नेपाल बाढ़ त्रासदी: यूएन महासचिव गुटेरेस ने जताया शोक, 157 मौतें, 391 पर्यटक लापता
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और तिब्बत में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से हुई भारी जानमाल की क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है और सुरक्षाकर्मियों व पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। 27 अगस्त 2026 को जारी बयान में संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे राहत अभियान को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
महासचिव का शोक संदेश
महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'महासचिव नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से दुखी हैं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, कई लोग लापता हो गए और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।' गुटेरेस ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
संयुक्त राष्ट्र की राहत कार्रवाई
दुजारिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र नेपाल में सरकार के नेतृत्व वाली राहत प्रतिक्रिया का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा, 'आपदा के पैमाने का आकलन करने और तत्काल सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय साझेदार बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आवश्यक सामान और कर्मियों को जुटा रहे हैं।' प्रवक्ता ने आगे कहा कि महासचिव जान बचाने में जुटे आपातकालीन कर्मियों की सराहना करते हैं और आगे भी सहायता जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र की तत्परता को दोहराते हैं।
बाढ़ कैसे आई — कारण और पृष्ठभूमि
'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, यह बाढ़ तब आई जब एक हिमस्खलन (एवलांच) ने भोटेकोशी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' के प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया। इससे रसुवागढ़ी में नेपाल-चीन सीमा के पास 'तिमुरे' इलाके में सबसे पहले तबाही मची। गौरतलब है कि उस क्षेत्र में उस समय कोई बारिश नहीं हो रही थी, जिसके कारण स्थानीय लोगों को कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली और वे अपने सामान्य दैनिक कार्यों में व्यस्त थे।
लापता और नुकसान का ब्यौरा
नेपाली सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात 28 पुलिसकर्मी, और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 जवान संपर्क से बाहर हैं। बुनियादी ढाँचे को भी भारी नुकसान हुआ है — 9 जलविद्युत परियोजनाएँ, कई वाणिज्यिक बैंक, कम से कम 19 मोटर-योग्य पुल और दर्जनों सार्वजनिक व निजी संपत्तियाँ बाढ़ में बह गई हैं।
आगे की चुनौतियाँ
यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल पहले से ही मानसून सीजन की चुनौतियों से जूझ रहा है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के आई इस बाढ़ ने देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली की कमज़ोरियों को उजागर किया है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पहुँचना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।