एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'वफादारी हवाई यात्रा से बड़ी होती है, 2019 में धोखा हुआ था'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने 27 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि 'वफादारी और ईमानदारी एक हवाई यात्रा से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।' यह प्रतिक्रिया उस राजनीतिक विवाद के बीच आई जो 26 जून की शाम मुंबई से नागपुर जाने वाली 6:30 बजे की उड़ान में ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई आकस्मिक मुलाकात को लेकर छिड़ा है।
मुलाकात और ठाकरे का दावा
सूत्रों के अनुसार, मुंबई-नागपुर उड़ान में हुई यह मुलाकात महज एक संयोग थी। हालांकि, ठाकरे ने इसे कम महत्व देने की बजाय दावा किया कि उड़ान के दौरान एक 'उच्च स्तरीय चर्चा' हुई और इसका विवरण जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। इस दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी।
शिंदे की तीखी प्रतिक्रिया
शिंदे ने ठाकरे के बयानों को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'वफादारी एक हवाई यात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।' उन्होंने 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ठाकरे ने उस समय विश्वासघात किया था। शिंदे का कहना था कि महाराष्ट्र की जनता ने ठाकरे को भारतीय जनता पार्टी (BJP)-सेना गठबंधन के साथ यात्रा का जनादेश दिया था, लेकिन उन्होंने 'डूबते हुए कांग्रेस के जहाज' पर सवार होना चुना।
शिंदे ने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा, 'अब जब वे खुद डूब रहे हैं, तो ऐसे बयानों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि एक 'धोखेबाज दोस्त' कितना खतरनाक हो सकता है।
'ऑपरेशन टाइगर' और नुकसान की भरपाई के दौरे पर कटाक्ष
शिंदे ने ठाकरे के उन छह सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में चल रहे दौरों पर भी निशाना साधा, जो हाल ही में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिंदे गुट में शामिल हुए थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ठाकरे 'बारात खत्म होने के काफी देर बाद पहुँचे और निर्वाचन क्षेत्रों में तब पहुँचे जब सभी लोग जा चुके थे।' उन्होंने यह भी व्यंग्यपूर्वक कहा कि उन्होंने ही इन नेताओं को काम पर लगाया था और उनसे जनसभाएं करवाई थीं।
अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए शिंदे ने हिंदी कहावत का सहारा लिया: 'जो हौद से गई, वो बूंद से नहीं आती' — अर्थात जो एक साथ बहुत कुछ खो दिया, वह बूंद-बूंद से वापस नहीं आता।
महाराष्ट्र की राजनीति में असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों का शिंदे गुट में शामिल होना ठाकरे खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 में शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद से दोनों गुटों के बीच कड़वाहट लगातार बनी हुई है।
आगे क्या
ठाकरे ने संकेत दिया है कि फडणवीस के साथ हुई 'उच्च स्तरीय चर्चा' का विवरण जल्द सामने आएगा, जिससे यह विवाद और गहरा हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में दोनों गुटों के बीच जनता में अपनी छवि बनाने की होड़ का हिस्सा है।