28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'वफादारी हवाई यात्रा से बड़ी होती है, 2019 में धोखा हुआ था'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'वफादारी हवाई यात्रा से बड़ी होती है, 2019 में धोखा हुआ था'

सारांश

मुंबई-नागपुर फ्लाइट में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की आकस्मिक मुलाकात ने महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला दिया। एकनाथ शिंदे ने पलटवार करते हुए 2019 के 'धोखे' की याद दिलाई और 'ऑपरेशन टाइगर' के बाद ठाकरे के 'नुकसान की भरपाई' दौरों को 'बारात के बाद पहुँचना' करार दिया।

मुख्य बातें

26 जून की शाम मुंबई-नागपुर उड़ान में उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच आकस्मिक मुलाकात हुई; सूत्रों के अनुसार यह संयोग था।
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि उड़ान में 'उच्च स्तरीय चर्चा' हुई और विवरण जल्द सार्वजनिक होगा।
एकनाथ शिंदे ने ठाकरे के दावों को खारिज करते हुए कहा, 'वफादारी हवाई यात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है' और 2019 के विश्वासघात का आरोप दोहराया।
'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए हैं।
शिंदे ने ठाकरे के निर्वाचन क्षेत्र दौरों को 'बारात खत्म होने के बाद पहुँचना' बताकर व्यंग्य किया।

शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने 27 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि 'वफादारी और ईमानदारी एक हवाई यात्रा से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।' यह प्रतिक्रिया उस राजनीतिक विवाद के बीच आई जो 26 जून की शाम मुंबई से नागपुर जाने वाली 6:30 बजे की उड़ान में ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई आकस्मिक मुलाकात को लेकर छिड़ा है।

मुलाकात और ठाकरे का दावा

सूत्रों के अनुसार, मुंबई-नागपुर उड़ान में हुई यह मुलाकात महज एक संयोग थी। हालांकि, ठाकरे ने इसे कम महत्व देने की बजाय दावा किया कि उड़ान के दौरान एक 'उच्च स्तरीय चर्चा' हुई और इसका विवरण जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। इस दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी।

शिंदे की तीखी प्रतिक्रिया

शिंदे ने ठाकरे के बयानों को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'वफादारी एक हवाई यात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।' उन्होंने 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ठाकरे ने उस समय विश्वासघात किया था। शिंदे का कहना था कि महाराष्ट्र की जनता ने ठाकरे को भारतीय जनता पार्टी (BJP)-सेना गठबंधन के साथ यात्रा का जनादेश दिया था, लेकिन उन्होंने 'डूबते हुए कांग्रेस के जहाज' पर सवार होना चुना।

शिंदे ने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा, 'अब जब वे खुद डूब रहे हैं, तो ऐसे बयानों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि एक 'धोखेबाज दोस्त' कितना खतरनाक हो सकता है।

'ऑपरेशन टाइगर' और नुकसान की भरपाई के दौरे पर कटाक्ष

शिंदे ने ठाकरे के उन छह सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में चल रहे दौरों पर भी निशाना साधा, जो हाल ही में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिंदे गुट में शामिल हुए थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ठाकरे 'बारात खत्म होने के काफी देर बाद पहुँचे और निर्वाचन क्षेत्रों में तब पहुँचे जब सभी लोग जा चुके थे।' उन्होंने यह भी व्यंग्यपूर्वक कहा कि उन्होंने ही इन नेताओं को काम पर लगाया था और उनसे जनसभाएं करवाई थीं।

अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए शिंदे ने हिंदी कहावत का सहारा लिया: 'जो हौद से गई, वो बूंद से नहीं आती' — अर्थात जो एक साथ बहुत कुछ खो दिया, वह बूंद-बूंद से वापस नहीं आता।

महाराष्ट्र की राजनीति में असर

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों का शिंदे गुट में शामिल होना ठाकरे खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 में शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद से दोनों गुटों के बीच कड़वाहट लगातार बनी हुई है।

आगे क्या

ठाकरे ने संकेत दिया है कि फडणवीस के साथ हुई 'उच्च स्तरीय चर्चा' का विवरण जल्द सामने आएगा, जिससे यह विवाद और गहरा हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में दोनों गुटों के बीच जनता में अपनी छवि बनाने की होड़ का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता के बाद इसमें नई धार आ गई है। असली सवाल यह है कि ठाकरे जिस 'उच्च स्तरीय चर्चा' का दावा कर रहे हैं, उसका विवरण सामने आता है या नहीं — क्योंकि अगर आया, तो महायुति के भीतर भी असहजता पैदा हो सकती है। दोनों गुटों की यह नोकझोंक आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले जनमत को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश भी हो सकती है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई-नागपुर फ्लाइट में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात क्या थी?
26 जून 2026 की शाम 6:30 बजे मुंबई से नागपुर जाने वाली उड़ान में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आकस्मिक मुलाकात हुई। सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात महज संयोग थी, हालांकि ठाकरे ने इसे 'उच्च स्तरीय चर्चा' बताया।
एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर क्या आरोप लगाए?
शिंदे ने कहा कि ठाकरे ने 2019 में विश्वासघात किया था और महाराष्ट्र की जनता का जनादेश BJP-सेना गठबंधन के साथ था, जिसे ठाकरे ने नकार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वफादारी और ईमानदारी एक हवाई यात्रा से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और इसका शिवसेना (यूबीटी) पर क्या असर पड़ा?
'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए हैं, जिसे ठाकरे खेमे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। शिंदे ने ठाकरे के इन निर्वाचन क्षेत्रों में चल रहे 'नुकसान की भरपाई' दौरों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि वे 'बारात खत्म होने के काफी देर बाद पहुँचे।'
इस विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महायुति गठबंधन और महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच तनाव पहले से चरम पर है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों गुट जनमत को प्रभावित करने की कोशिश में हैं।
शिंदे ने किस कहावत का इस्तेमाल किया और उसका क्या अर्थ है?
शिंदे ने हिंदी कहावत 'जो हौद से गई, वो बूंद से नहीं आती' का प्रयोग किया, जिसका अर्थ है कि जो एक साथ बहुत कुछ खो दिया, वह बूंद-बूंद करके वापस नहीं आता। इसके ज़रिए उन्होंने ठाकरे के 'नुकसान की भरपाई' दौरों को निरर्थक बताने की कोशिश की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. कल
  4. 4 दिन पहले
  5. 5 दिन पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले