30 जून 2026
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बिहार बाढ़ और सूखा प्रबंधन 2025: विजय कुमार चौधरी ने बताई दोहरी तैयारी की रणनीति

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बिहार बाढ़ और सूखा प्रबंधन 2025: विजय कुमार चौधरी ने बताई दोहरी तैयारी की रणनीति

सारांश

बिहार सरकार ने इस मानसून में बाढ़ और सूखे — दोनों मोर्चों पर एक साथ तैयारी की है। नेपाल-झारखंड की नदियों पर निगरानी के साथ-साथ बाढ़ के अतिरिक्त पानी को जलाशयों में संग्रहित कर किसानों को सूखे में सिंचाई देने की नई योजना इस रणनीति की धुरी है।

मुख्य बातें

बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 30 जून 2025 को बाढ़ और अल्पवृष्टि दोनों से निपटने की तैयारी की जानकारी दी।
उत्तर बिहार में घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा नदियों पर नेपाल की वर्षा का सीधा असर; दक्षिण बिहार में झारखंड की बारिश से खतरा।
पिछले वर्ष नालंदा और जहानाबाद समेत दक्षिण बिहार के कई जिले झारखंड की बारिश से प्रभावित हुए थे।
नई योजना के तहत बाढ़ का अतिरिक्त पानी नहरों और जलाशयों में संग्रहित कर सूखे में किसानों को सिंचाई दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 'न्याय के साथ विकास' के मॉडल को 2025–2030 के जनादेश में जारी रख रहे हैं।

बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 30 जून 2025 को पटना में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने इस मानसून सीजन में संभावित बाढ़ और अल्पवृष्टि — दोनों आपात स्थितियों से एक साथ निपटने की व्यापक रणनीति तैयार की है। जदयू कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या केवल स्थानीय वर्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल और झारखंड में भारी बारिश होने पर भी राज्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

मुख्य घटनाक्रम: किन नदियों पर है सबसे ज़्यादा नज़र

चौधरी ने बताया कि उत्तर बिहार में नेपाल की ओर से आने वाली घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा नदियों का जलस्तर नेपाल में अत्यधिक वर्षा होने पर तेज़ी से बढ़ता है। वहीं दक्षिण बिहार में झारखंड की भारी बारिश बाढ़ की वजह बनती है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष नालंदा और जहानाबाद सहित दक्षिण बिहार के कई जिले इसी कारण से प्रभावित हुए थे।

उन्होंने आश्वस्त किया कि इस वर्ष अभी तक स्थिति नियंत्रण में है। तटबंधों को सुदृढ़ किया जा रहा है और आपात प्रबंधन के लिए आवश्यक संसाधन पहले से तैनात किए जा रहे हैं।

नई जल संग्रहण योजना: बाढ़ के पानी से होगी सूखे में सिंचाई

चौधरी ने एक नई सरकारी योजना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत बाढ़ के अतिरिक्त पानी को नहरों और अन्य माध्यमों से जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा। यह संग्रहित जल अल्पवृष्टि या सूखे की स्थिति में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के काम आएगा। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य सिर्फ बाढ़ नियंत्रण नहीं, बल्कि हर मौसमी परिस्थिति में किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है।

सरकार की प्रतिक्रिया: 100 दिन और सुशासन का दावा

राजनीतिक सवालों पर चौधरी ने कहा कि सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ जनता का भरोसा और मज़बूत हुआ है। उन्होंने कहा कि 2025 से 2030 तक के जनादेश का आधार वही सुशासन और विकास की नीति है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्थापित किया था। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 'न्याय के साथ विकास' के उसी मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं।

आरसीपी सिंह-नीतीश मुलाकात और राबड़ी देवी आवास विवाद

आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात पर पूछे गए सवाल पर चौधरी ने कहा कि उन्हें भी इसकी जानकारी मीडिया के ज़रिये ही मिली है और बातचीत का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं होने के कारण अटकलें लगाना उचित नहीं। राबड़ी देवी के सरकारी आवास खाली कराने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।

आगे क्या

जल संसाधन विभाग की निगरानी टीमें नेपाल और झारखंड की नदियों के जलस्तर पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। बाढ़ के पानी के संग्रहण की नई योजना यदि प्रभावी रही, तो यह बिहार के किसानों के लिए मानसून के बाद की सिंचाई में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिहार में जल प्रबंधन की ऐसी घोषणाएँ पहले भी होती रही हैं और ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर पीछे रह जाता है। असली कसौटी यह होगी कि नहर नेटवर्क और जलाशयों की क्षमता वास्तव में इस अतिरिक्त जल को संभाल सकती है या नहीं। नेपाल और झारखंड पर निर्भरता की स्वीकृति एक ईमानदार आकलन है, पर इसका समाधान द्विपक्षीय समन्वय के बिना अधूरा रहेगा। जब तक इस योजना का मापन-योग्य ढाँचा सार्वजनिक नहीं होता, यह एक और मानसून-पूर्व आश्वासन बनकर रह सकती है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या तैयारी की है?
बिहार सरकार ने तटबंधों को मज़बूत किया है, आपात संसाधन तैनात किए हैं और नेपाल व झारखंड की नदियों के जलस्तर पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा नदियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बाढ़ के पानी को सूखे में इस्तेमाल करने की नई योजना क्या है?
सरकार ने एक नई योजना शुरू की है जिसके तहत बाढ़ के अतिरिक्त पानी को नहरों और अन्य माध्यमों से जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा। यह पानी बाद में अल्पवृष्टि या सूखे की स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
दक्षिण बिहार में बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?
दक्षिण बिहार में बाढ़ की स्थिति मुख्यतः झारखंड में भारी वर्षा के कारण बनती है। पिछले वर्ष नालंदा और जहानाबाद सहित कई जिले इसी वजह से प्रभावित हुए थे, हालाँकि इस वर्ष अभी तक स्थिति नियंत्रण में बताई गई है।
उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा किन नदियों से है?
उत्तर बिहार में घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा नदियाँ नेपाल में अत्यधिक वर्षा होने पर उफान पर आ जाती हैं। यही कारण है कि विभाग नेपाल की मौसमी स्थितियों पर भी नज़र रखता है।
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी किस विकास नीति को आगे बढ़ा रहे हैं?
विजय कुमार चौधरी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 'न्याय के साथ विकास' की उसी नीति को जारी रख रहे हैं जिसे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्थापित किया था। यह नीति 2025 से 2030 तक के जनादेश का मूल आधार बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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