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नेपाल बाढ़ पर श्रीश्री रविशंकर की अपील: हिमालयी पर्यावरण बचाओ, कर्नाटक सरकार फंसे कन्नडिगाओं की तलाश में जुटी

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नेपाल बाढ़ पर श्रीश्री रविशंकर की अपील: हिमालयी पर्यावरण बचाओ, कर्नाटक सरकार फंसे कन्नडिगाओं की तलाश में जुटी

सारांश

नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ के बीच श्रीश्री रविशंकर ने एकजुटता का आह्वान करते हुए हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की ज़रूरत पर बल दिया। कर्नाटक सरकार ने फंसे कन्नडिगाओं की मदद के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों से समन्वय शुरू किया है।

मुख्य बातें

श्रीश्री रविशंकर ने 27 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ और भूस्खलन पर गहरी चिंता जताई और एकजुटता का आह्वान किया।
उन्होंने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक प्रयास करने की अपील की।
कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर गए कई श्रद्धालुओं के इस क्षेत्र में फंसे होने की आशंका है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक सरकार की ओर से फंसे कन्नडिगाओं की पहचान और सहायता के लिए पहल की घोषणा की।
नागरिक SEOC से 1070 या 080-22253707 पर संपर्क कर सकते हैं या ऑनलाइन फॉर्म के ज़रिए जानकारी दे सकते हैं।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने 27 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के मद्देनज़र नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने समस्त देशवासियों से आपदा-प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया।

श्रीश्री रविशंकर का संदेश

जारी बयान में श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि प्रकृति के प्रकोप ने नेपाल में एक बड़ी त्रासदी को जन्म दिया है — एक ऐसा देश जो लंबे समय से पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए प्रमुख गंतव्य रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं का उल्लेख किया जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर इस क्षेत्र में गए थे।

उन्होंने आपदा में हुई मौतों की खबरों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, 'आइए हम सभी नेपाल के लोगों, प्रभावित परिवारों और नेपाल सरकार के साथ एकजुटता दिखाएं।' उन्होंने अपने प्रियजनों को खोने वालों के लिए शक्ति और साहस की प्रार्थना की तथा उम्मीद जताई कि नेपाल शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटेगा।

गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं, जिसे पर्यावरण विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों से जोड़ते हैं। इसी संदर्भ में श्रीश्री रविशंकर ने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण रक्षा के लिए अधिक प्रयास करने पर बल दिया।

कर्नाटक सरकार की पहल

कर्नाटक सरकार ने अचानक आई बाढ़ और उससे उत्पन्न व्यवधानों के बाद नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के आसपास फंसे राज्य के नागरिकों की जानकारी एकत्र करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर कहा, 'प्रत्येक कन्नड़ भाषी की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ और व्यवधानों को देखते हुए कर्नाटक सरकार विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के समन्वय से नेपाल या तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में फंसे कर्नाटक के लोगों की पहचान करने और उनकी सहायता के लिए कार्यरत है।'

बचाव और समन्वय की व्यवस्था

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि फंसे हुए व्यक्तियों, उनके परिजनों और पर्यटक संचालक केंद्रों से ऑनलाइन फॉर्म के ज़रिए विवरण प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। यह जानकारी राज्य सरकार को विदेश मंत्रालय, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के साथ मिलकर बचाव, निकासी और अन्य आवश्यक सहायता कार्यों में समन्वय स्थापित करने में सहायक होगी।

नागरिक सरकार के गूगल फॉर्म के माध्यम से जानकारी दे सकते हैं अथवा राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) से 1070 या 080-22253707 पर संपर्क कर सकते हैं। ईमेल के माध्यम से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह आपदा ऐसे समय में आई है जब कैलाश मानसरोवर यात्रा का मौसम चल रहा है और बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री इस क्षेत्र में होते हैं। कर्नाटक सरकार ने फंसे हुए लोगों की जानकारी रखने वालों से शीघ्र विवरण साझा करने का आग्रह किया है ताकि समय पर सहायता सुनिश्चित की जा सके।

आलोचकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में बार-बार आने वाली ऐसी आपदाएँ दीर्घकालिक पर्यावरण नीति की माँग करती हैं — महज़ राहत कार्य पर्याप्त नहीं। श्रीश्री रविशंकर की अपील इसी व्यापक चिंता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की पर्यावरणीय उपेक्षा का परिणाम है। कर्नाटक सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन यह भी उजागर करती है कि कैलाश मानसरोवर जैसे संवेदनशील मार्गों पर तीर्थयात्रियों के लिए कोई स्थायी आपातकालीन ट्रैकिंग तंत्र अभी तक नहीं बना है। जब तक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, तब तक ऐसी आपदाएँ और उनके बाद की हड़बड़ाहट दोहराई जाती रहेगी।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ में श्रीश्री रविशंकर ने क्या कहा?
श्रीश्री रविशंकर ने नेपाल के लोगों, प्रभावित परिवारों और नेपाल सरकार के साथ एकजुटता का आह्वान किया और सभी से प्रार्थना करने का अनुरोध किया। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने की भी अपील की।
कर्नाटक सरकार नेपाल में फंसे नागरिकों की कैसे मदद कर रही है?
कर्नाटक सरकार विदेश मंत्रालय, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के समन्वय से फंसे कन्नडिगाओं की पहचान और बचाव में जुटी है। नागरिक SEOC से 1070 या 080-22253707 पर संपर्क कर सकते हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर इस बाढ़ का क्या असर पड़ा है?
कई श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा पर नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में गए थे और बाढ़ के कारण उनके फंसे होने की आशंका है। कर्नाटक सरकार ने इन्हीं यात्रियों की जानकारी एकत्र करने के लिए ऑनलाइन फॉर्म जारी किया है।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन की बढ़ती घटनाएँ जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों से जुड़ी हैं। श्रीश्री रविशंकर ने भी इसी संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण की ज़रूरत पर बल दिया।
फंसे हुए लोगों की जानकारी कहाँ दें?
कर्नाटक सरकार के गूगल फॉर्म के ज़रिए या राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) से 1070 या 080-22253707 पर संपर्क करके जानकारी दी जा सकती है। ईमेल के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध है।
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