परिसीमन पर खड़गे का PM मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक और 543 सीटें बरकरार रखने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग दोहराई। यह पत्र ऐसे समय आया है जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने एक टेलीविज़न साक्षात्कार में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना का संकेत दिया, और मानसून सत्र के सत्रावसान में लगातार देरी हो रही है।
पत्र की मुख्य बातें
खड़गे ने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी राजनीतिक दलों को परिसीमन प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने का अनुरोध किया था। उन्होंने लिखा, "मैं अब इस अनुरोध को दोहराने के लिए लिख रहा हूं क्योंकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कल रात एक टेलीविजन साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से कहा है कि संसद का ऐसा विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।" खड़गे ने यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया।
कांग्रेस की तीन स्पष्ट माँगें
पत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की ओर से तीन ठोस माँगें रखी गईं। पहली — अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 बनाए रखी जाए। दूसरी — अगले 25 वर्षों तक राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व अर्थात सीटों की संख्या में कोई बदलाव न हो। तीसरी — 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।
दक्षिणी राज्यों की चिंता
परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से उन दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घट जाएगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। गौरतलब है कि यह बहस उस संवैधानिक प्रावधान के इर्द-गिर्द केंद्रित है जो 2026 के बाद जनगणना आधारित परिसीमन की अनुमति देता है।
सरकार से दो अपीलें
खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि आगे बढ़ने से पहले दो कदम उठाए जाएँ — सभी दलों की एक बैठक बुलाई जाए और सभी राजनीतिक दलों एवं राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। पत्र के अंत में खड़गे ने लिखा, "यह देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। कृपया 16 और 17 अप्रैल को की गई कोशिश की तरह इसे फिर से जबरदस्ती थोपने की कोशिश न करें।"
आगे क्या
कांग्रेस लगातार सर्वदलीय बैठक की माँग करती आ रही है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी और विशेष सत्र की अटकलों के बीच यह पत्र राजनीतिक दबाव को और तेज़ करता है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्षी दलों की एकजुटता इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।