हिंदुत्व की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी 2022 के राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में आई है, जब शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर सरकार बनाई थी।
राउत का ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप
शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत ने मीडिया को संबोधित करते हुए सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की तुलना राम मंदिर ट्रस्ट से की। राउत ने दावा किया कि पूर्व में ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा के अनेक कार्य हुए, लेकिन अब ट्रस्ट में 'भ्रष्ट लोग' भरे पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि विपक्ष उन्हें वहाँ से 'चोरी' नहीं करने दे रहा।
एमएनएस की जाँच की माँग
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के नेता यशवंत किल्लेदार ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। हालाँकि, उन्होंने संशय भी जताया कि सरकार ऐसा करेगी, क्योंकि उनके अनुसार 'पूरा सिस्टम' सत्तापक्ष के नियंत्रण में है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब उभरा जब उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर सिद्धिविनायक मंदिर में दान की गई धनराशि के कथित गबन पर मौन रहने का आरोप लगाया और साथ ही राम मंदिर, अयोध्या के चढ़ावा प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार का बचाव किया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को लेकर तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कथित गबन मामले में किसी औपचारिक जाँच की घोषणा नहीं हुई है। एमएनएस की माँग और विपक्ष के दबाव के बीच यह देखना अहम होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस मसले पर क्या रुख अपनाती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है।