15 अगस्त 2026
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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: 41 मामले पुष्ट, 27 मौतें; बच्चे सबसे अधिक प्रभावित

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: 41 मामले पुष्ट, 27 मौतें; बच्चे सबसे अधिक प्रभावित

सारांश

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — 30 जून से अब तक 41 पुष्ट मामले और 27 मौतें। न वैक्सीन, न एंटीवायरल दवा; सिर्फ निगरानी और कीट नियंत्रण ही हथियार। दो साल में दूसरा बड़ा प्रकोप, और बच्चे सबसे अधिक निशाने पर।

मुख्य बातें

गुजरात में 30 जून से 14 अगस्त 2026 के बीच चांदीपुरा वायरस के 41 लैब-पुष्ट मामले और 27 मौतें दर्ज।
कुल 257 संदिग्ध मामले ; 246 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त, 11 अभी लंबित।
21 जुलाई तक केवल 12 पुष्ट मामले थे — तीन सप्ताह में संख्या तीन गुनी से अधिक।
15 वर्ष से कम आयु के बच्चे सर्वाधिक जोखिम में; वायरस सैंडफ्लाई के ज़रिए फैलता है।
फिलहाल कोई एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं; रोकथाम ही एकमात्र उपाय।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाँच, कीटनाशक छिड़काव और जागरूकता अभियान जारी।

गुजरात के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 अगस्त 2026 को जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, राज्य में 30 जून से शुरू हुई मौजूदा निगरानी अवधि में चांदीपुरा वायरस के 41 लैब-पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और इस संक्रमण से 27 लोगों की मौत हो चुकी है। 14 अगस्त शाम 5 बजे IST तक राज्य में कुल 257 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 246 नमूनों की जाँच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और 11 नमूनों की रिपोर्ट अभी लंबित है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य विभाग के आँकड़े बताते हैं कि संक्रमण के मामलों में पहले की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 21 जुलाई तक राज्य में केवल 63 संदिग्ध मामले थे, जिनमें से 12 की पुष्टि हुई थी। अब यह संख्या बढ़कर क्रमशः 257 संदिग्ध और 41 पुष्ट मामले हो चुकी है — यानी तीन सप्ताह से भी कम समय में पुष्ट मामले तीन गुने से अधिक हो गए।

गौरतलब है कि यह ताज़ा प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब दो वर्ष पूर्व भी गुजरात चांदीपुरा वायरस के बड़े प्रकोप से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में शामिल था। यह इस क्षेत्र में वायरस की आवर्ती प्रकृति को रेखांकित करता है।

वायरस की प्रकृति और जोखिम

चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से जुड़ा संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के ज़रिए फैलता है। इसके प्रकोप की घटनाएँ आमतौर पर मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में देखी जाती हैं।

नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) के अनुसार, इस वायरस से अचानक तेज़ बुखार और तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) से जुड़े लक्षण उभर सकते हैं। विशेष रूप से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे इसके प्रति सर्वाधिक संवेदनशील होते हैं। तेज़ बुखार, उल्टी, दौरे, मानसिक स्थिति में बदलाव और अन्य तंत्रिका संबंधी लक्षण तेज़ी से गंभीर रूप ले सकते हैं।

फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिससे रोकथाम और शीघ्र चिकित्सा हस्तक्षेप ही एकमात्र प्रभावी उपाय बने हुए हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने 21 जुलाई के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी का दायरा बढ़ा दिया था। इसके तहत घर-घर जाकर लोगों की जाँच, सैंडफ्लाई नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का छिड़काव, घरों और पशुशालाओं के आसपास स्वच्छता अभियान तथा जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित गाँवों में निगरानी का दायरा विस्तृत किया गया है।

आम जनता पर असर और बचाव

विशेषज्ञों के अनुसार, इस संक्रमण से बचाव के लिए सैंडफ्लाई के संपर्क को कम करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग, स्वच्छता बनाए रखना और कीट नियंत्रण उपाय अपनाना ज़रूरी है। किसी भी लक्षण के प्रकट होने पर तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि निगरानी और रोकथाम अभियान जारी रहेंगे, तथा लंबित 11 नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न एंटीवायरल — ऐसे में रोकथाम की पूरी ज़िम्मेदारी ज़मीनी स्वास्थ्य तंत्र पर है, जो मानसून के दौरान पहले से दबाव में रहता है। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर दीर्घकालिक वेक्टर नियंत्रण रणनीति नहीं बनातीं, यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीपुरा वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से जुड़ा संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के ज़रिए फैलता है। इसके प्रकोप की घटनाएँ आमतौर पर मध्य और पश्चिमी भारत में देखी जाती हैं, और 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे सर्वाधिक जोखिम में होते हैं।
गुजरात में अब तक कितने चांदीपुरा वायरस के मामले और मौतें हुई हैं?
14 अगस्त 2026 तक गुजरात में 257 संदिग्ध मामले दर्ज हुए, जिनमें से 41 की लैब से पुष्टि हो चुकी है और 27 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आँकड़े 30 जून से शुरू हुई मौजूदा निगरानी अवधि के हैं।
चांदीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं और किसे सबसे अधिक खतरा है?
नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के अनुसार, इस वायरस से अचानक तेज़ बुखार, उल्टी, दौरे, मानसिक स्थिति में बदलाव और अन्य तंत्रिका संबंधी लक्षण उभर सकते हैं। 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे इसके प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं और लक्षण तेज़ी से गंभीर रूप ले सकते हैं।
चांदीपुरा वायरस का इलाज या वैक्सीन उपलब्ध है?
फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सैंडफ्लाई के संपर्क को कम करना, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना ही बचाव के प्रमुख उपाय हैं।
गुजरात सरकार इस प्रकोप से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
गुजरात स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाँच, कीटनाशकों का छिड़काव, स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। घरों और पशुशालाओं के आसपास सैंडफ्लाई नियंत्रण के विशेष उपाय भी किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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