परिसीमन प्रतिनिधित्व नहीं, वोटों के लिए हो रहा है — कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का BJP पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 2 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि चुनावी वोटों की गणना के नजरिए से कर रही है। यह बयान नई दिल्ली में उस समय आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सभी दलों से संसद में परिसीमन विधेयक को विफल करने का आह्वान किया था।
राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस एकजुट
राहुल गांधी ने शनिवार को सभी विपक्षी दलों से अपील की थी कि वे केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक को संसद में पारित न होने दें। इस पर सुखदेव भगत ने कहा, "निश्चित रूप से, जिस तरह से जनसंख्या के हिसाब से चीजें संतुलित नहीं हो रही हैं और अगर मैं अपनी निजी राय बताऊं तो मैं परिसीमन के खिलाफ हूं।" उन्होंने असम का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ BJP सरकार ने परिसीमन को प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि वोट बैंक की दृष्टि से अंजाम दिया है।
संसदीय गरिमा और संख्याबल पर सवाल
भगत ने संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "अगर हम आज संसद में मौजूद 543 सदस्यों को देखें, तो मुझे लगता है कि हमारे कई लोगों को पूरी तरह से भागीदारी का मौका भी नहीं मिलता।" उनका तर्क था कि संख्याबल बढ़ाने की बजाय संसद की गरिमा के अनुरूप सार्थक चर्चा और बहस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
NEET पेपर लीक मामले में जज के तबादले पर चिंता
NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई कर रहे दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तबादले पर भगत ने कहा, "ऐसे कदमों से हमेशा अविश्वास और शक पैदा होता है।" यह टिप्पणी न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर विपक्ष की व्यापक चिंताओं का हिस्सा है।
कुलगाम हमले पर सुरक्षा की जिम्मेदारी
कुलगाम हमले के संदर्भ में भगत ने कहा कि पहलगाम की घटना के बाद भी इस तरह की घटनाएँ होना सामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा के दौरान ऐसी स्थिति में राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे चूक की पहचान करें। उनके शब्दों में, "आरोप-प्रत्यारोप से अधिक जरूरी नागरिकों की सुरक्षा है।" परिसीमन विवाद आने वाले सत्र में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तनाव का केंद्र बना रहेगा।