दलाई लामा ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ पर जताया दुख, 162 शव बरामद; 133 भारतीय लापता
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा जिले और तिब्बत के कीरोंग क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है। 27 अगस्त 2026 को धर्मशाला से जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट की। इस आपदा में अब तक 162 शव बरामद हो चुके हैं और 133 भारतीयों सहित सैकड़ों लोग लापता हैं।
दलाई लामा का बयान
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने अपने बयान में कहा, 'नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी संरचनात्मक क्षति हुई। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त एवं इस त्रासदी से पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति और हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ।'
उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि इस क्षेत्र ने पहले भी आपदाएँ देखी हैं, ये निश्चित रूप से किसी गहरे अंतर्निहित कारण के लक्षण हैं — चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो या अन्य कारक। उन्होंने उम्मीद जताई कि 'जहाँ भी संभव हो, उचित अनुवर्ती उपाय किए जाएँगे ताकि ऐसी आपदाएँ दोबारा न हों।'
बाढ़ का विनाशकारी मार्ग
तिब्बती क्षेत्र से उत्पन्न होकर यह बाढ़ सीमा पार भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल में दाखिल हुई और भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह तक 162 शव बरामद किए जा चुके थे। शव और कुछ अंग रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहु, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) सहित भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे स्थित कई जिलों से बरामद हुए। अधिकांश शव नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाके चितवन में मिले।
लापता लोगों की संख्या
नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि विदेशी नागरिकों सहित सैकड़ों लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। बुधवार देर शाम जारी प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के 13 जवान आपदाग्रस्त क्षेत्र में संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा 391 विदेशी पर्यटक और 93 नेपाली पर्यटक भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने 133 भारतीयों के लापता होने की अलग से पुष्टि की है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में मानसून-प्रेरित आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि नेपाल और तिब्बत से सटे क्षेत्र पहले भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी त्रासदियों का शिकार हो चुके हैं। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार ऐसी घटनाओं को और घातक बना रही है।
आगे की राह
राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने से कार्य में बाधा आ रही है। लापता भारतीयों को लेकर भारतीय दूतावास भी नेपाली अधिकारियों के संपर्क में है। आने वाले दिनों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में और बदलाव की आशंका है।