28 अगस्त 2026
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दिशा सालियान केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए तीखे सवाल, FIR न होने पर अदालत सख्त

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दिशा सालियान केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए तीखे सवाल, FIR न होने पर अदालत सख्त

सारांश

छह साल बाद दिशा सालियान मामला एक बार फिर अदालत में उबला — इस बार बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की धारा 174 जांच की कानूनी वैधता पर सीधे सवाल उठाए। सीबीआई क्लीन चिट के दावे को अदालत में झूठा बताया गया। पिता को उम्मीद है कि एफआईआर के आदेश आएंगे।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2026 की सुनवाई में मुंबई पुलिस की सीआरपीसी धारा 174 के तहत जांच की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराधों की शिकायत पर केवल धारा 174 के तहत जांच पर्याप्त नहीं, और एफआईआर अभी भी दर्ज की जा सकती है।
सीबीआई के वकील ने अदालत में पुष्टि की कि सीबीआई ने दिशा सालियान मामले की कोई जांच नहीं की और न कोई क्लीन चिट दी — जो आदित्य ठाकरे के हलफनामे के दावे के विपरीत है।
दिशा के पिता ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को 'फर्जी' बताते हुए आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया के खिलाफ एफआईआर की मांग की।
वकील नीलेश ओझा ने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे पर मामले को दबाने का आरोप लगाया; कथित फर्जी सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया।
अगली सुनवाई में सरकारी वकील को सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के संदर्भ में अपना पक्ष रखना होगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच-प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए हैं — विशेष रूप से यह कि जब शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराधों के आरोप हैं, तो सीआरपीसी की धारा 174 के तहत महज़ इनक्वेस्ट कार्रवाई तक ही जांच क्यों सीमित रखी गई। 27 अगस्त 2026 को हुई इस सुनवाई में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है।

अदालत के मुख्य सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी वकील और पुलिस से सीधे पूछा कि धारा 174 के तहत की गई जांच की कानूनी स्थिति क्या है। पुलिस ने बताया कि उसने इसी धारा के तहत जांच की और गवाहों के बयान दर्ज किए। इस पर अदालत ने कहा कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो केवल धारा 174 के तहत जांच का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बनता। अदालत ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि यदि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के किसी फैसले का कोई काउंटर या अलग कानूनी आधार है, तो उसे अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए।

पिता का बयान — छह साल बाद न्याय की उम्मीद

सुनवाई के बाद दिशा सालियान के पिता ने कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है और छह साल बाद पहली बार उन्हें लग रहा है कि उन्हें, उनकी बेटी और उनकी पत्नी को न्याय मिलेगा। उन्होंने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को 'पूरी तरह फर्जी' बताते हुए आरोप लगाया कि उसमें सही तथ्य सामने नहीं रखे गए और वह कथित तौर पर आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि दिशा की मौत के दिन वह अस्पताल पहुँचे थे, जहाँ पुलिस ने उनका बयान लिया और पूछा कि क्या उन्हें किसी पर शक है। उन्होंने उस समय कहा था कि अभी किसी पर शक नहीं है और बाद में देखा जाएगा। दो-तीन दिन बाद उन्हें मालवणी पुलिस स्टेशन बुलाया गया, जहाँ दिशा की पढ़ाई, नौकरी और उसके सहकर्मियों के बारे में सवाल किए गए।

एफआईआर की मांग — किन नामों का उल्लेख

दिशा के पिता ने बताया कि वह कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया समेत दो-तीन अन्य लोगों के नाम लिए। उनका कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोष सामने आने पर गिरफ्तारी होनी चाहिए।

सीबीआई जांच का दावा — अदालत में विवाद

सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच को लेकर भी अहम खुलासा हुआ। दिशा के पिता के वकील नीलेश ओझा ने अदालत के सामने दावा किया कि आदित्य ठाकरे की ओर से दाखिल एक इंटरवेंशन एप्लीकेशन के हलफनामे में कहा गया था कि मामले की सीबीआई जांच हो चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। ओझा ने इस दावे को गलत बताया। इस पर अदालत ने सीबीआई के वकील से जानकारी मांगी। ओझा के अनुसार, सीबीआई के वकील ने अपने कार्यालय से पुष्टि के बाद अदालत को बताया कि सीबीआई ने दिशा सालियान मामले की कोई जांच नहीं की और न ही कोई क्लीन चिट दी।

वकील के अन्य आरोप और आगे की राह

वकील ओझा ने अदालत से कथित तौर पर गलत हलफनामा दाखिल करने के आधार पर आदित्य ठाकरे की याचिका खारिज करने, भारी जुर्माना लगाने और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग किए जाने की बात कही। उन्होंने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए वाजे का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। ओझा ने कथित रूप से फर्जी सीसीटीवी फुटेज और फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने पंचनामे में 8 जून और 9 जून की दो अलग-अलग तारीखें दर्ज होने की विसंगति का भी ज़िक्र किया। सुनवाई के बाद ओझा ने कहा कि उन्हें 100 प्रतिशत उम्मीद है कि अदालत एफआईआर दर्ज करने के आदेश देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की नज़ीरें पुलिस को ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य करती हैं। सीबीआई क्लीन चिट के दावे का अदालत में ही खंडन होना, यदि सत्य साबित हुआ, तो यह न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप का मामला बनता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नामों और आरोपों पर केंद्रित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कानूनी प्रक्रिया की इस चूक की जवाबदेही तय होगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या सवाल उठाए?
अदालत ने मुंबई पुलिस से पूछा कि जब शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराधों के आरोप हैं, तो केवल सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जांच का क्या कानूनी आधार है। अदालत ने यह भी कहा कि अभी भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
क्या सीबीआई ने दिशा सालियान मामले की जांच की थी?
नहीं। अदालत में सीबीआई के वकील ने पुष्टि की कि सीबीआई ने इस मामले की कोई जांच नहीं की और न ही किसी को क्लीन चिट दी। यह दावा आदित्य ठाकरे की ओर से दाखिल हलफनामे में किए गए दावे के विपरीत है।
दिशा सालियान के पिता ने किन लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग की है?
दिशा के पिता ने आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया समेत दो-तीन अन्य लोगों के नाम लेते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद जांच होनी चाहिए और दोष सामने आने पर गिरफ्तारी होनी चाहिए।
वकील नीलेश ओझा ने सचिन वाजे पर क्या आरोप लगाए?
वकील नीलेश ओझा ने अदालत में आरोप लगाया कि पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को कथित तौर पर मामले को दबाने के लिए इस्तेमाल किया गया और वह इस कथित कवर-अप के मास्टरमाइंड थे। यह आरोप हैं और अदालत द्वारा अभी इन पर कोई निर्णय नहीं दिया गया है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के संदर्भ में अपना पक्ष रखें। वकील नीलेश ओझा को पूरी उम्मीद है कि अदालत एफआईआर दर्ज करने के आदेश देगी।
राष्ट्र प्रेस
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