दिशा सालियान मौत मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफआईआर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2026 को दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर इस याचिका में बलात्कार कर हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करने की माँग की गई है। शुक्रवार को सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने सुनवाई समाप्त की।
इन्क्वेस्ट पंचनामे पर अदालत के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान के इन्क्वेस्ट पंचनामे को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत ने सरकारी वकील से पूछा कि अस्पताल के पंचनामे में दिशा के शव पर कपड़े न होने का उल्लेख है — तो वे कपड़े किसने उतारे और संबंधित डॉक्टर का बयान क्यों नहीं लिया गया।
इस पर सरकारी वकील ने स्पष्ट किया कि कपड़े न होने का उल्लेख अस्पताल के पंचनामे में है, घटनास्थल के पंचनामे में नहीं। उन्होंने अदालत में दिशा की आत्महत्या के बाद का अस्पताल का फोटो भी पेश किया, जिसमें शव पर कपड़े दिखाए गए। जजों ने फोटो को लेकर भी सरकारी वकील से अतिरिक्त सवाल किए।
चोटों की प्रकृति पर अदालत की जिज्ञासा
अदालत ने यह भी पूछा कि इतनी ऊँचाई से गिरने पर केवल मुँह से खून क्यों आया और चेहरे पर अधिक जख्म क्यों नहीं दिखे। सरकारी वकील ने बताया कि दिशा मुँह के बल गिरी थी, जिससे स्कल फ्रैक्चर, जबड़े में गंभीर चोट और दाँत फ्रैक्चर हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति के गिरने पर चोटें अलग-अलग हो सकती हैं।
अदालत ने इस पर टिप्पणी की कि 'हमें अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकालना है, लेकिन यह देखना है कि इसमें संदेह करने जैसा वाकई कुछ है या नहीं।'
पिता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट
सुनवाई में 15 जनवरी 2024 को सतीश सालियान द्वारा दिया गया बयान पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी की डील कैंसल होने से हुए आर्थिक नुकसान के कारण उसने आत्महत्या की — 'ऐसा मुझे लगता है।' सरकारी वकील ने बताया कि सतीश सालियान का बयान अब तक पाँच बार दर्ज किया जा चुका है और किसी भी बयान में उन्होंने किसी पर संदेह नहीं जताया था।
सरकारी वकील ने यह भी बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई है। दिशा के साथ रहने वाले रोहित रॉय के बयान में भी कहा गया है कि दिशा गहरे अवसाद में थी और इसी कारण उसने आत्महत्या की। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुलिस ने अखबारों में विज्ञापन देकर गवाहों को सामने आने का अवसर दिया था, लेकिन कोई नहीं आया।
आदित्य ठाकरे के वकील की दलील
सरकारी पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद आदित्य ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने अपनी दलील रखी। याचिका में आदित्य ठाकरे पर भी केस दर्ज करने की माँग की गई है।
पासबोला ने कहा कि जब रशीद खान पठान ने शिकायत की थी, तब सतीश सालियान ने स्वयं कोई शिकायत नहीं की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह याचिका तथ्यों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दुश्मनी और रंजिश पर आधारित है। सुनवाई में राणे और उनके बेटे का नाम भी लिया गया। वकील ने दिशा के पिता के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि याचिका की माँगें कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं।
आगे क्या होगा
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत का निर्णय तय करेगा कि क्या इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा या याचिका खारिज होगी — एक फैसला जिसका असर इस बहुचर्चित प्रकरण की दिशा पर पड़ेगा।