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परिसीमन से सीमावर्ती राज्यों को नुकसान का खतरा, मनीष तिवारी ने माँगी गंभीर समीक्षा

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परिसीमन से सीमावर्ती राज्यों को नुकसान का खतरा, मनीष तिवारी ने माँगी गंभीर समीक्षा

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चेतावनी दी है कि परिसीमन विधेयक 2026 सीमावर्ती राज्यों का प्रतिनिधित्व घटाकर मध्य भारत को अनुचित राजनीतिक बढ़त दे सकता है। साथ ही उन्होंने माँग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन का इंतज़ार किए बिना मौजूदा 543 सीटों पर ही लागू किया जाए।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 9 अगस्त को चंडीगढ़ में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया।
उनके अनुसार परिसीमन से उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्यों को नुकसान और केवल मध्य भारत को लाभ मिलेगा।
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक, 2026 का लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा सीटों की संख्या और बंटवारे में बदलाव करना है।
तिवारी ने माँग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर मौजूदा 543 सीटों पर ही लागू किया जाए।
उन्होंने नीट पेपर लीक को भारत की शिक्षा प्रणाली की विफलता का प्रमाण बताते हुए पूर्ण शैक्षिक सुधार की माँग की।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने रविवार, 9 अगस्त को चंडीगढ़ में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के उन राज्यों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है जिनकी सीमाएँ अंतरराष्ट्रीय सरहदों से सटी हैं। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से केवल मध्य भारत को अनुचित राजनीतिक लाभ मिल सकता है, जबकि सीमावर्ती राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कमज़ोर पड़ सकता है।

मुख्य आपत्तियाँ और तर्क

तिवारी ने कहा, "असल बात यह है कि जब मैंने अप्रैल में लोकसभा में परिसीमन बिल पर बहस की थी, तब भी कहा था कि इस परिसीमन से उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत को नुकसान होगा। अगर इस परिसीमन से किसी को फायदा होगा, तो वह सिर्फ मध्य भारत को होगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो राज्य सीमा पर हैं या उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में हैं, उनके हित में यह परिसीमन नहीं है और इस पर बहुत गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है।

कांग्रेस सांसद ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन पर पड़ने वाले व्यापक असर को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले सीमावर्ती राज्यों की आपत्तियों को प्राथमिकता के साथ सुना जाना चाहिए।

परिसीमन और महिला आरक्षण का संबंध

यह विवाद संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक, 2026 को लेकर नए सिरे से उठी राजनीतिक बहस के बीच आया है। इन विधेयकों का उद्देश्य महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 से जुड़े प्रावधानों में संशोधन करना और 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा की सीटों की संख्या तथा उनके बंटवारे में बदलाव करना है। गौरतलब है कि अप्रैल में बजट सत्र के दौरान यह अधिनियम लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था।

तिवारी ने तर्क दिया कि सरकार को महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण की बात कर रही है, तो इसे मौजूदा सीटों पर लागू क्यों नहीं किया जाता? इन 543 सीटों में से एक-तिहाई आरक्षण महिलाओं को क्यों नहीं दिया जाता? कांग्रेस पार्टी ही महिलाओं के लिए आरक्षण बिल लेकर आई थी और अगर वे सच में इसे लागू करना चाहते हैं, तो इन 543 सीटों पर ही इसे लागू करें।"

शिक्षा तंत्र पर निशाना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद धर्मेंद्र प्रधान के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने देश में हुए बड़े छात्र आंदोलन और नीट पेपर लीक प्रकरण का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "नीट पेपर लीक इस बात का सबूत बन गया कि भारत का शिक्षा तंत्र पूरी तरह से बेबस हो गया है।" उनका कहना था कि देश में शिक्षा के नाम पर केवल कागजी डिग्रियाँ दी जा रही हैं जो रोज़गार दिलाने में नाकाम हैं, और इसीलिए पूरी शिक्षा प्रणाली पर नए नज़रिए से सोचने की ज़रूरत है।

आगे क्या

परिसीमन विधेयक पर संसद में बहस आगामी सत्र में जारी रहने की संभावना है। विपक्षी दलों — विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों — का विरोध इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाए रखेगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती राज्यों की चिंताओं को किस हद तक समायोजित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया, वे पहले से ही सीट-कटौती के डर से परिसीमन का विरोध कर रहे हैं। अब सीमावर्ती राज्यों की चिंता जुड़ने से यह बहस और जटिल हो गई है। महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की शर्त सरकार के लिए एक राजनीतिक ढाल बन गई है — और तिवारी का यह सवाल कि 543 सीटों पर अभी क्यों नहीं, इस ढाल को सीधे चुनौती देता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन विधेयक 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
परिसीमन विधेयक 2026 एक प्रस्तावित कानून है जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाना और उनके भौगोलिक बंटवारे में बदलाव करना है। यह संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक के साथ मिलकर महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों को भी प्रभावित करता है।
मनीष तिवारी ने परिसीमन का विरोध क्यों किया?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि प्रस्तावित परिसीमन से उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घटेगा, जबकि मध्य भारत को अनुचित राजनीतिक लाभ मिलेगा। उनके अनुसार यह संघीय संतुलन के लिए खतरनाक है।
महिला आरक्षण और परिसीमन का क्या संबंध है?
सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू करने से जोड़ा है। तिवारी ने इस शर्त को अनावश्यक बताते हुए माँग की है कि एक-तिहाई महिला आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही तत्काल लागू किया जाए।
किन राज्यों को परिसीमन से सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका है?
तिवारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के राज्य सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। दक्षिण भारत के राज्य भी पहले से जनसंख्या-आधारित सीट बंटवारे को लेकर आपत्ति जता रहे हैं।
नीट पेपर लीक और परिसीमन बहस का क्या संबंध है?
मनीष तिवारी ने परिसीमन चर्चा के साथ-साथ नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह भारत की शिक्षा प्रणाली की गहरी विफलता का प्रमाण है। उन्होंने BJP सांसद धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के कार्यकाल पर सवाल उठाए और देश की पूरी शिक्षा नीति पर नए सिरे से विचार करने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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