28 अगस्त 2026
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लोकसभा सीटें 25 साल और फ्रीज करना लोकतंत्र विरोधी: दलजीत चीमा ने कांग्रेस प्रस्ताव को बताया अतार्किक

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लोकसभा सीटें 25 साल और फ्रीज करना लोकतंत्र विरोधी: दलजीत चीमा ने कांग्रेस प्रस्ताव को बताया अतार्किक

सारांश

कांग्रेस के लोकसभा सीटें 25 साल और फ्रीज रखने के प्रस्ताव पर शिरोमणि अकाली दल के दलजीत सिंह चीमा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र विरोधी बताते हुए सभी राज्यों की सीटें समान रूप से 50% बढ़ाने का विकल्प सुझाया — जो संघीय संतुलन और युवा प्रतिनिधित्व दोनों की रक्षा करे।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने 28 अगस्त 2026 को कांग्रेस के लोकसभा सीट फ्रीज प्रस्ताव को अतार्किक और लोकतंत्र विरोधी बताया।
लोकसभा सीटें 1971 से फ्रीज हैं; तब जनसंख्या 54.8 करोड़ थी, अब लगभग 140 करोड़ है।
चीमा ने चेतावनी दी कि 25 साल और फ्रीज रहने से संकट गहराएगा और पंजाब व दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा।
उन्होंने सुझाया कि सभी राज्यों की सीटें समान रूप से 50% बढ़ाई जाएँ, फिर परिसीमन किया जाए।
चीमा के अनुसार, सीटें न बढ़ाना युवा नेतृत्व के राजनीतिक अवसर सीमित करना है।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने 28 अगस्त 2026 को कांग्रेस के उस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की, जिसमें लोकसभा सीटों को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज रखने की बात कही गई है। चीमा ने इस प्रस्ताव को न केवल गलत और अतार्किक, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मूल भावना के विरुद्ध बताया।

मौजूदा स्थिति: 55 साल से जमी हुई व्यवस्था

चीमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में तथ्यों के साथ तर्क रखा। उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटें पहले से ही लगभग 55 वर्षों से फ्रीज हैं। 1971 में जब सीटें फ्रीज की गई थीं, तब देश की जनसंख्या मात्र 54.8 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 140 करोड़ हो चुकी है। इस असंतुलन के चलते संसदीय क्षेत्र इतने विशाल हो गए हैं कि प्रभावी जन-प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना कठिन होता जा रहा है।

25 साल और फ्रीज रहा तो संकट गहराएगा

चीमा ने आगाह किया कि यदि कांग्रेस के प्रस्ताव के अनुसार सीटें 25 वर्षों तक और फ्रीज रखी गईं, तो यह संकट और अधिक गंभीर हो जाएगा। उनके अनुसार, बढ़ती जनसंख्या और स्थिर सीट-संख्या के बीच की खाई चुनावी प्रतिनिधित्व को और कमज़ोर करेगी।

संघीय संतुलन पर खतरा: दक्षिण और पंजाब को नुकसान

चीमा ने परिसीमन के संभावित दुष्परिणामों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद पंजाब और दक्षिण भारत के उन राज्यों की सीटें घट सकती हैं जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, जबकि मध्य और उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी। उनके अनुसार, यह असंतुलन देश के संघीय ढाँचे के लिए गंभीर खतरा है।

युवा नेतृत्व के रास्ते बंद होने की चिंता

चीमा ने यह भी कहा कि सीटों को कृत्रिम रूप से सीमित रखने से युवा पीढ़ी के लिए राजनीतिक अवसर भी संकुचित हो जाएंगे। उनके शब्दों में, एक और पीढ़ी तक सीटों की संख्या रोकना युवा नेतृत्व के रास्ते बंद करने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि भारत को युवा नेतृत्व के लिए अधिक दरवाज़े खोलने चाहिए, न कि बंद करने चाहिए।

समाधान: सभी राज्यों की सीटें समान रूप से 50% बढ़ाई जाएँ

चीमा ने इस जटिल मुद्दे का एक संतुलित हल भी सुझाया। उनका प्रस्ताव है कि लोकसभा की कुल सीट-संख्या को सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाया जाए और उसके बाद परिसीमन किया जाए। उनके अनुसार, इस फॉर्मूले से प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, बढ़ती आबादी को समुचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, युवा नेताओं के लिए अधिक अवसर बनेंगे और देश का संघीय संतुलन भी अक्षुण्ण रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर केंद्र में आ गया है और विभिन्न दल अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि संसद की कार्यक्षमता और बुनियादी ढाँचा पहले से दबाव में है। परिसीमन बनाम जनसंख्या नियंत्रण की यह बहस दक्षिण बनाम उत्तर की पुरानी राजनीतिक दरार को फिर उजागर करती है, जिसे कोई भी दल सीधे संबोधित करने से बचता रहा है। बिना व्यापक सर्वदलीय सहमति के कोई भी फॉर्मूला संघीय तनाव को सुलझाने की बजाय बढ़ा सकता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस का लोकसभा सीटें फ्रीज करने का प्रस्ताव क्या है?
कांग्रेस ने लोकसभा सीटों को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि परिसीमन के कारण दक्षिणी राज्यों की सीटें न घटें। शिरोमणि अकाली दल ने इस प्रस्ताव को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के विरुद्ध बताया है।
दलजीत सिंह चीमा ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
चीमा का तर्क है कि सीटें 1971 से पहले से फ्रीज हैं और 25 साल और फ्रीज रखना संसदीय क्षेत्रों को और बड़ा बनाएगा, जिससे प्रभावी प्रतिनिधित्व और युवा राजनीतिक अवसर दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने इसे अतार्किक और लोकतंत्र विरोधी बताया।
परिसीमन से पंजाब और दक्षिण भारत को क्या नुकसान होगा?
जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है — जैसे पंजाब और दक्षिण भारत के राज्य — उनकी सीटें परिसीमन में घट सकती हैं, जबकि अधिक जनसंख्या वाले उत्तर व मध्य भारत के राज्यों की सीटें बढ़ेंगी। चीमा के अनुसार, यह देश के संघीय संतुलन के लिए खतरनाक होगा।
दलजीत चीमा ने क्या विकल्प सुझाया है?
चीमा ने सुझाया है कि लोकसभा की कुल सीटें सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएँ और उसके बाद परिसीमन हो। उनके अनुसार, इससे प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, संघीय संतुलन बना रहेगा और युवाओं के लिए अधिक राजनीतिक अवसर बनेंगे।
लोकसभा सीटें अब तक कितने समय से फ्रीज हैं?
लोकसभा सीटें 1971 से फ्रीज हैं, यानी लगभग 55 वर्षों से। तब देश की जनसंख्या 54.8 करोड़ थी, जो अब लगभग 140 करोड़ हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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