नेपाल बाढ़ त्रासदी: NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने माँगा बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, भारत से पड़ोसी की मदद की अपील
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 28 अगस्त को गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए भारत सरकार से बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने की माँग की। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत का निकटतम पड़ोसी है और इस आपदा की घड़ी में हर संभव सहायता प्रदान करना भारत की नैतिक जिम्मेदारी है।
नेपाल आपदा पर मानवीय अपील
सिद्दीकी ने कहा, 'यह अत्यंत दुखद घटना है। नेपाल के लोगों के साथ भारत के सभी नागरिकों की पूरी हमदर्दी है।' उन्होंने सरकार से अपील की कि लापता लोगों की तलाश के लिए तत्काल और व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाए। उनका कहना था कि विश्व के सभी देशों को, विशेष रूप से भारत को, नेपाल की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मानवीय संकट में विपक्ष को भी सरकार के साथ एकजुट होकर खड़ा रहना चाहिए।
दलबदल और स्पीकर की भूमिका पर निशाना
नेपाल आपदा पर टिप्पणी के साथ-साथ सिद्दीकी ने राजनीतिक दलबदल के मुद्दे पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के नाम पर चुनाव जीतकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने वाले सांसदों की आलोचना करते हुए उन्हें 'दलबदलू' करार दिया। उनके अनुसार, इन सांसदों ने कथित तौर पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के दबाव और आर्थिक प्रलोभन के चलते अपना राजनीतिक रुख बदला।
सिद्दीकी ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के करीब पहुँचा, तभी संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया गया — जो उनके अनुसार कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP के विभाजन का भी उल्लेख किया और कहा कि दलबदलुओं को बाहरी समर्थन मिल रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय पर विवादास्पद टिप्पणी
सिद्दीकी ने सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में न्यायालय के कुछ निर्णयों को लेकर जनमानस में संशय उत्पन्न हुआ है। उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने स्वयं माना कि भूमि मस्जिद की थी, फिर भी उसे मंदिर के लिए आवंटित किया गया। गौरतलब है कि यह टिप्पणी विवादास्पद है और न्यायालय के फैसले की उनकी व्यक्तिगत व्याख्या है।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'सुप्रीम कोर्ट पक्षपात कर रहा है, यह मैं नहीं कह रहा — यह पूरा मीडिया और पूरी दुनिया कह रही है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका और सरकार के बीच किसी प्रकार का 'गठजोड़' है, जिससे आम नागरिकों में न्याय मिलने की उम्मीद कम हो रही है।
विशेषज्ञ और राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही की खबरें आ रही हैं और कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। भारत-नेपाल संबंधों के संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आपदाओं में द्विपक्षीय सहयोग न केवल मानवीय दृष्टि से, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। NCP-SP की यह माँग ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार की विदेश नीति और आपदा प्रबंधन पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या
नेपाल में राहत और बचाव कार्यों की स्थिति पर नज़र बनाए रखना जरूरी होगा। सिद्दीकी की इस अपील के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार नेपाल को किस स्तर की सहायता प्रदान करती है और क्या विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाते हैं।