12 अगस्त 2026
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लोकसभा सीटें 543 पर फ्रीज हों, वरना चीनी संसद जैसी हो जाएगी: चिदंबरम का परिसीमन पर कड़ा रुख

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लोकसभा सीटें 543 पर फ्रीज हों, वरना चीनी संसद जैसी हो जाएगी: चिदंबरम का परिसीमन पर कड़ा रुख

सारांश

चिदंबरम ने लोकसभा सीटें 543 पर फ्रीज रखने की माँग करते हुए कहा कि परिवार नियोजन अपनाने वाले दक्षिणी राज्यों को सजा नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही रांची में JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन 19वें दिन भी जारी रहा।

मुख्य बातें

चिदंबरम ने 12 अगस्त को माँग की कि लोकसभा सीटें 543 पर ही स्थिर रखी जाएँ।
उन्होंने चेतावनी दी कि सीटें बढ़ाने पर यह सदन 'चीन की संसद' जैसा अव्यावहारिक बन जाएगा।
तमिलनाडु का मौजूदा हिस्सा 7.18 फीसदी है; चिदंबरम ने सभी दक्षिणी राज्यों के कोटे को फ्रीज करने की माँग की।
उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन लागू करने वाले राज्यों को परिसीमन के ज़रिये दंडित नहीं किया जा सकता।
झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ रांची में छात्र आंदोलन 19वें दिन भी जारी रहा।
बाबूलाल मरांडी ने प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर छात्रों से मुलाकात की।

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि लोकसभा की सीटें 543 पर ही स्थिर रखी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीटें बढ़ाई गईं तो यह सदन 'चीन की संसद' जैसा विशाल और अव्यावहारिक ढाँचा बन जाएगा।

चिदंबरम का मुख्य तर्क

चिदंबरम ने कहा, 'लोकसभा को 543 पर फ्रीज किया जाना चाहिए। वरना यह चीन की संसद जैसी हो जाएगी — यह सदन नहीं, एक सार्वजनिक सभा बन जाएगी।' उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा हिस्सा 7.18 फीसदी है और इसे बरकरार रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तमिलनाडु समेत सभी दक्षिण भारतीय राज्यों का कोटा भी फ्रीज होना चाहिए।

परिवार नियोजन को दंड नहीं

चिदंबरम ने तीखे शब्दों में कहा कि जिन राज्यों ने 'ईमानदारी और सर्वसम्मति से परिवार नियोजन कार्यक्रम लागू किया है, उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।' उनका आरोप है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय है, क्योंकि इन राज्यों ने दशकों पहले जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन की संवैधानिक समय-सीमा और नई जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।

परिसीमन विधेयक की ज़रूरत नहीं: चिदंबरम

कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि 'उस परिसीमन विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं है।' उन्होंने जोड़ा कि राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को घटाया नहीं जाना चाहिए। गौरतलब है कि परिसीमन का मुद्दा उत्तर-दक्षिण राजनीतिक विभाजन की एक बड़ी रेखा बनता जा रहा है, जिसमें तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य सीट-कटौती की आशंका से चिंतित हैं।

झारखंड पुलिस कार्रवाई पर निंदा

चिदंबरम ने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की। उन्होंने कहा, 'पुलिस और उनके राजनीतिक आकाओं पर शर्म आती है।' उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना की है।

रांची में छात्र आंदोलन जारी

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची में छात्रों का प्रदर्शन बुधवार को लगातार 19वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उम्मीदवार लंबे समय से समस्याओं का सामना कर रहे हैं और विरोध स्थल पर ठहरे छात्रों की सेहत बिगड़ रही है। बाबूलाल मरांडी ने भी सुबह प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर छात्रों से मुलाकात की और मीडिया के सामने उनकी स्थिति पर बात की। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल संवैधानिक है — क्या जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व का सिद्धांत उन राज्यों को वाकई नुकसान पहुँचाता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी भूमिका निभाई? दक्षिणी राज्यों की यह चिंता नई नहीं है, लेकिन इसे अब तक केंद्र सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं मिला है। परिसीमन की बहस को केवल उत्तर बनाम दक्षिण के चश्मे से देखना खतरनाक सरलीकरण है — इसमें शहरी-ग्रामीण असंतुलन और प्रवासन जैसे जटिल पहलू भी हैं जिन्हें मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिदंबरम ने लोकसभा सीटें 543 पर फ्रीज करने की माँग क्यों की?
चिदंबरम का तर्क है कि सीटें बढ़ाने से लोकसभा 'चीन की संसद' जैसी विशाल और अव्यावहारिक सभा बन जाएगी। उनका मानना है कि दक्षिणी राज्यों ने परिवार नियोजन ईमानदारी से लागू किया, इसलिए उन्हें जनसंख्या-आधारित परिसीमन के ज़रिये दंडित करना अनुचित है।
परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों को क्या नुकसान हो सकता है?
जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें घट सकती हैं, क्योंकि इन राज्यों की जनसंख्या वृद्धि दर उत्तर भारतीय राज्यों की तुलना में कम रही है। चिदंबरम के अनुसार तमिलनाडु का मौजूदा हिस्सा 7.18 फीसदी है, जिसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
परिसीमन विधेयक क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
परिसीमन विधेयक लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं व संख्या को नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। विवाद इसलिए है क्योंकि जनसंख्या-आधारित पुनर्वितरण से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने की आशंका है, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं।
झारखंड में छात्र किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची में छात्र 19 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उम्मीदवार लंबे समय से समस्याओं का सामना कर रहे हैं और विरोध स्थल पर ठहरे छात्रों की सेहत बिगड़ रही है।
बाबूलाल मरांडी का झारखंड छात्र आंदोलन से क्या संबंध है?
बाबूलाल मरांडी बुधवार सुबह रांची में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने मीडिया के सामने छात्रों की स्थिति पर बात की, जिससे आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिला।
राष्ट्र प्रेस
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