27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ त्रासदी: यूएन महासचिव गुटेरेस ने जताया शोक, 157 मौतें, 391 पर्यटक लापता

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नेपाल बाढ़ त्रासदी: यूएन महासचिव गुटेरेस ने जताया शोक, 157 मौतें, 391 पर्यटक लापता

सारांश

भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई — 157 मौतें, 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी लापता। संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने शोक जताते हुए राहत सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। बिना किसी चेतावनी के आई इस आपदा ने नेपाल की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्य बातें

नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 157 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता।
391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी — जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान, 28 पुलिसकर्मी और APF के 13 जवान शामिल — लापता हैं।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शोक व्यक्त किया और राहत कार्यों में पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
बाढ़ का कारण हिमस्खलन द्वारा 'ल्हेन्डे' नदी का अवरुद्ध होना था; क्षेत्र में कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली।
9 जलविद्युत परियोजनाएँ , 19 मोटर-योग्य पुल और कई वाणिज्यिक बैंक व संपत्तियाँ बाढ़ में बह गईं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और तिब्बत में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से हुई भारी जानमाल की क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है और सुरक्षाकर्मियों व पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। 27 अगस्त 2026 को जारी बयान में संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे राहत अभियान को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

महासचिव का शोक संदेश

महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'महासचिव नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से दुखी हैं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, कई लोग लापता हो गए और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।' गुटेरेस ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की।

संयुक्त राष्ट्र की राहत कार्रवाई

दुजारिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र नेपाल में सरकार के नेतृत्व वाली राहत प्रतिक्रिया का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा, 'आपदा के पैमाने का आकलन करने और तत्काल सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय साझेदार बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आवश्यक सामान और कर्मियों को जुटा रहे हैं।' प्रवक्ता ने आगे कहा कि महासचिव जान बचाने में जुटे आपातकालीन कर्मियों की सराहना करते हैं और आगे भी सहायता जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र की तत्परता को दोहराते हैं।

बाढ़ कैसे आई — कारण और पृष्ठभूमि

'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, यह बाढ़ तब आई जब एक हिमस्खलन (एवलांच) ने भोटेकोशी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' के प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया। इससे रसुवागढ़ी में नेपाल-चीन सीमा के पास 'तिमुरे' इलाके में सबसे पहले तबाही मची। गौरतलब है कि उस क्षेत्र में उस समय कोई बारिश नहीं हो रही थी, जिसके कारण स्थानीय लोगों को कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली और वे अपने सामान्य दैनिक कार्यों में व्यस्त थे।

लापता और नुकसान का ब्यौरा

नेपाली सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात 28 पुलिसकर्मी, और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 जवान संपर्क से बाहर हैं। बुनियादी ढाँचे को भी भारी नुकसान हुआ है — 9 जलविद्युत परियोजनाएँ, कई वाणिज्यिक बैंक, कम से कम 19 मोटर-योग्य पुल और दर्जनों सार्वजनिक व निजी संपत्तियाँ बाढ़ में बह गई हैं।

आगे की चुनौतियाँ

यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल पहले से ही मानसून सीजन की चुनौतियों से जूझ रहा है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के आई इस बाढ़ ने देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली की कमज़ोरियों को उजागर किया है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पहुँचना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी अलर्ट के, सैकड़ों लोग अपने रोज़मर्रा के काम में लगे थे — और फिर सब कुछ बह गया। संयुक्त राष्ट्र की संवेदना और सहयोग की प्रतिबद्धता स्वागत योग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय नेपाल जैसे संवेदनशील देशों में अर्ली वार्निंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है — शोक संदेशों से काम नहीं चलेगा।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ कैसे आई?
'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, एक हिमस्खलन (एवलांच) ने भोटेकोशी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' के प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया, जिससे रसुवागढ़ी में नेपाल-चीन सीमा के पास 'तिमुरे' इलाके में अचानक बाढ़ आ गई। उस समय क्षेत्र में कोई बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए लोगों को कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी — जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान, 28 पुलिसकर्मी और APF के 13 जवान शामिल हैं — लापता हैं।
संयुक्त राष्ट्र नेपाल बाढ़ में क्या मदद कर रहा है?
संयुक्त राष्ट्र नेपाल में सरकार के नेतृत्व वाले राहत अभियान का समर्थन कर रहा है। यूएन की टीमें और मानवीय साझेदार प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामान और कर्मियों को पहुँचाने में जुटे हैं, साथ ही आपदा के पैमाने का आकलन भी किया जा रहा है।
नेपाल बाढ़ से बुनियादी ढाँचे को कितना नुकसान हुआ?
नेपाली सरकार के अनुसार, 9 जलविद्युत परियोजनाएँ, कई वाणिज्यिक बैंक, कम से कम 19 मोटर-योग्य पुल और दर्जनों सार्वजनिक व निजी संपत्तियाँ बाढ़ में बह गई हैं। यह नुकसान नेपाल की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे के लिए गंभीर झटका है।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल बाढ़ पर क्या कहा?
गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव राहत कार्यों में लगे आपातकालीन कर्मियों की सराहना करते हैं और आगे भी सहायता देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की तत्परता को दोहराते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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