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नेपाल बाढ़ में 162 की मौत: आरएसएस ने जताया शोक, भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

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नेपाल बाढ़ में 162 की मौत: आरएसएस ने जताया शोक, भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

सारांश

भोटेकोसी नदी में हिमस्खलन से उत्पन्न अचानक बाढ़ ने नेपाल के पाँच जिलों में तबाही मचाई — 162 की मौत, सैकड़ों लापता। आरएसएस ने संवेदना जताई और भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजकर पड़ोसी देश के साथ एकजुटता का संदेश दिया।

मुख्य बातें

नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई अचानक बाढ़ से कम से कम 162 लोगों की मौत , स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार।
रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन और पूर्वी नवलपरासी — पाँच जिले बुरी तरह प्रभावित, हज़ारों लोग विस्थापित।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक्स पर पोस्ट कर शोक जताया और सभी से राहत में सहयोग की अपील की।
भारत ने 10 टन मानवीय राहत सामग्री नेपाल को सौंपी; राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मंत्री खड़क राज पौडेल को सामग्री हस्तांतरित की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल के साथ पूर्ण सहयोग का संकल्प दोहराया।
बाढ़ का कारण सहायक नदी ल्हेन्डे में हिमस्खलन से उत्पन्न जलावरोध बताया जा रहा है।

नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती जिलों में भोटेकोसी नदी में आई अचानक विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों और पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का संकल्प जताया है।

बाढ़ का कारण और प्रभावित क्षेत्र

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार यह बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया। इसके बाद नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे सबसे पहले इस आपदा की चपेट में आया। संघ के अनुसार रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन और पूर्वी नवलपरासी — कुल पाँच जिले इस भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें हज़ारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

आरएसएस की संवेदना और सहायता की अपील

आरएसएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों, प्रभावित लोगों और घायलों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।' संगठन ने स्पष्ट किया कि वह पीड़ितों की सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है और हर संभव मदद पहुँचाने का प्रयास करेगा। साथ ही, आरएसएस ने आम नागरिकों से भी इस संकट की घड़ी में आगे आकर सहायता करने की अपील की।

भारत की राहत कार्रवाई

भारत ने इस आपदा में नेपाल के साथ एकजुटता दिखाते हुए 10 टन मानवीय राहत सामग्री भेजी। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सामग्री औपचारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी। इस राहत पैकेज में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए ज़रूरी सामग्री शामिल है।

सरकार की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ मज़बूती से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल के बीच सीमा-पार आपदा प्रबंधन सहयोग को और मज़बूत करने की माँग लगातार उठती रही है।

आगे की स्थिति

राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन लापता सैकड़ों लोगों की तलाश अभी भी चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमस्खलन-जनित अचानक बाढ़ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट) हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का संकेत है, और भविष्य में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तत्काल मानवीय संकट है। आरएसएस की अपील और भारत की त्वरित राहत सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि भारत-नेपाल के बीच स्थायी सीमा-पार आपदा प्रबंधन तंत्र कब बनेगा। हर बार आपदा के बाद तात्कालिक सहायता भेजना पर्याप्त नहीं — पूर्व-चेतावनी प्रणाली और संयुक्त निकासी प्रोटोकॉल की कमी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कमज़ोरी बनी हुई है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ 2026 में कितने लोगों की मौत हुई?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई अचानक बाढ़ से अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है। सुरक्षाकर्मियों और पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में यह बाढ़ क्यों आई?
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया, जिससे अचानक बाढ़ आई। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे प्रभावित हुआ।
आरएसएस ने नेपाल बाढ़ पर क्या कहा?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक्स पर पोस्ट कर जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि वह पीड़ितों की हर संभव सहायता के लिए तैयार है। संगठन ने सभी नागरिकों से भी इस संकट में आगे आकर मदद करने की अपील की।
भारत ने नेपाल बाढ़ राहत में क्या सहायता दी?
भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय राहत सामग्री भेजी, जिसे राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को औपचारिक रूप से सौंपा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ पूरी तरह खड़ा है।
नेपाल के कौन-से जिले इस बाढ़ से प्रभावित हुए?
आरएसएस के बयान के अनुसार रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन और पूर्वी नवलपरासी — कुल पाँच जिले इस भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में हज़ारों लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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