27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-नेपाल संयुक्त बाढ़ प्रबंधन योजना ज़रूरी: संजय झा, बिहार पर सीधा असर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-नेपाल संयुक्त बाढ़ प्रबंधन योजना ज़रूरी: संजय झा, बिहार पर सीधा असर

सारांश

नेपाल की भीषण बाढ़ ने एक पुरानी ज़रूरत को फिर उजागर किया — भारत और नेपाल के बीच साझा बाढ़ रणनीति। JDU नेता संजय झा ने साफ कहा: अलग-अलग नहीं, मिलकर काम करना होगा। बिहार फिलहाल सतर्क है, लेकिन ख़तरा टला नहीं।

मुख्य बातें

JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने 27 अगस्त 2026 को भारत-नेपाल संयुक्त बाढ़ प्रबंधन योजना की माँग की।
नेपाल में बाढ़ बिहार से 200-250 किलोमीटर दूर तिब्बत से लगे क्षेत्र में आई; स्थिति में सुधार।
गंडक नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे; बिहार में तत्काल बड़ी आपात स्थिति नहीं, लेकिन सतर्कता ज़रूरी।
गंडक, कोसी, कमला, बागमती और गंगा — सभी की जल वहन क्षमता गाद जमा होने से घटी; सिल्ट प्रबंधन नीति की ज़रूरत।
फ्लैश फ्लड का सटीक पूर्वानुमान अभी भी बड़ी तकनीकी चुनौती; भारतीय पर्यटक भी नेपाल आपदा से प्रभावित।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने 27 अगस्त 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की घटना भारत और नेपाल दोनों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। उन्होंने दोनों देशों से आग्रह किया कि वे बाढ़ प्रबंधन की दीर्घकालिक और एकीकृत रणनीति मिलकर तैयार करें, क्योंकि नेपाल में होने वाली ऐसी घटनाओं का सीधा और गंभीर असर बिहार पर पड़ता है।

मौजूदा स्थिति और बिहार की सतर्कता

झा ने बताया कि फिलहाल यह बाढ़ बिहार से करीब 200-250 किलोमीटर दूर नेपाल के तिब्बत से लगे क्षेत्र में आई है। उनके अनुसार, वहाँ पानी का बहाव काफी कम हो गया है और स्थिति में सुधार हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गंडक नदी में जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आ गया है, इसलिए बिहार में तत्काल किसी बड़ी आपातकालीन स्थिति के संकेत नहीं हैं — लेकिन प्रशासन और आम जनता को पूरी तरह सतर्क रहना आवश्यक है।

संयुक्त बाढ़ प्रबंधन की पुकार

झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब एक संदेश है। अब भारत और नेपाल को संयुक्त रूप से बाढ़ प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए।' उन्होंने याद दिलाया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से नेपाल में ऊँचे बाँध के निर्माण सहित विभिन्न उपायों पर चर्चा होती रही है, लेकिन ठोस एकीकृत दृष्टिकोण अभी तक नहीं बन पाया है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रत्याशित बाढ़ की घटनाएँ पूरे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रही हैं।

नदियों की घटती जल वहन क्षमता एक बड़ी चुनौती

झा ने नदियों में गाद जमा होने की समस्या को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गंडक, कोसी, कमला और बागमती जैसी नदियाँ — जो गंगा में मिलती हैं — सभी की जल वहन क्षमता लगातार घटी है। स्वयं गंगा की क्षमता भी प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, सिल्ट प्रबंधन नीति के तहत ठोस कदम उठाए बिना नदियों से तेज़ी से पानी निकालना संभव नहीं होगा।

फ्लैश फ्लड का पूर्वानुमान: तकनीकी सीमाएँ

झा ने आगाह किया कि ग्लेशियर टूटने या अचानक अत्यधिक वर्षा की स्थिति में कुछ ही घंटों में फ्लैश फ्लड आ सकती है। उन्होंने माना कि सामान्य मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान लगाया जाता है, परंतु अचानक आने वाली बाढ़ का सटीक और समयबद्ध आकलन करना अभी भी बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटनाएँ पिछले एक दशक में तेज़ी से बढ़ी हैं।

नेपाल त्रासदी पर संवेदना और आगे की राह

झा ने नेपाल में हुई तबाही पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में स्थानीय नेपाली नागरिकों के साथ-साथ भारत से गए पर्यटक भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से सबक लेते हुए दोनों देशों को मिलकर स्थायी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को कम किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस एकीकृत तंत्र आज भी अधूरा है। हर बार बाढ़ के बाद यही आवाज़ें उठती हैं और फिर शांत हो जाती हैं। असली सवाल यह है कि क्या इस बार दोनों सरकारें सिल्ट प्रबंधन और फ्लैश फ्लड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर बाध्यकारी द्विपक्षीय ढाँचा बनाएँगी, या यह बयान भी पिछली चेतावनियों की तरह फाइलों में दब जाएगा। बिहार की नदियाँ हर साल जवाब माँगती हैं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय झा ने भारत-नेपाल बाढ़ प्रबंधन पर क्या कहा?
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि भारत और नेपाल को संयुक्त रूप से बाढ़ प्रबंधन की दीर्घकालिक और एकीकृत योजना बनानी चाहिए। उन्होंने नेपाल की बाढ़ को बिहार के लिए भी सीधा खतरा बताते हुए साझा रणनीति पर जोर दिया।
नेपाल की बाढ़ का बिहार पर क्या असर पड़ता है?
नेपाल से निकलने वाली गंडक, कोसी, कमला और बागमती जैसी नदियाँ बिहार से होकर गंगा में मिलती हैं। नेपाल में अत्यधिक वर्षा या फ्लैश फ्लड की स्थिति में इन नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ता है, जिससे बिहार के कई ज़िले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
27 अगस्त 2026 को बिहार में बाढ़ की स्थिति कैसी थी?
संजय झा के अनुसार, 27 अगस्त को गंडक नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आ गया था और बिहार में तत्काल किसी बड़ी आपातकालीन स्थिति के संकेत नहीं थे। हालाँकि उन्होंने प्रशासन और आम लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी।
नदियों की जल वहन क्षमता कम क्यों हो रही है?
झा के अनुसार, नदियों में लगातार गाद (सिल्ट) जमा होने के कारण उनकी पानी ले जाने की क्षमता घट रही है। गंडक, कोसी, कमला, बागमती और स्वयं गंगा — सभी इससे प्रभावित हैं। इसके समाधान के लिए उन्होंने ठोस सिल्ट प्रबंधन नीति की ज़रूरत बताई।
फ्लैश फ्लड का पूर्वानुमान क्यों मुश्किल है?
झा ने बताया कि ग्लेशियर टूटने या अचानक अत्यधिक वर्षा की स्थिति में कुछ ही घंटों में फ्लैश फ्लड आ सकती है। सामान्य मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान तो संभव है, लेकिन अचानक आने वाली ऐसी बाढ़ का सटीक और समयबद्ध आकलन करना अभी भी तकनीकी रूप से बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 4 घंटे पहले
  4. 16 घंटे पहले
  5. 18 घंटे पहले
  6. 19 घंटे पहले
  7. 22 घंटे पहले
  8. 1 महीना पहले