दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त आदेश: अंतिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त आदेश
- दिशा सालियान की मौत का मामला फिर से सुर्खियों में
- सतीश सालियान की याचिका में नई जांच की मांग
- आदित्य ठाकरे पर आरोप और पुलिस की भूमिका पर सवाल
- सच्चाई को सामने लाने की आवश्यकता
मुंबई, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व सेलिब्रिटी प्रबंधक दिशा सालियान की मृत्यु का मामला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। इस बार बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतिम जांच रिपोर्ट में देरी के कारण सरकार और जांच एजेंसियों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जांच एजेंसी को २४ घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि अंतिम रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं पेश की गई। सुनवाई के दौरान जब सरकारी पक्ष ने नए सबूतों की जांच का हवाला देकर और समय मांगा, तो कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या इस तरह से जांच को अनिश्चित समय तक टाला जाएगा?
इस मामले में दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने मांग की है कि उनकी बेटी की मौत को आत्महत्या के रूप में नहीं, बल्कि हत्या के मामले में दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि अब तक की जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है और सच्चाई को उजागर करने के लिए एक नई जांच आवश्यक है।
कोर्ट में चल रही इस सुनवाई ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
असल में, दिशा सालियान की मौत ८ जून २०२० को मुंबई के मलाड इलाके में १४वीं मंजिल से गिरने के कारण हुई थी। उनकी मौत के कुछ दिनों बाद, १४ जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु का मामला भी सामने आया था। दिशा, सुशांत की पूर्व मैनेजर रह चुकी थीं, जिससे दोनों मामलों को जोड़ा गया। पुलिस ने दिशा सालियान की मौत को आत्महत्या करार दिया और बताया कि वह कई कारणों से डिप्रेशन में थीं, जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या की।
पुलिस की प्रारंभिक जांच से परिवार संतुष्ट नहीं था और लगातार इस पर सवाल उठाता रहा है।
सतीश सालियान ने याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या की गई। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए सही तरीके से जांच नहीं की गई।
याचिका में मुंबई पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मुंबई पुलिस ने फोरेंसिक सबूतों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को नजरअंदाज करते हुए जल्दीबाजी में इसे आत्महत्या का मामला मान लिया।
याचिका में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है, हालाँकि आदित्य ठाकरे ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए २४ घंटे के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।