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परिसीमन पर खड़गे का PM मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक और 543 सीटें बरकरार रखने की माँग

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परिसीमन पर खड़गे का PM मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक और 543 सीटें बरकरार रखने की माँग

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने PM मोदी को दूसरी बार पत्र लिखा — सर्वदलीय बैठक, 543 लोकसभा सीटें अगले 25 साल तक बरकरार रखने और 2029 से महिला आरक्षण लागू करने की माँग। विशेष सत्र की अटकलों के बीच दक्षिणी राज्यों की प्रतिनिधित्व-संबंधी चिंताएँ केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन पर दूसरा पत्र लिखा।
पहला पत्र 16 जुलाई को लिखा गया था; दोनों में सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग दोहराई गई।
कांग्रेस की माँग — अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की 543 सीटें और राज्यों का मौजूदा प्रतिनिधित्व बरकरार रखा जाए।
2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की माँग।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री के विशेष सत्र के संकेत और मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी ने इस पत्र की पृष्ठभूमि तैयार की।
परिसीमन दक्षिणी राज्यों में संवेदनशील — आरोप है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग दोहराई। यह पत्र ऐसे समय आया है जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने एक टेलीविज़न साक्षात्कार में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना का संकेत दिया, और मानसून सत्र के सत्रावसान में लगातार देरी हो रही है।

पत्र की मुख्य बातें

खड़गे ने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी राजनीतिक दलों को परिसीमन प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने का अनुरोध किया था। उन्होंने लिखा, "मैं अब इस अनुरोध को दोहराने के लिए लिख रहा हूं क्योंकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कल रात एक टेलीविजन साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से कहा है कि संसद का ऐसा विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।" खड़गे ने यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया।

कांग्रेस की तीन स्पष्ट माँगें

पत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की ओर से तीन ठोस माँगें रखी गईं। पहली — अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 बनाए रखी जाए। दूसरी — अगले 25 वर्षों तक राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व अर्थात सीटों की संख्या में कोई बदलाव न हो। तीसरी2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।

दक्षिणी राज्यों की चिंता

परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से उन दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घट जाएगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। गौरतलब है कि यह बहस उस संवैधानिक प्रावधान के इर्द-गिर्द केंद्रित है जो 2026 के बाद जनगणना आधारित परिसीमन की अनुमति देता है।

सरकार से दो अपीलें

खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि आगे बढ़ने से पहले दो कदम उठाए जाएँ — सभी दलों की एक बैठक बुलाई जाए और सभी राजनीतिक दलों एवं राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। पत्र के अंत में खड़गे ने लिखा, "यह देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। कृपया 16 और 17 अप्रैल को की गई कोशिश की तरह इसे फिर से जबरदस्ती थोपने की कोशिश न करें।"

आगे क्या

कांग्रेस लगातार सर्वदलीय बैठक की माँग करती आ रही है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी और विशेष सत्र की अटकलों के बीच यह पत्र राजनीतिक दबाव को और तेज़ करता है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्षी दलों की एकजुटता इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संघीय ढाँचे और दक्षिण बनाम उत्तर की राजनीतिक शक्ति के सवाल के रूप में देख रहा है। सरकार की ओर से पहले पत्र का कोई सार्वजनिक जवाब न आना और मानसून सत्र के सत्रावसान में लगातार देरी — दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि निर्णय शायद पहले ही हो चुका है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सरकार संवाद को प्रक्रिया का हिस्सा मानती है या केवल औपचारिकता — और दक्षिणी राज्यों की सत्तारूढ़ पार्टियाँ किस पाले में खड़ी होती हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी को परिसीमन पर पत्र क्यों लिखा?
खड़गे ने परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी दलों को पर्याप्त अध्ययन समय देने की माँग दोहराने के लिए यह पत्र लिखा। इसकी तात्कालिक वजह केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री का वह बयान था जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के संकेत दिए गए थे।
कांग्रेस की परिसीमन पर क्या माँगें हैं?
कांग्रेस ने तीन माँगें रखी हैं — अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखी जाएँ, राज्यों का मौजूदा प्रतिनिधित्व न बदला जाए, और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू हो।
परिसीमन दक्षिणी राज्यों के लिए संवेदनशील क्यों है?
विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उन दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें घट जाएंगी जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। इससे उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की आशंका है।
खड़गे ने इससे पहले परिसीमन पर पत्र कब लिखा था?
खड़गे ने पहला पत्र 16 जुलाई को लिखा था, जिसमें भी सर्वदलीय बैठक और प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने की माँग की गई थी। 27 अगस्त का पत्र उसी माँग की पुनरावृत्ति है।
मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी का परिसीमन से क्या संबंध है?
खड़गे ने पत्र में संकेत दिया कि मानसून सत्र के सत्रावसान में लगातार देरी शायद इसलिए हो रही है ताकि परिसीमन प्रस्तावों पर विशेष सत्र बुलाया जा सके। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने टेलीविज़न पर ऐसे विशेष सत्र की संभावना का संकेत दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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