लोकसभा परिसीमन पर चिदंबरम का स्पष्ट रुख: 543 सीटें और तमिलनाडु की 39 सीटें यथावत रहें
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने 21 अगस्त 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लोकसभा परिसीमन पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा की 543 सीटें और तमिलनाडु की 39 संसदीय सीटें यथावत रहनी चाहिए और इस मौजूदा ढाँचे को 25 वर्षों तक बनाए रखा जाए।
चिदंबरम का एक्स पर बयान
चिदंबरम ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'लोकसभा की कुल 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 संसदीय सीटों में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी का रुख है कि इन मौजूदा आँकड़ों को 25 साल तक बढ़ाया जाए।' उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस रुख का समर्थन तमिलनाडु की सत्ताधारी और मुख्य विपक्षी — दोनों पार्टियाँ कर रही हैं, जो इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति का संकेत है।
तमिलनाडु सरकार का प्रस्ताव
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से माँग की है कि लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या 543 पर ही स्थायी रूप से बनाए रखी जाए। इसके साथ ही राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का मौजूदा अनुपात भी अपरिवर्तित रहे। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जनसंख्या और राज्यों के बीच मौजूदा अनुपात को बनाए रखा जाए और महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने से पहले ही मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए।
संविधान संशोधन विधेयक का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 को 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक में लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने और 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को शीघ्र लागू करने का प्रावधान था। हालाँकि, यह विधेयक पारित नहीं हो सका क्योंकि इसे संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के संवैधानिक रूप से आवश्यक दो-तिहाई विशेष बहुमत का समर्थन नहीं मिला।
तमिलनाडु की विधायी संरचना
तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं — जिनमें 189 सामान्य और 45 आरक्षित सीटें शामिल हैं। लोकसभा में राज्य की 39 सीटें हैं। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन की आशंका दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है और उन्हें डर है कि जनसंख्या-आधारित पुनर्वितरण से उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है।
आगे की राह
कांग्रेस वर्किंग कमेटी का प्रस्ताव, तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव और चिदंबरम की एक्स पोस्ट — तीनों एक ही दिशा में इशारा करते हैं। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार परिसीमन की प्रक्रिया में इन माँगों को किस तरह संज्ञान में लेती है और अन्य राज्य सरकारें इस बहस में क्या रुख अपनाती हैं।